इरिक्सन के मनो-सामाजिक विकास के सिद्धांत की समीक्षा - A review of Erickson's theory of psychosocial development
इरिक्सन के मनो-सामाजिक विकास के सिद्धांत की समीक्षा - A review of Erickson's theory of psychosocial development
९. यद्यपि इरिक्सन की कलात्मक शैली ने बहुत से लोगों को प्रभावित किया है, तथापि अस्पष्टता और आत्मीयता के लिए उसकी आलोचना भी की है। इरिक्सन स्वयं भी इस आलोचना की पुष्टि करते हैं कि उनको उनकी वैज्ञानिक प्रशिक्षण या पद्धति ने नहीं बल्कि कलात्मक भावना ने निर्देशित किया है।
२. इरिक्सन ने अपने सबसे महत्वपूर्ण अनुभवजन्य अनुसंधानों के आधार पर विशोरावस्था और पहचान को विस्तार देने के लिए अपने चारों ओर फैले विचारों को स्थापित करने का प्रयास किया है। किशोरावस्था के बारे में उनके सैद्धांतिक दृष्टिकोण का जेम्स ई मार्सिया ने अध्ययन किया और उसका समर्थन भी किया। मार्सिया के काम ने पहचान को विभिन्न रूपों में प्रतिष्ठित किया है और ऐसे अनुभवजन्य साक्ष्यों को प्रस्तुत किया है जो लोगों के सुसंगत आत्म-संप्रत्यय का किशोरावस्था में निर्माण करते है और प्रारम्भिक प्रौढावस्था में अंतरंग संलग्नक को भी दर्शाते हैं।
यह इरिक्सन के सिद्धांत का समर्थन करते हैं। साथ ही, सुझाब देते हैं कि जो प्रारम्भिक प्रौढावस्था की कमियों को सुलझाने में लगे हैं, वे सफलतापूर्वक किशोरावस्था की कमियों व संकट को हल कर लेते हैं।
३. इरिक्सन के सिद्धांत पर प्रश्न उठाया गया कि क्या उनके सिद्धांत के चरण अनुक्रमिक हैं या केवल उनके द्वारा सुझाए आयु वर्ग के भीतर तक ही सीमित है। उदाहरण के लिए क्या एक व्यक्ति केबल किशोरावस्था के दौरान पहचान की खोज करता है या कर सकता है? इसके अलावा क्या दूसरे चरण की शुरुआत के पहले एक चरण का पूरा होना आवश्यक है? ऐसा जरूरी है क्या कि पहचान एवं अंतरंगता के चरण को प्राप्त करने से पहले उद्योग के चरण को पूरा कर लिया जाय आदि।
इस प्रकार कहा जा सकता है कि आलोचनाओं के बाद भी इरिक इरिक्सन का मनो-सामाजिक विकास का सिद्धांत सामाजिक संपर्क और व्यक्तित्व विकास को समझने में सहायक है। मनोविश्लेषक डेनिश का भी यही मानना है और वे इरिक्सन के सिद्धांत का समर्थन करते हैं। जन्म से एक बच्चा सुरक्षा की अपनी धारणा को अपनी संवेगात्मक पृष्ठभूमि के रूप में निर्मित करता है। खोजपूर्ण सहज ज्ञान को हासिल करने की लड़ाई में वह नए किस्म के डर का अनुभव करता है। वह जब खुद को सुरक्षित महसूस करता है तो विजेता बनता है। जो शिक्षक मनो-सामाजिक विकास की अवधारणा का उपयोग करना चाहते हैं, उसे कक्षा में सुरक्षित वातावरण का निर्माण करना होना ताकि प्रत्येक बच्चे को नए जान और रिश्तों की खोज करने में प्रोत्साहन मिले और सहजता महसूस हो।
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