अभिक्रमित अनुदेशन : उत्पत्ति एवं प्रकार- रेखीय, शाखीय एवं मैथेटिक्स अभिक्रम - Programmed Instruction: Origin and Types - Linear, Linear and Mathematics Programs

अभिक्रमित अनुदेशन : उत्पत्ति एवं प्रकार- रेखीय, शाखीय एवं मैथेटिक्स अभिक्रम - Programmed Instruction: Origin and Types - Linear, Linear and Mathematics Programs


अभिक्रमित अनुदेशन शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को सुव्यवस्थित क्रमबद्ध और वैज्ञानिक बनाने के लिए

स्व-अध्ययन पर आधारित एक प्रक्रिया है। यह एक व्यक्तिगत छात्र केंद्रित विधि है, जिसमें छात्र तत्काल पृष्ठपोषण प्राप्त कर अपनी उपलब्धि का स्वयं मूल्यांकन करते हुए अधिगम करता है। शिक्षाशास्त्री डी. एल. कुक के मतानुसार- "अभिक्रमित अनुदेशन, स्व- शिक्षण विधियों के व्यापक, " संप्रत्यय को स्पष्ट करने के लिए प्रयुक्त एक विधा है।"


स्टोफल के अनुसार- "ज्ञान के छोटे अंशों को एक तार्किक क्रम में व्यवस्थित करने को अभिक्रम तथा इसकी संपूर्ण प्रक्रिया को अभिक्रमित अनुदेशन कहते हैं।


अभिक्रमित अनुदेशन की उत्पत्ति 20वीं सदी में हुई । सर्वप्रथम 1920 में अमेरिका के ओहयो स्टेट यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिक सिडनी एल. प्रेसी ने शिक्षण मशीन का विकास किया। इस मशीन में छात्रों को क्रम से एक-एक प्रश्न दिया जाता था तथा प्रतिक्रिया की जाँच होती थी। 1932 में इस प्रकार की शिक्षण मशीन पर कार्य बंद कर दिया गया। सन् 1950 के पश्चात बी. एफ. स्किनर ने सीखने पर कई प्रयोग किए तथा एक स्व-शिक्षण सामग्री का निर्माण किया, इसे ही अभिक्रमित अनुदेशन नाम दिया गया।