व्यावसायिक निर्देशन में मनोवैज्ञानिकों की भूमिका - Role of psychologists in vocational guidance

व्यावसायिक निर्देशन में मनोवैज्ञानिकों की भूमिका - Role of psychologists in vocational guidance


व्यावसायिक निर्देशन दीर्घकालिक कार्यक्रम है यह कार्यक्रम एक प्रकार से जीवनपर्यन्त व्यक्ति को विभिन्न रूपों में सहयोग प्रदान करता है। व्यावसायिक चयन करने, चयनित व्यवसाय हेतु तैयारी करने, व्यावसाय का वरण करने, व्यवसाय क्षेत्र में विकास जैसी सभी गतिविधियों हेतु व्यावसायिक निर्देशन आवश्यक है। जहां कही व्यक्ति के व्यावसायिक हित का प्रश्न उत्पन्न होता है। व्यावसायिक निर्देशन कार्यक्रम की आवश्यकता प्रकट हो जाती है तथा मनोवैज्ञानिकों की भूमिका रेखांकित होने लगती है। व्यावसायिक निर्देशन के अंतर्गत अनेक प्रकार की सेवाएं सम्मिलित की जाती है मनोवैज्ञानिको की भूमिका ऐसी समस्त सेवाओं में निहित है। इन भूमिकाओं का निम्नवत समझा जा सकता है।


(1) मनोवैज्ञानिक की पहली भूमिका व्यक्तियों को मूल्यांकन सेवा प्रदान करना है। व्यावसायिक विकास के लिए सर्वप्रथम व्यक्ति को अपनी क्षमताओं, योग्यताओं और विशेषताओं को वस्तुनिष्ठ रूप में समझने की आवश्यकता होती है।

यदि व्यक्ति की अपने बारे में सूचनाएं वैद्य होंगी तो उपयुक्त व्यावसायिक आत्म संप्रत्यय का विकास होगा। मनोवैज्ञानिक व्यक्तियों को अपने बारे में सत्यबोध अर्जित करने की दिशा में मनोवैज्ञानिक परीक्षणों द्वारा प्राप्त परिणमों के माध्यम से सहयोगी सिद्ध होता है। यदि उपयुक्त व्यावसायिक आत्म संप्रत्यय का विकास नहीं हुआ तो व्यावसायिक चयन और वरण त्रुटिपूर्ण हो जाएगा तथा व्यावसायिक समायोजन एवं संतुष्टि में कठिनाई आयेगी।


(2) मनोवैज्ञानिक कार्य- विश्लेषण, कार्य विवरण, तथा कार्य विशिष्टीकरण तैयार करने में सहयोग देता है । कार्य विवरण एवं कार्य विशिष्टीकरण के माध्यम से मनोवैज्ञानिक विद्यार्थियों एवं प्रशिक्षुओं को यह ज्ञान उपलब्ध कराता है कि किस प्रकार के व्यवसाय क्षेत्र में प्रवेश के लिए उन्हें किन क्षमताओं, योग्याताओं और व्यक्तित्व विशेषताओं को अर्जित करना होगा।


(3) व्यवसाय के बारे में दो प्रकार की सूचनाएं छात्रों के लिए उपयोगी होती है। प्रथम श्रेणी की सूचनाएं कार्य विवरण के रूप में प्राप्त होती है। दूसरी श्रेणी में कार्य जगत का व्यापक वर्णन होता है। कौन से क्षेत्रों में कर्मचारियों की भविष्य में कितनी मांग संभावित है। किस प्रकार की नई तकनीकों का उपयोग हो रहा है या भविष्य में उपयोग किया जाना संभव है तथा उस नई तकनीकि के उपयोग का सेवायोजन के प्रारूप पर क्या प्रभाव पड़ेगा, एवं व्यवसाय क्षेत्र में प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की आपूर्ति दर क्या होगी ? कुल मिलाकर विभिन्न व्यवसाय क्षेत्रों में व्यक्ति की क्या संभावना है ? इस प्रकार की सूचना उपलब्ध कराना सूचना सेवा का कर्तव्य है। मनोवैज्ञानिक इस प्रकार की सूचना सेवा अन्य निर्देशन कार्मिकों एवं सेवायोजन विभाग के सहयोग से प्रदान कर सकता है।


