बजटरी नियन्त्रण की भूमिका या महत्व - Role or importance of budgetary control

बजटरी नियन्त्रण की भूमिका या महत्व - Role or importance of budgetary control


बज्टरी नियंत्रण व्यावसायिक क्रियाओं के नियोजन, समन्वय एवं नियन्त्रण की एक उपयोगी प्रणाली है। इन क्षेत्रों में इसकी भूमिका अग्र इस प्रकार है:


(i) नियोजन के क्षेत्र में नियोजन प्रबन्ध का एक महत्वपूर्ण कार्य है। नियोजन का आशय व्यवसाय के उद्देश्य निर्धारित करना और इन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए कार्यक्रम तैयार करने से है। उद्देश्यों में पूरे व्यवसाय के प्रत्येक उप विभाग के लिए दीर्घकालीन और अल्पकालीन योजनायें शामिल होती है। बजटरी नियन्त्रण प्रणाली के लिए व्यावसायिक क्रियाओं का नियोजन अपरिहार्य है। नियोजन के बिना नियन्त्रण संभव नहीं है। अतः नियोजन की परिकल्पना नियन्त्रण की आवश्यकताओं के अनुकूल ही की जानी चाहिए।

एक एकीकृत नियोजन और नियन्त्रण प्रणाली के दृष्टिकोण से नियोजन का आशय James L. Peirce के शब्दों में "Planning refers to the construction of an operating programme, comprehensive enough to cover all phases of operation, and detailed enough that specific attention may be given to its fulfilment in controllable segments."


कहने की आवश्यकता नहीं है कि व्यवसाय की सफलता बहुत कुछ कुशल नियोजन पर निर्भर करती है परन्तु प्रश्न यह है कि क्या नियोजन के लिए बजटन अनिवार्य है? यह सत्य हैं कि औपचारिक बजटन के बिना भी नियोजन सम्भव है किन्तु इस प्रकार के नियोजन में बहुधा बहुत सी त्रुटियां व भूलें हो जाती है।

बजटरी नियन्त्रण व्यावसायिक क्रियाओं के नियोजन का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं इससे सभी स्तर के प्रबन्धकों की नियोजन भूमिका सुस्पष्ट और अववृद्ध होती हैं और वे व्यवसाय की नियोजन प्रक्रिया पर ध्यान देने के लिए बाध्य हो जाते है। बजटन के द्वारा नियोजन से संस्था के अधिकारियों का दृष्टिकोण व्यापक हो जाता है और वे न केवल अपने-अपने विभागों के बारे में सोचते हैं वरन् प्रत्येक कार्य को सम्पूर्ण संस्था के हित की दृष्टि से सोचने लगते हैं। बजटरी नियन्त्रण में व्यावसायिक क्रियाओं की एक निश्चित समय से पूर्व ही भविष्यवाणी कर दी जाती है तथा विभिन्न समस्याओं का पूर्वानुमान लगाया जाता है और उनके निराकरण के लिए सभी स्तर के प्रबन्धकों के मत जाने जाते हैं। बजटरी प्रणाली के अन्तर्गत विक्रय नियोजन के लिए विक्रय बजट उत्पादन के नियोजन तथा उत्पादन अनुसूचियन के लिए उत्पादन बजट, क्रयों के नियोजन के लिए क्रय बजट श्रम के नियोजन के लिए श्रम बजट, संयन्त्र क्षमता के नियोजन के लिए संयन्त्र बजट तथा विभिन्न उत्पादन, आफिस, विक्रय और वितरण व्ययों के लिए नियोजन के लिए लागत बजट तैयार किये जाते हैं। इसी प्रकार इनमें पूंजीगत व्ययों के नियोजन के लिए पूंजीगत व्यय बजट तथा रोकड प्राप्तियों और रोकड भुगतानों के नियोजन के लिए रोकड़ बजट तैयार किया जाता है।

इस प्रकार बजटरी नियन्त्रण विभिन्न व्यावसायिक क्रियाओं के नियोजन का एक सुदृढ़ माध्यम बन जाता है। इससे व्यवसाय की क्रियाओं में स्थायित्व व निश्चितता आती है और उसके सीमित साधनों का सदुपयोग होता है। अतः यह स्पष्ट है कि नियोजन के क्षेत्र में बजटरी नियन्त्रण की भूमिका अति महत्वपूर्ण है।


(ii) समन्वय के क्षेत्र में समन्वय का आशय उत्पादन के सभी घटकों और व्यवसाय के सभी विभागों, उप-विभागों और कार्यों में सन्तुलन व तालमेल स्थापित करना है जिससे कि सामान्य उद्देश्य प्राप्त किये जा सकें। उदाहरण के लिए उत्पादों का उत्पादन विक्रय के अनुसार हो, सामग्री की पूर्ति उत्पादन मात्रा के अनुरूप हो आदि । समन्वय के अभाव में न तो नियंत्रण ही सम्भव है और न कोई नियोजन ही सफल हो सकता है। बजटरी नियन्त्रण से व्यावसिायक क्रियाओं में समन्वय स्थापित होता है। ब्रूअर और लजारस के शब्दों में,

