शिक्षा के केन्द्रीय अभिकरणों की भूमिका - Role of central agencies of education

शिक्षा के केन्द्रीय अभिकरणों की भूमिका - Role of central agencies of education


विभिन्न केन्द्रीय अभिकरणों की भूमिका एवं कार्य का वर्णन निम्नलिखित है मंत्रालय Ministry of Human Resource and Development M.H.R.D.)


स्वतंत्रता के पश्चात् शिखा विभाग को शिक्षामंत्रालय में परिवर्तित कर दिया गया सन् १९५७ में शिक्षा मंत्रालय के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान को जोड़ा गया और सन १९५८ में इस मंत्रालय को दो में विभाजित कर दिया


(१) शिवा (Ministry of Education


(२) वैज्ञानिक अनुसंधान एवं मामलों का मंत्रालय Ministry of Scientific Research and Cultural Affair


उपर्युक्त दोनों मंत्रालय अलग-अलग राज्य मंत्री की अध्यक्षता में रखे गए। सन् १९६३ में पुनः इन्हें मिलाकर एक कर दिया गया जिसको दो भागों में विभाजित किया गया। जो इस प्रकार है-


 (१) विभाग (Department of Education) तथा (२) विज्ञानविभाग (Department of science)



इन्हें २९ फरवरी १९६४ से शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में रखा गया और उसकी सहायतार्थ दो उपमंत्री और एक राज्य मंत्री रखा गया। सन् १९६४-६८ में शिक्षा मंत्रालय को पुनः गठित किया। इसमें


पाँच ब्यूरो और चार डिवीजन बनाए गए जो इस प्रकार है- (१) विद्यालय शिक्षा School Education ) (२) उच्च (Higher Education), (३) सववृत्ति


Scholarship), (४) नियोजन तथा ऐसी शैक्षिक सेवाऐं (Planning and Ancillary Education service) तथा (५) साहित्य और ललितकलाएँ


(Languages, Literature and Fine art)


उपर्युक्त शिक्षा मंत्रालय में निम्नलिखित चार विभाग के


(१) शारीरिक शिक्षा तथा मनोरंजन (Physcial education and recreation)


(२) वैज्ञानिक अनुसंधान (Scientific research)


(३) (External relations)


(४) प्रशासन (Administration)


सन् १९६७-६८ में इस शिक्षा मंत्रालय का पुनःकिया गया और इसमें दी ब्यूरो को और जोड़ा गया साथ ही इन समस्त ब्यूरो के नामों में परिवर्तन किया गया जो निम्नलिखित है


(१) सांस्कृतिक क्रियाओं का ब्यूरो (Bureau of Cultural Activities)


(२) नियोजन और समन्वय ब्यूटे (Bureau of Planning and Cordination)


(3) प्रशासकीय व्यूरो (Bureau of Administration)


(५) सामान्य का ब्यूरो (Bureau of General Education)


(५) शिक्षा का ब्यूरो Bureau of Technical Education)


(६) छात्रवृति और युवा सेवाओं का ब्यूरो (Bureau of Scholarship and Youth Services)


(७) भाषा एवं पुस्तक-प्रोन्नति का ब्यूरो (Bureau of Language and Book Promotion) प्रत्येक व्यूरो एक संयुक्त सचिव परामदर्श दाता के अधीन रखा गया तथा उनके अधीन उपशिक्षा परामर्शयता, उपसचिव, सहायक शिक्षा परामर्शदाता, उच्च विज्ञान अधिकारी व विभाग अधिकारी रखे


गए बहुत समय तक यही व्यवस्था प्रचलित रही २६ सितम्बर १९८५ को एक नए मंत्रालय का सृजन किया गया विकास मंत्रालय (एम. एच. आर. टी.) का नाम दिया


मानव संसाधन विकास मंत्रालय (Ministry of Human Resource Development के पाँच विभाग है


(१) शिक्षा विभाग (Department of Education)


(२) संस्कृति विभाग (Department of Culture)


(३) कला (Department of Arts)


( ४ ) युवा मामले एवं खेलकूद विभाग (Department of Youth Affairs and Sports


(५) महिला और बाल सुरक्षा विभाग (Department of Women and Childcare


इस प्रकार शिक्षा मंत्रालय विभाग को पुनर्गठित करके १९८६ में इसे मानववकास मंत्रालय का नाम दिया इस समय यह मंत्रालय मानव विकास के सभी संसाधनों की व्यवस्था करता है।


केन्द्रीय स्तर का मंत्री मानव संसाधन विकास मंत्री इस विभाग की देखरेख करता है। शिक्षा सम्बन्धी दायित्वों को पूर्ण करने के लिए एक राज्यमंत्री तथा एक उपमंत्री होता है।