रेडियो - radio
रेडियो - radio
जन संप्रेषण के लिये रेडियो द्वारा संप्रेषण एक लाजबाव उपकरण है जो प्रत्येक गाँव तक पहुँच चुका है। इसके द्वारा नवीन ध्वनि, शैक्षिक नाटक, कविताएँ, महापुरूषों की जीवनियाँ, उनके प्रेरक प्रसंग, नये आविष्कार तथा खोजें, सामान्य ज्ञान, कठिन प्रकरण तथा पाठ योजनाएँ आदि प्रसारित की जाती हैं। आज भारत में कुल जनसंख्या के 95 प्रतिशत लोगों तक रेडियो की पहुँच हो गयी है।
रेडियो पर स्कूल-प्रसारण सर्वप्रथम 1973 में कलकत्ता रेडियो स्टेशन से किया गया। रेडियो पर शैक्षिक प्रसारण की पूरी जानकारी विद्यालयों को पहले ही दे दी जाती है। फलस्वरूप, जिस विषय पर प्रसारण होना है शिक्षक अपनी कक्षा को उसके लिए पहले से तैयार करता है।
उसकी पृष्ठभूमि तथा भूमिका बनाता है और प्रसारण के पश्चात् छात्रों की समस्याओं एवं शंकाओं का निवारण करता है। कई बार शैक्षिक प्रसारण की रिकार्डिंग भी शिक्षक कर लेता है। फिर आवश्यकतानुसार आवश्यक भागों को पुनः छात्रों को सुनाकर उचित निर्देश देता है। एक अच्छा शिक्षक, रेडियो के सभी शैक्षिक प्रसारणों की निरन्तर सूचना रखता है और योजनाबद्ध विधि से प्रसारित शैक्षिक प्रसारणों का उपयोग करता है। रेडियो द्वारा विभिन्न शिक्षाशास्त्रियों की राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय समस्याओं के बारे में अनेक वार्ताएँ, भाषण तथा विचार आदि सुनने का और उन्हें समझने का अवसर मिलता है देश के दूर-दूर तक बसे जन-जन तक एक साथ नवीनतम घटनाओं का ज्ञान देने में रेडियो की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गयी है।
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