सामाजिक विज्ञान का अन्य विषयों से सम्बन्ध - Relationship of social science with other subjects
सामाजिक विज्ञान का अन्य विषयों से सम्बन्ध - Relationship of social science with other subjects
सामाजिक अध्ययन अपनी विषय-वस्तु एवं क्रियाओं को संगठित करने के लिए सामाजिक विज्ञानों से विभिन्न मूलभूत सिद्धांतों को ग्रहण करता है। प्रत्येक सामाजिक विज्ञान से ग्रहण किए जाने वाले सिद्धान्त इस प्रकार हैं
1. भूगोल (Geography): सामाजिक अध्ययन इस विषय से निम्न सिद्धांतों को ग्रहण करता है
a. पृथ्वी पर निवास करने वाले प्राणियों का जीवन पृथ्वी के स्वरुप, आकार तथा उसकी गति द्वारा प्रभावित किया जाता है।
a. स्थान एवं समय के द्वारा ऐसे ढांचे का निर्माण किया जाता है जिसमें घटनाएं घटित होती हैं।
b. जलवायु का निर्धारण सूर्य प्रकाश, तापक्रम, वायुमंडल के दबाव हवाओं, समुद्री धाराओं, पर्वतीय नियमों आदि के द्वारा किया जाता है।
c. भूमि, जल, हवा आदि प्राकृतिक साधन हैं जो मनुष्य के लिए परमावश्यक हैं।
d. मनुष्य अपना भोजन, वस्त्र तथा निवास की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रयास करता है। ऐसा करने में वह पृथ्वी का उपयोग और विदोहन करता है।
e मनुष्य द्वारा प्राकृतिक साधनों का उपयोग उसकी इच्छाओं तथा उसके प्रौद्योगिकी के ज्ञान से सम्बंधित है।
2. इतिहास (History): सामाजिक अध्ययन इतिहास से निम्न मूलभूत सिद्धांतों को ग्रहण करता है
b. इतिहास स्वयं की पुनरावृत्ति नहीं करता है, वरन अतीत की घटनाएं वर्तमान की घटनाओं को प्रभावी करती हैं।
c. प्रत्येक स्थान पर मानवीय सम्बन्धों को निर्धारित करने में पारस्परिक निर्भरता महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।
d. विभिन्न मानवीय प्रेरक, प्रेरणाएं एवं विचार, चाहे वे ऐतिहासिक एवं मानवीय प्रगति की दृष्टि से सत्य हैं या असत्य: स्थानीय, राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कार्यों को प्रभावित करते हैं।
3. राजनीतिशास्त्र (Political Science) : सामाजिक अध्ययन राजनीतिशास्त्र से निम्नलिखित सिद्धांतों को प्राप्त करता है
a. बहुत सी मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति परिवार, चर्च, प्रेस तथा व्यक्तिगत व्यवसायों द्वारा की जा सकती है, फिर भी सरकार समाज की सेवा करने वाली महत्वपूर्ण संस्था है।
b. सरकार के अंतिम दायित्वों को पांच भागों में विभक्त किया जा सकता है-
अ. बाह्य सुरक्षा
ब. आन्तरिक सुरक्षा
स. न्याय
द. सामान्य हित के लिए अनिवार्य सेवाएँ
य. लोकतंत्रीय राज्य में स्वतंत्रता प्रदान करना।
c. लोकतंत्र में सरकार जनता की सेवक है, न कि जनता सरकार की सेवक ।
d. कोई भी सरकार तब तक सफलतापूर्वक कार्य नहीं कर सकती है जब तक वह स्वयं को नवीन परिस्थितियों के अनुकूल नहीं बनाती है।
आधुनिक विश्व के सभी राष्ट्र आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा राजनीतिक जीवन की अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के अंग हैं।
4. अर्थशास्त्र (Economics): सामाजिक अध्ययन अर्थशास्त्र से
निम्नलिखित मूलभूत सिद्धांतों को ग्रहण करता है
(i) इच्छाएँ असीमित हैं और साधन सीमित हैं, इस कारण प्रत्येक राष्ट्र को निम्न आर्थिक समस्याओं को सुलझाना चाहिए-
- किस वस्तु का उत्पादन किया जाए?
