बाल श्रम के लिए उत्तरदायी कारण - Reasons responsible for child labor

बाल श्रम के लिए उत्तरदायी कारण - Reasons responsible for child labor


भारत में बाल श्रम के लिए पारिवारिक गरीबी एक महत्वपूर्ण उत्तरदायी कारक है. कुछ आँकड़े बताते है कि 18 से 58 वर्ष की आयु के (जो अधिकांशतः बच्चों के पालन पोषण का दायित्व निर्वहन करते है) लगभग 25 प्रतिशत लोग बेकार है। शेष जो रोजगार प्राप्त हैं उनमें से 92 प्रतिशत लोग असंगठित होकर क्षेत्र में काम करते है जहां न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों पर अमल नहीं होता। साथ ही पूरे वर्ष रोजगार की समस्या रहती है। गरीबी के इस परिवेश में बच्चे मजदूरी करने हेतु विवश हो जाते है। बाल मजदूरी के प्रोत्साहन में नियोक्ताओं का हित भी उत्तरदायी है. वस्तुतः बाल श्रमिक सस्ता और आज्ञाकारी श्रमिक होता है। जिसकी कोई संगठित क्षमता नहीं होती है। उसे डरा धमका कर बड़े लम्बे समय तक कम मजदूरी पर काम लिया जा सकता है। इस प्रकार उत्पादन व्यय कम करने की दृष्टि से नियोक्ता के लिए बाल श्रम लाभ का स्रोत्र है। बाल श्रम के लिए माता पिता की अशिक्षा, विद्यालय का भयप्रद वातावरण, अपव्यय, और अवरोधन भी महत्वपूर्ण है। कई बार विद्यालय का भय प्रद वातावरण उन्हें विद्यालय छोड़ने के लिए बाध्य कर देता है।

एक अनुमान के मुताबिक कक्षा 1 में नामांकित होने वाले 100 बच्चों में से 40 ही कक्षा 5 तक पहुँच पाते है। कक्षा 8 तक तो यह संख्या मात्र 20 रह जाती है। जाहिर है विद्यालय छोड़ देने वाले ये सभी खेलने और पढ़ने की उम्र में बालश्रमिक बनकर परिवार के कमाऊं पूत बन जाते है। बाल श्रम के निवाराणार्थ बनाए गए अधिनियमों एवं प्रावधानों का कठोरतापूर्वक पालन न हो पाना भी इस समस्या के निरन्तर विकास का एक प्रभावी कारण है। सरकारी तथा गैर सरकारी तौर पर किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि माचिस तथा पटाखा बनाने वाली फैक्ट्रियों में विस्फोटक सामग्री कानून तथा फैक्ट्री कानून तथा श्रम कानूनों का उल्लंघन किया जाता है। बाल श्रम के लिए हमारा जाती या वर्ग आधारित सामाजिक ढांचा, जिसमें प्रायः निम्न जाती या वर्ग आधारित सामाजिक ढाँचा जिसमें प्राय: निम्न जाती या वर्ग में जन्म लेने वाले बच्चों को मजदूरी विरासत में मिलती है, भी जिम्मेदार है शिक्षा के प्रति जागरूकता का अभाव बुरी संगत पारिवारिक तनाव आदि बाल मजदूरी के अन्य प्रमुख कारण है।