रूसो - RUSSEAU
रूसो - RUSSEAU
परिचय:
रूसो जिनेबा नगर में पैदा हुआ था। इनकी माँ बाल्यकाल में ही चल बसी और पिता ने व्यर्थ के उपन्यासो द्वारा उसे कल्पना, संवेदना तथा अकाल प्रौढ़ता दे दी। वह जिलेवा नगर से बाहर दो वर्ष रहा तथा उसने प्रकृति के प्रति अनुराग उत्पन्न कर लिया। बुरी संगति तथा आलस्य में उसने कई वर्ष व्यतीत कर दिए। घर से भागकर छोटी मोटी नौकरी द्वारा वह पेट पालता रहा। सन् 1750 में डिजान अकादमी में विज्ञान का नैतिकता पर प्रभाव नामक निबंध पढ़कर वह लोगों की दृष्टि में ऊँचा हो गया और तीसरे वर्ष पुनः उस स्थान पर दूसरा निबंध पढ़कर चारों और प्रसिद्ध हो गया। इस निबंध का शीर्षक था मनुष्य की असमानता यह निबंध उसे समाज विरोधी तथा प्रकृतिवादी दार्शनिक के रूप में प्रसिद्ध करा गया।
राबर्ट यूलिच के अनुसार वह समाज के लिए अनुपयुक्त थातथा उसकी असाधारण बुद्धि, समाज की आलोचना से मनुष्यों को उकसाकर उसे एकाएक प्रसिद्धि दिलाने में सफल हो गई।
रूसों का अंतिम समय अपमान, चिंता तथा जीवन के प्रति भय में व्यतीत हुआ। वह सन् 1766 ई. से 1768 ई. तक इंग्लैण्ड जिनेवा तथा फ्रांस इत्यादि देशों में भागता रहा तथा अंत में सन् 1778 में फांस में मर गया। उसके मरने के 15 वर्ष
के पश्चात फ्रांस की राज्यक्रांति के अवसर पर उसे महान व्यक्ति तथा क्रांतिकारी होने का गौरव प्राप्त हुआ। उसकी मुख्य रचनाएँ है हैलोज (Helcise), सामाजिक समझौता (Social Contract) तथा एमिली (Emile)।
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