पाठ्य-पुस्तकों की समीक्षा - review of textbooks
पाठ्य-पुस्तकों की समीक्षा - review of textbooks
पाठ्य-पुस्तकें दो प्रकार की होती हैं
सूक्ष्म अध्ययनार्थ पुस्तकें
सूक्ष्म अध्ययन वाली पुस्तकों का अध्ययन बड़ी गंभीरता से किया जाता है। इनका उद्देश्य बालकों के शब्द भंडार में बृद्धि करना, उनका भाषा ज्ञान बढ़ाना उनके सूक्ति-भंडार या लोकोक्ति-भंडार में वृद्धि करना एवं प्रसंगों को भली-भाँति स्पष्ट करना है। इन पुस्तकों को ही साधारणतया पाठ्य-पुस्तकें कहा जाता है। इन्हें गहन अध्ययन की पुस्तकें भी कहते हैं। इनके अध्ययन से छात्रों के ज्ञान में वृद्धि होती है और वे लेखक या कवि के विचारों से परिचय प्राप्त कर लेते हैं।
विस्तृत अध्येयनार्थ पुस्तकें
विस्तृत अध्ययन के लिए सहायक पुस्तकों का प्रयोग द्रुत पाठ के लिए होता है। इसमें सीखी हुई शब्दावली का ही प्रयोग किया जाता है। इनका उद्देश्यो बालकों को द्रुत गति से पढ़ने का अभ्यास कराना है। छात्र शीघ्र गति से पुस्तक को पढ़कर भी उसका अर्थ समझ लें, यही इस पुस्तक का उद्देश्य होता है। शब्दार्थ को स्पष्ट करना एवं व्याख्या करना इन पुस्तकों के शिक्षण का उद्देश्य नहीं होता। कहीं-कहीं आवश्यकता पड़ने पर ही शब्दकोष की सहायता लेनी पड़गी।
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