"बजट निर्माण एक व्यवसाय के विभिन्न विभागों की योजनाओं को समन्वित करता है तथा यह समन्वय विभिन्न विभागाधिकारियों के मध्य परामर्श द्वारा सम्भव होता है। यह परामर्श अनुमान पर नहीं वरन् ठोस तथयों के विश्लेषण पर आधारित होते हैं।" समन्वय के क्षेत्र में बजटरी नियन्त्रण की भूमिका इस प्रकार है:- 


(अ) एक सुस्पष्ट व सुनिश्चित योजना का अस्तित्व ही व्यावसायिक क्रियाओं में समन्वय का एक महत्वपूर्ण सूचक है। बजटरी नियन्त्रण से संस्था के अधिकारी अपने कार्यों का दूसरे के कार्यों या समपूर्ण कम्पनी के कार्यों से सम्बन्ध स्थापित करने के लिए बाध्य होते हैं।


(ब) बजट के तैयार करने में सभी अधिकारियों का सहयोग रहता है। अतः सभी विभागों के लक्ष्यों, समस्याओं व सम्भावनाओं पर पहले से ही विचार कर लिया जाता है जो समन्वय का आधारभूत सिद्धान्त है।


(स) बजट संवहन का श्रेष्ठ साधन है जो कि समन्वय के लिए बहुत आवश्यक है। बजट तैयार हो जाने के पश्चात् उसकी एक प्रति प्रत्येक अधिकारी को दे दी जाती है। इससे संस्था के प्रत्येक अधीकारी को यह पता लग जाता है कि योजना क्या है, इसमें दूसरों की क्या भूमिका रहेगी व दूसरे उससे क्या अपेक्षायें रखते हैं।


(द) बजट से अधिकारियों में सहयोग व मिल-जुलकर कार्य करने की भावना विकसित होती है जो कि समन्वय के लिए महत्वपूर्ण तत्व है।


अतः स्पष्ट है कि बजट समन्वय का एक महत्वपूर्ण उपकरण है।


(अ) नियन्त्रण के क्षेत्र में नियन्त्रण शब्द का पयोग विभिन्न अर्थों में किया जाता है। बजटन के सम्बन्ध में इसका आशय James L. Peirce के शब्दों मे, "Control is the presence in a business of that force which guides it to a predetermined objective by menas of predetermined policies and decisions.

" इसका उद्देश्य व्यावसायिक क्रियाओं को पूर्व-निर्धारित लक्ष्यों, योजनाओं व नीतियों के अनुरूप विनियमित करना होता है।


बजटरी नियन्त्रण प्रबन्ध- नियन्त्रण प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अंग होता है। वस्तुतः जब नियन्त्रण की क्रिया को बजटन से सम्बन्धित कर दिया जाता है तो इसे बजटरी नियन्त्रण कहते हैं। इसके अन्तर्गत सम्पूर्ण कार्य की एक ऐसी रूपरेखा रखी जाती है जिसके द्वारा प्रबन्ध को यह पता लग सके कि कार्य पूर्व निर्धारित लक्ष्य, योजना व नीति के अनुसार हो रहा है अथवा नही, इसमें नियन्त्र की निम्न अवस्थायें रहती है :


(अ) बजट बनाने से प्रत्येक व्यक्ति को यह जानकारी हो जाती है कि संस्था को उससे क्या अपेक्षायें है। इस प्रकार इससे व्यक्ति इन अपेक्षाओं के अनुकूल कार्य करने के लिए निर्देशित होता है।


(अ) बजट बनाने से प्रत्येक विभागध्यक्ष की अपनी योजनाओं का विश्लेषण करना होता है तथा उनके लिए व्यय के अनुमान प्रस्तुत करने होते हैं। इस प्रकार बजटन क्रिया की प्रारम्भिक अवस्था से ही लागत नियन्त्रण लागू हो जाता है।


(अ) बजट के अनुमोदन के पश्चात् विभाग के लिए स्वीकृत राशियां विभागीय व्ययों को सीमित करती है। प्रत्येक विभागाध्यक्ष को इस स्वीकृत सीमा के अन्तर्गत ही अपने विभाग के व्यय सीमित करने पड़ते हैं।


(अ) बजटरी नियन्त्रण निष्पादन के मूल्यांकन की एक प्रभावशाली तकनीक है। इसमें बजट अवधि अथवा नियन्त्रण अवधि के अन्त में वास्तविक परिणामों की पूर्व निर्धारित बजटरी अंकों से तुलना तथा उनमें अन्तर ज्ञात किये जाते हैं। महत्वपूर्ण अन्तरों का विश्लेषण करके उनके कारणों और उनके लिए उत्तरदायी व्यक्तियों की खोज की जाती है तथा असंतोषजनक परिणामों की दशा में आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही की जा सकती है।


इस प्रकार स्पष्ट है कि बजटरी नियन्त्रण, नियन्त्रण के क्षेत्र में भी एक अति कारगर भूमिका अदा करता है।