अभिक्रमित अधिगम / अनुदेशन - Programmed Learning

अभिक्रमित अधिगम / अनुदेशन - Programmed Learning


अभिक्रमित अधिगम को अभिक्रमित अनुदेशन भी कहा जाता है। यह स्वयं अनुदेशन या स्वयं अधिगम की एक महत्वपूर्ण प्रविधि है। इसका मुख्य आधार स्किनर के अधिगम के 'क्रियात्मक अनुबन्ध' के सिद्धांत तथा थार्नडाइक के 'प्रभाव के नियम' को माना जाता है।


पी. एस. आनन्द के शब्दों में- अभिक्रमित अधिगम एक ऐसी शिक्षण प्रविधि अथवा तकनीक है, जिसमें सीखने योग्य विषय-वस्तु को छोटे-छोटे पदों के रूप में इस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है कि विद्यार्थी स्वयं प्रयत्न और स्वयं गति से सक्रिय रहकर एक पद से दूसरे पद तक आगे बढ़ता है। प्रत्येक पद पर उसे अनुक्रिया करनी होती है जिसकी सफलता का ज्ञान उसे तुरन्त कराया जाता है। शिक्षण सामग्री को छोटे छोटे पदों में तार्किक क्रम में व्यवस्थित करने की क्रिया को अभिक्रम तथा इसकी संपूर्ण प्रक्रिया को अभिक्रमित अनुदेशन या अभिक्रमित अध्ययन अथवा अभिक्रमित अधिगम कहा जाता है। छात्र एक पद का एक बिन्दु सीखता है, फिर अनुक्रिया करता है।

अनुक्रिया के पश्चात् की गयी अनुक्रिया की जाँच करता है। जाँच करने पर यदि ज्ञात होता है कि उसकी अनुक्रिया सही थी तो वह अगले बिन्दु या पद को सीखने के लिये अग्रसर हो जाता है। इस प्रकार अभिक्रमित अधिगम में छात्र एक के बाद एक नये ज्ञान के बिन्दु अथवा नवीन पद का ज्ञान प्राप्त करते हुए पूर्ण विषय-वस्तु से परिचित ही नहीं, उस पर अधिकार भी प्राप्त कर लेते हैं। यदि पद का ज्ञान प्राप्त करने के पश्चात् जाँच करने पर यह पता चलता है कि छात्र की अनुक्रिया सही नहीं है तो वह अभिक्रमित सामग्री के निर्देशित पृष्ठों पर जाता है और वहाँ से विषय-वस्तु का स्पष्टीकरण प्राप्त करता है। स्पष्टीकरण के पश्चात् वह पुन: उसी पद की अनुक्रिया करता है जाँच करता है और सही होने पर अगले ज्ञान के बिन्दु अथवा अगले पद की ओर बढ़ जाता है।