दूरदर्शन की भूमिका - Role of Doordarshan
दूरदर्शन की भूमिका - Role of Doordarshan
दूरदर्शन जनसंचार का बहुत ही प्रभावशाली और सशक्त माध्यम है। यह दृश्य-श्रव्य माध्यम है और इसकी कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती। इसलिए इसे सार्वजनिक माध्यम (ग्लोबल मीडिया) भी कहा जाता है। दूदर्शन के द्वारा पर्यावरण शिक्षा के उद्देश्यों को भली-भाँति प्राप्त किया जा सकता है आधुनिक तकनीकी के अंतर्गत दूरदर्शन जो जनसंचार के सशक्त साधन के रूप में उभरा है उसके माध्यम से पर्यावरण चेतना जागृति के लिए कार्यक्रम चलाये जाये तथा प्रचार के तौर-तरीकों में पर्यावरण की जागरूकता को ज्यादा महत्व दे जिससे यह मानव पर प्रभाव डाल सके एवं संवेदनशीलता विकसित करने में सहायक हों। ज्ञातव्य है कि दूरदर्शन महानिदेशालय के मैनुअल में दूरदर्शन के निम्न उद्देश्य निरूपित हैं जो पर्यावरण शिक्षा के उद्देश्यों से मिलते-जुलते हैं-
• सामाजिक परिवर्तन के प्रेरक भूमिका निभाना
• राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहन देना ।
• लोगों के मन में वैज्ञानिक चेतना जगाना।
• जनसंख्या नियंत्रण एवं परिवार कल्याण के साधन के रूप में परिवार नियोजन के संदेश का प्रसार करना
• आवश्यक सूचना तथा जानकारी उपलब्ध कराकर कृषि उत्पादन को और प्रोत्साहन देना ।
• वातावरण के संरक्षण तथा पर्यावरण संतुलन बनाये रखने में सहायता तथा प्रोत्साहन देना ।
• देश की कला और सांस्कृतिक धरोहर के प्रति जागरूकता पैदा करना यदि दूरदर्शन अपने इन उद्देश्यों की प्राप्ति में सफल होता है तो पर्यावरण की शिक्षा के प्रचार-प्रसार का मार्ग भी प्रशस्त हो जाएगा दूदर्शन द्वारा प्रसारित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान कर सकने की क्षमता का विकास लोगों में सरलतापूर्वक किया जा सकता है। जैसे- वृत्तचित्र, बाल-फिल्म आदि के द्वारा पर्यावरण के सम्बन्ध में जागरूकता विकसित की जाती है।
अभी तक दूरदर्शन की भूमिका पर्यावरण शिक्षा में पर्याप्त नहीं कही जा सकती है। इसके लिए अनेक यदि कारगर कार्यक्रम प्रस्तुत की जाये तो निश्चत ही पर्यावरण शिक्षा के प्रचार-प्रसार में इसकी भूमिका लोकप्रिय एवं सराहनीय होगी। अभी हाल ही में 'एडुसेट' के चालित हो जाने से पर्यावरण शिक्षा के तहत पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर व्यापक तौर पर एकतरफा एवं दोतरफा वीडियो के उपयोग को बढ़ावा दिया जा सकता हैं।
वार्तालाप में शामिल हों