पर्यावरण शिक्षा के प्रसारण में जनसंचार, चलचित्र एवं दूरदर्शन की भूमिका - Role of mass communication, motion picture and television in broadcasting environmental education
पर्यावरण शिक्षा के प्रसारण में जनसंचार, चलचित्र एवं दूरदर्शन की भूमिका - Role of mass communication, motion picture and television in broadcasting environmental education
वर्तमान समय में मानव ने बहुत भौतिक प्रगति की है, वह आकाश में उड़ा रहा है, उसने समुद्र की गहराईयों को छाना है, भूमि के गर्भ से अनमोल वस्तुएँ ढूँढ निकाली है अन्तरिक्ष में शहर बसाने की सोची है, किन्तु औद्योगिक विकास की अन्धी दौड़ में उसने प्राकृतिक संसाधनों का बिना सोचे समझे दोहन करते हुए एक ऐसे अप्राकृतिक पर्यावरण का निर्माण कर लिया है जो सम्पूर्ण मानव जाति के लिए चिन्तनीय है। अपने आसपास को यानि अपने पर्यावरण को समझने और उसे अच्छा बनाये रखने का उत्तरदायित्व हम सबका हैं, हमें अपने आसपास के वातावरण के बारे में समुचित जानकारी रखनी चाहिए । उसे प्रदूषित होने से बचाने के उपाय तभी कारगर हो सकते हैं, जब हम यह जानें कि पर्यावरण क्या है, पर्यावरण एवं मनुष्य के मध्य क्या सह-सम्बन्ध है? इन सभी बातों की जानकारी हम पर्यावरण शिक्षा के माध्यम से ही प्राप्त कर सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में पर्यावरण के बारे में जानने की उत्सुकता समाज के हर वर्ग में बढ़ती जा रही है। समाचार-पत्रों, आकाशवाणी, दूदर्शन आदि के माध्यरम से भी पर्यावरण के बारे में अधिक से अधिक चर्चा होती है। अतः पर्यावरण शिक्षा के प्रचार-प्रसार में जनसंचार माध्यमों की प्रमुख भूमिका है।
पर्यावरण के सम्बन्ध में सन् 1970 ई. के बाद विश्व में एक क्रांति की शुरुआत हुई जिसे पर्यावरण क्रांति कहा जा सकता है। पिछले दो दशकों में 'पर्यावरण प्रदूषण' की अन्वेषणात्मक लहरें हमारे सामने से गुजरीं। वे समस्या का हल प्राप्त करने में असमर्थ रहीं। वास्तव में हमें पर्यावरण प्रदूषण विरोध के स्थान पर पर्यावरण संरक्षण की जागरूकता विकसित करनी थी। यह जागरूकता तभी विकसित होगी जब हम समस्या के सम्बन्ध में अपने नकारात्मक अभिवृत्ति को त्यागकर सकारात्मक अभिवृत्तियों को विकसित करें। 'पर्यावरण शिक्षा' की अवधारणा इसी प्रकार की विचारधारा है। यही कारण है कि पर्यावरण शिक्षा पूरे शिक्षाक्रम में अपना महत्वपूर्ण स्थान ग्रहणकरती जा रही है। पर्यावरण शिक्षा के अन्तर्राष्ट्रीय स्तरों पर निरूपित उद्देश्यों एवं लक्ष्यों की प्राप्ति में जनसंचार माध्यमों का विशेष स्थान है। आज पर्यावरण शब्द को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य जनसंचार माध्यमों ने ही किया है दूदर्शन, फिल्म, रेडियो, समाचार-पत्र, वृत्तचित्र तथा पोस्टर आदि के माध्यम से पर्यावरण शिक्षा का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
जनसंचार इस शब्द समूह में प्रयुक्त शब्द 'संचार' अर्थात् किसी बात को आगे बढ़ाना' या चलाना, या फैलाना अत्यन्त महत्वपूर्ण है। दूसरे शब्दों में, जब हम किसी भाव, विचार या जानकारी को दूसरों तक पहुँचाते हैं, और यह प्रक्रिया सामूहिक पैमाने पर होती है तो इसे जनसंचार कहते हैं। जनसंचार का उद्देश्य जानकारी या विचारों को समाज के उन तमाम लोगों के लिए उपलब्ध करना है जो इनसे सम्बद्ध हैं या जिन्हें यह जानकारी पहुँचाना अपेक्षित है, ताकि सभी लोग इनसे अवगत हो जायें एवं व्यावहारिक जीवन में इनका लाभ उठा सकें।
सभ्यता एवं संस्कृति के विकास के साथ-साथ पढ़े-लिखे वं सुसंस्कृत जन समुदाय ने इस कला में प्रवीणता के आधार पर सभ्यता की माँग को ध्यान में रखते हए अपना सन्देश दूसरों तक पहुँचाने के अनेक सशक्त साधनों एवं माध्यमों का विकास कर लिया है, जिन्हें हम आज की पारिभाषिक शब्दावली 'जनसंचार माध्यम' कहते हैं, जैसा कि पहले बताया जा चुका है जनसंचार माध्यमों में समाचार-पत्र,
रेडियो, टेलीविजन, वृत्तचित्र, पोस्टर आदि प्रमुख साधन हैं, जिन्होंने इस भूमण्डल पर बसने वाले हर व्यक्ति के जीवन को प्रभावित किया है।
सबसे पहले स्वच्छ वातावरण की निर्माण प्रक्रिया के तहत परिवेश के सुधार हेतु एवं खुली साँस के लिये इन जनसंचार माध्यमों ने जनजागरण के काम में योगदान देकर अपनी योगयता को रेखांकित किया है। जनसंचार माध्यमों ने ही ताजमहल की बिगड़ती छवि का सवाल उठाया था, क्योंकि उससे केवल 40 किलोमीटर दूर तक तेल शोधक कारखानों की स्थापना कर दी गई थी जंगलों की अन्धाधुंध कटाई के विरूद्ध 'चिपको आन्दोलन' और 'मौन घाटी की सुरक्षा' आदि विषयों को जनसंचार माध्यमों ने ही उठाया है। संचार टेक्नोलॉजी ने जन-जन तक विभिन्न भाषाओं में रेडियो तथा दूरदर्शन के माध्यम से शैक्षिक कार्यक्रमों का प्रसारण करके सन् 1982 ई. तथा उससे आगे कई राज्यों में चैंकाने वाला कार्य किया । शिक्षा मंत्रालय तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को शैक्षिक कार्यक्रमों के प्रसारण का कार्य सौंपा गया, जिससे यह साबित हो गया कि जनसंचार माध्यम शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
जनसंचार माध्यम के द्वारा पर्यावरण शिक्षा का प्रचार-प्रसार निम्न प्रकार से हो सकता है-
● जनसंचार माध्यमों द्वारा पर्यावरण शिक्षा विद्यार्थियों के लिए रोचक तथा ग्राह्य बन जाती है।
● जनसंचार माध्यमों के द्वारा पर्यावरण शिक्षा उन पिछड़े एवं दुर्गम क्षेत्रों में भी पहुँचायी जा सकती है जहाँ आवागमन के साधनों या विद्यालयों की कमी होती है।
● जनसंचार माध्यमों के द्वारा मनोरंजन के उद्देश्य से पर्यावरण सम्बन्धी जानकारी जनजन तक पहुँचायी जा सकती है।
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