(4) मनोवैज्ञानिकों की सबसे प्रमुख भूमिका परामर्शदाता के रूप में होती है।

परामर्श देने का कार्य विद्यार्थियों, प्रशिक्षुओं, अभ्यर्थियों, कर्मचारियों एवं सेवायोजको/प्रबंधकों सभी के साथ संबंधित होता है। कभी उपयुक्त व्यवसाय के चयन हेतु परामर्श दिया जाता है तो कभी व्यावसायिक विकास हेतु या व्यावसायिक समायोजन अथवा प्रगति के लिए परामर्श दिया जाता है। मनोवैज्ञानिक इन सभी क्षेत्रों में कार्यरत होते हैं।


(5) मनोवैज्ञानिकों की पांचवीं भूमिका विद्यार्थियों को व्यवसाय का वरण करने हेतु व्यावसायिक स्थापन सेवा के माध्यम से सहयोग देना है। आधुनिक परिस्थितियों में व्यवसाय की विविधता, उद्योग जगत की व्यापकता, किसी व्यवसाय के लिए विशिष्टता की मांग का प्रतिफल यह है कि अभ्यर्थी और उद्योग के बीच सीधा संबंध स्थापित होना कठिन हो जाता है। अतः अच्छे शिक्षण और प्रशिक्षण संस्थान व्यावसायिक स्थापन सेवा के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षण कार्य समाप्त होने के समय से पूर्व ही व्यवसाय अपना लेने के लिए आवश्यक सहयोग देते है।


( 6 ) व्यवसाय के क्षेत्र में प्रविष्ट होने के पश्चात व्यक्ति के जीवन में व्यापक परिवर्तन आता है। व्यक्ति को कार्य करने की भौतिक दशा, सहकर्मियों तथा अधिकारियों के साथ उचित संबंध स्थापित करना होता है। व्यवसाय की उत्पादकता संबंधी मांग की पूर्ति करनी होती है। इस प्रकार समायोजनात्मक समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। व्यावसायिक समायोजन व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक दोनो ही जीवन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण होता है। मनोवैज्ञानिक कर्मचारियों को व्यावसायिक समायोजन के लिए सहयोग देते है।


(7) यदि कोई कर्मचारी एक व्यवसाय को अपनाता है और वहां प्रगति नहीं कर पा रहा है तो उसकी संतुष्टि और उत्पादकता घट जाएगी,

उसका जीवन व्यापक रूप में प्रभावित होगा अतः कर्मचारियों को व्यावसायिक प्रगति के लिए अपनी कार्यक्षमता और व्यक्तित्व दोनों को विकसित करना चाहिए। इस दिशा में आवश्यक सहयोग देकर मनोवैज्ञानिक अपनी भूमिका को सिद्ध करता है।


(8) औद्योगिक जगत में आज तकनीकी परिवर्तनों, आर्थिक उदारीकरण और मन्दी, भूमण्डलीकरण जैसे कारणों से प्रायः कर्मचारियों को छंटनी का शिकार होना पड़ता है। ऐसे कर्मचारियों का व्यावसायिक पुर्नवास की आवश्यकता होती है। आज व्यावसायिक पुर्नवास सेवाओं की महती आवश्यकता है। व्यक्तियों के लिए पुनः रोजगार खोजना मानसिक त्रासदी का अनुभव हो सकता है। व्यक्तियों को पूर्ण रूपेण पुनर्वासित होने के लिए मनोवैज्ञानिक विभिन्न रूपों में सहयोग दे सकता है। अनेक बार ऐसी अवस्था में मनोवैज्ञानिक को छंटनीशुदा कर्मचारी के पूरे परिवार के साथ संबंध स्थापित करके सभी का सहयोग अर्जित करके, परिवार को आर्थिक स्रोत की खोज करने के लिए सक्षम बनाने के अतिरिक्त उनके पारिवारिक समायोजन को सुदृढ़ बनाये रखने के लिए भी सहयोग देने की भूमिका का निर्वहन करना होता है।