रूसो का शिक्षा दर्शन - Rousseau's philosophy of education

रूसो का शिक्षा दर्शन - Rousseau's philosophy of education


रुसो को प्रकृतिवाद का पिता कहा जाता है। वस्तुतः उन्होंने ही इस आंदोलन को शिखर तक पहुंचाया। इनके बारे में आदम महोदय ने कहा है कि Russeau was perhaps the most prominent naturalist who ever wrote on Education" रूसों की पुस्तक एमिली ने शिक्षा की विचारधारा पर गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने घोषणा की कि बच्चों के सुंदर विकास के लिए यह आवश्यक है कि उन पर से समस्त नियंत्रण हटा लिए जाएँ। रूसो परम्परागत तथा औपचारिक शिक्षा के विरोधी थे। औपचारिक शिक्षा को तो वह मानव द्वारा निर्मित एवं कृत्रिम शिक्षा मानते थे। उनकी यह मान्यता थी कि प्रकृति द्वारा प्रदत्त सभी वस्तुएँ एवं जीव पवित्र है किंतु मानव के सम्पर्क में आते ही सब के सब अपवित्र व विकृत हो जाती हैं। (Everything) good as it comes from the hand of author nature but every thing degenerates in the hands of man" Russeau) उसने यह भी कहा है:

"God makes all things good, man medles with them and they become evil अतः रूसो ने कहा कि बच्चों को वयस्कों से अलग रखा जाए। उन्हें सामाजिक परम्पराओं एवं स्थमों से दूर रखा जाए। उसने कहा कि बच्चों की शिक्षा प्रकृति की गोद में प्राकृतिक नियमों के अनुकूल होनी चाहिए। यथा "children should be educated in contact with nature and according to nature"


बच्चे 'बच्चे' है अतः उनके साथ विकसित मानव जैसा व्यवहार ठीक नहीं है। उनकी शिक्षा तो स्वाभाविक ढंग से होनी चाहिए न कि बाह्य सूचनाएँ उनके मानस में भरी जाएँ। अतः यह स्पष्ट हो जाता कि रूसो बच्चों की शिक्षा को प्रकृति की गोद में, प्रकृति के नियमों के अनुसार एवं बच्चों के स्वभाव के अनुकूल रखने का पक्षपाती है।