पर्यावरण जागरूकता के विकास में अध्यापकों की भूमिका एवं उत्तरदायित्व - Role and Responsibilities of Teachers in Development of Environmental Awareness
पर्यावरण जागरूकता के विकास में अध्यापकों की भूमिका एवं उत्तरदायित्व - Role and Responsibilities of Teachers in Development of Environmental Awareness
पर्यावरण चेतना का प्रारम्भिक स्वरूप उसके उपयोग तक सीमित था किन्तु अब यह बात वर्तमान शताब्दी के उत्तरार्द्ध से प्रारम्भ हो कर पर्यावरण चेतना के विविध स्वरूपों के अध्ययन से जुड़ा हुआ है, तथा यह विश्वव्यापी अभियान के रूप में कारगार किये जाने की संकल्पना का रूप ले रही है। पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने वाले कार्यक्रमों में समाज के विभिन्न वर्ग के लोगो को अपने पर्यावरण के सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्षों के प्रति संवेदनशील बनाना मुख्य ध्येय होना चाहिए स्मरणीय है कि हमारी आबादी के अधिकांश पढ़े-लिखे लोग भी पर्यावरण को अच्छी तरह नही समझते है । वे पर्यावरण में परिस्थितिकी असन्तुलन एवं प्रदूषण की परिस्थितियों से अपरिचित है तथा इनसे सम्बन्धित समस्याओं की जानकारी नहीं रखते है।
जो लोग पर्यावरण की इन समस्याओं से परिचित हैं । वे इनके स्वरूप एवं गम्भीरता को अच्छी तरह समझने की कोशिश नहीं कर पाते है। अतः पर्यावरण चेतना का सम्बन्ध संवेदनशीलता से जुड़ा हुआ है, जिसमे पर्यावरण के प्रति हमारी धारणा या दृष्टिकोण अर्थात् हम पर्यावरण को किस रूप मे देखते है, पर्यावरण के प्रति कितने सचेष्ट है, इसकी जानकारी प्राप्त होती है। यह मानव के पर्यावरण के प्रति मानसिक अनुभूति का परिणाम है। अतः यह स्थायी न होकर परिवर्तित होती रहती है जिसके लिए सही दिशा प्रदान करना आवश्यक होता है। पर्यावरण एवं पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति जागृति एवं संवेदनशीलता के विकास से ही पर्यावरण चेतना का विकास किया जा सकता है, जिसके लिए अध्यापक जो समाज के महत्वपूर्ण भाग विद्यालय से जुड़ा है, की बड़ी अहम भूमिका हो सकती है।
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