- उसको कितनी मात्रा में उत्पादित किया जाए?
- उसका किस प्रकार उत्पादन किया जाए?
- उसका वितरण किस प्रकार किया जाए?
(ii) श्रम, प्राकृतिक साधन, पूंजी तथा ज्ञान (प्रौद्योगिकी) उत्पादन के महत्वपूर्ण कारक हैं।
(iii) जीवन का उच्च स्तर उत्पादकता पर निर्भर है।
5. मानवशास्त्र (Anthropology): सामाजिक अध्ययन मानवशास्त्र से निम्नलिखित सिद्धांतों को प्राप्त करता है-
(i) आदिकालीन लोगों के विश्वासों, परम्पराओं तथा रहन-सहन के ढंगों को आज के तत्कालीन वातावरण की परिस्थितियों से घनिष्ठ रूप में सम्बंधित किया जा सकता है।
(ii) सामूहिक जीवन का प्रादुर्भाव परिवार से हुआ और वह सांस्कृतिक परिवर्तनों के फलस्वरूप जटिल हो गया।
(iii) संस्कृत में मानवीय समूहों द्वारा विकसित ज्ञान, विश्वास तथा मूल्य निहित हैं।
(iv) आधुनिक समाज विभिन्न काल एवं स्थानों की संस्कृतियों का ऋणी है।
(v) जिस संस्कृति में किसी व्यक्ति का पालन-पोषण होता है, उसका उस पर जीवनभर प्रभाव पड़ता है।
6. समाजशास्त्र (Sociology): सामाजिक अध्ययन समाजशास्त्र से निम्नलिखित मूलभूत सिद्धांतों को ग्रहण करता हैं।
(i) समाज का कार्य उन संगठित समूहों द्वारा संचालित किया जाता है जो सामान्य हितों की प्राप्ति के लिए संगठित किए जाते हैं।
(ii) सामूहिक क्रिया और सांस्कृतिक उन्नति के लिए समूहों के सदस्यों और समूहों के बीच आदान-प्रदान होना आवश्यक है।
(iii) परिवार. चर्च, विद्यालय, सरकार और व्यवसाय नामक संस्थाओं के द्वारा लक्ष्यों, विश्वासों, ज्ञान तथा मूल्यों को हस्तान्तरित एवं परिवर्तित किया जा सकता है।
(iv) समाज के अस्तित्व के लिए सामाजिक नियंत्रण की पद्धति अनिवार्य है।
7. मनोविज्ञान (Psychology): सामाजिक अध्ययन मनोविज्ञान से निम्नलिखित सिद्धांतों को ग्रहण करता है
(i) व्यवहार विविध, जटिल तथा अंतर्सम्बंधित कारणों के फलस्वरूप होता है।
(ii) मानवीय आचरण साभिप्राय प्रजनन तथा वातावरण सम्बन्धी कारकों का फल होता है।
(iii) व्यक्ति एक-दूसरे से वैयक्तिक मूल्यों, वृत्तियों, व्यक्तित्वों आदि से भिन्न होते हैं।
(iv) समूह के सदस्य कुछ सामान्य मूल्यों और विशेषताओं को रखते हैं।
(v) प्रत्येक समूह अपने सदस्य के आचरण को प्रभावित करता है।
8. दर्शन ( Philosophy)-. सामाजिक अध्ययन दर्शन से निम्न सिद्धांतों को ग्रहण करता है।
(i) तर्कशास्त्र, वैज्ञानिक तथा नैतिक विश्लेषण दर्शन द्वारा प्रदान किए जाते हैं।
(ii) एक स्वतंत्र समाज अपने हित के लिए स्वतंत्र अन्वेषण के मार्ग को खुला रखता है और अपने नागरिकों की खोज करने की आदतों का निर्माण करता है। सामाजिक अध्ययन विभिन्न सामाजिक विज्ञानों से उक्त सामान्य विषयों या सिद्धांतों को ग्रहण करके अपने समन्वित या एकीकृत स्वरूप का निर्माण करता है।
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