प्रबन्धकीय अर्थशास्त्री का उत्तरदायित्व - Responsibilities of a Managerial Economist

प्रबन्धकीय अर्थशास्त्री का उत्तरदायित्व - Responsibilities of a Managerial Economist


प्रबन्धकीय अर्थशास्त्री प्रबन्ध को निर्णय लेने तथा भावी नियोजन में सहायता प्रदान करता हैं। उसकी सफलता इस बात में निहित है कि वह अपने उत्तरदायित्वों का निर्वाह संस्थान के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु करता रहे। उसके निम्नलिखित उत्तरदायित्व हैं-


1. विनियोजित पूँजी पर समुचित लाभ (To make a Reasonable Profit on Capital employed) - प्रत्येक व्यवसाय का उद्देश्य लाभ कमाना होता है। एक प्रबन्धकीय अर्थशास्त्री का यह उत्तरदायित्व है कि वह संस्थान के लाभों में वृद्धि करने में कहाँ तक सफल होता है। यदि वह फर्म अथवा संस्थान को समुचित लाभ दिलाने में असमर्थ रहता है तो उसके शैक्षणिक प्रशिक्षण, अनुभव व व्यवसाय कुशलता का महत्व घट जाता है।

अतः उसका यह एक महत्वपूर्ण दायित्व है कि फर्म की लार्भाजन शक्ति में निरंतर वृद्धि करे


2 सफल पूर्वानुमान (Successful Forecasts) - प्रबन्धकीय अर्थशास्त्री की कुशलता उसके पूर्वानुमानों की शुद्धता पर निर्भर करती हैं। भविष्य अनिश्चित होने के कारण व्यवसाय में जोखिम बढ़ने की सम्भावना उत्पन्न होती है। अतः प्रबन्धकीय अर्थशास्त्री का यह दायित्व हो जाता है कि वह सर्वोच्च प्रबन्ध को अपने व्यवसाय के सम्बन्ध में सही पूर्वानुमान प्रस्तुत करे जिससे व्यवसाय की अनिश्चितताओं को दूर करके जोखिम को दूर किया जा सके। उसे अपने पूर्वानुमानों को शुद्धतम बनाने के लिए निरन्तर प्रयत्नशील रहना चाहिए। इससे ही वह प्रबन्ध का विश्वास और प्रसिद्ध का विश्वास और प्रसिद्ध प्राप्त करने में सफल हो सकता है।


प्रबन्धकीय अर्थशास्त्री को व्यवसाय प्रवृत्ति और व्यापार चकों पर ध्यान देना चाहिए और व्यवसाय की विभिन्न क्रियाओं के सम्बन्ध में सम्भावित परावर्तन बिन्दुओं से प्रबन्ध को सजग करना चाहिए।


यदि प्रबन्धकीय अर्थशास्त्री को अपने पूर्वानुमानों में किसी भी प्रकार की अशुद्धि या त्रुटि का पता चल जाता है तो इसकी सुचना तुरन्त सर्वोच्च प्रबन्धक को दी जानी चाहिए जिससे कि प्रबन्ध अपनी भावी नीतियों एवं कार्यक्रमों में समुचित समायोजन कर सके।


3. आर्थिक सूचना के स्त्रोतों एवं विशेषज्ञों से सम्पर्क (Contacts with the Sources of Economic Information and the Experts ) प्रबन्धकीय अर्थशास्त्री को ऐसे व्यक्तियों और संस्थाओं से अपना सम्पर्क स्थापित करना चाहिए जहाँ से उसे अपनी फर्म को प्रभावित करने वाली आर्थिक सूचनायें तुरन्त मिलती रहे।

इसके साथ ही उसे अपने विषय के विशेषज्ञों से परिचय और उनके बारे में पूर्ण जानकारी रखनी चाहिए। प्रबन्ध के लिए प्रबन्धकीय अर्थशास्त्री का महत्व है कि वह सम्बन्धित सूचनायें एकत्रित करके उनसे अवगत करावे ।


3. संस्थान में उसका स्थान (His status in the organisation) - एक प्रबन्धकीय अर्थशास्त्री को फर्म में अपना उपयुक्त स्थान स्थापित करना चाहिए। वह अपना कार्य तभी प्रभावपूर्ण ढंग से कर सकता है जब प्रबन्ध को उसके ज्ञान एवं साधनों की आवश्यकता हो उसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह किस सीमा तक प्रबन्ध को प्रभावित करता है उसे प्रबन्ध को सरल एवं बोधगम्य भाषा से संदेशवहन करना चाहिए जिससे कि वे एक-दूसरे के अधिक निकट आ सके। यदि प्रबन्ध द्वारा उसकी बात अस्वीकृत कर दी जाती है तो उसका महत्व निरन्तर घटने लगता है।