कार्यशील पूँजी में परिवर्तनों की अनुसूची - Schedule of Changes in Working Capital
कार्यशील पूँजी में परिवर्तनों की अनुसूची - Schedule of Changes in Working Capital
यह अनुसूची दो तिथियों के चिट्ठों के बीच कार्यशील पूँजी में हुए परिवर्तनों को प्रदर्शित करती है। इसे चालू सम्पत्तियों व चालू दायित्वों की सहायता से तैयार किया जाता है। चालू सम्पत्तियों व चालू दायित्वों का अन्तर कार्यशील पूँजी कहलाता है । कार्यशील पूँजी में होने वाले परिवर्तनों की गणना हेतु ध्यान रखने योग्य प्रमुख नियम निम्नलिखित है।
(1) यदि गत वर्ष की तुलना में चालू वर्ष में चालू सम्पत्तियों में वृद्धि होती है, तो शुद्ध कार्यशील पूँजी में भी वृद्धि होती है (If current assets increases, working capital decreases) ।
(2) यदि गत वर्ष की तुलना में चालू वर्ष में चालू सम्पत्तियों की धनराशि में कमी होती है, तो शुद्ध कार्यशील पूँजी भी घट जाती है (If current assets decreases, working capital decreases)।
(3) यदि किसी चालू दायित्व में वृद्धि होती है तो कार्यशील पूँजी में कमी होती है (If current liabilities increases, working capital decreases) |
(4) यदि किसी चालू दायित्व में कमी होती है तो कार्यशील पूँजी में वृद्धि होती है (If current liabilities decreases, working capital increases) |
उपर्युक्त विवेचन से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि चालू सम्पत्तियों के कार्यशील पूँजी का सीधा सम्बन्ध पाया जाता है तथा चालू दायित्वों के साथ कार्यशील पूँजी का विपरीत सम्बन्ध होता है।
चालू सम्पत्तियों एवं चालू दायित्वों में शामिल किये जाने वाले मदों की विस्तृत विवेचना इसी अध्याय के प्रारम्भ में दी हुई है।
कोष-प्रवाह विवरण (Funds Flow Statement ) कार्यशील पूँजी में परिवर्तनों की अनुसूची दो तिथियों के बीच कार्यशील पूँजी में परिवर्तन को प्रदर्शित करती है जबकि कोष प्रवाह विवरण उस परिवर्तन के कारण को स्पष्ट करता है। इस विवरण के दो भाग होते हैं कोषों के स्त्रोत (Sources of Funds) तथा कोषों के प्रयोग (Applications or Uses of Funds)। इन दोनों पक्षों के अन्तर की राषि शुद्ध कार्यशील पूँजी में परिवर्तन को प्रदर्शित करती है। जब कोषों के स्त्रोत पक्ष का योग कोषों के प्रयोग पक्ष से अधिक होता है, तो शुद्ध कार्यशील पूँजी में वृद्धि होती है। जब कोषों के स्त्रोत पक्ष का योग, कोषों के प्रयोग पक्ष की तुलना में कम होता है तो शुद्ध कार्यशील पूंजी में कमी होती है।
यह सदैव ध्यान रखें कि कोष प्रवाह विवरण के स्त्रोतों तथा प्रयोगों के बीच उतना ही अन्तर होता है जितना कार्यशील पूँजी में परिवर्तन आ रहा हो।
कोष प्रवाह विवरण में शुद्ध कार्यशील पूँजी को प्रभावित करने वाली मदें ही दिखलायी जाती है। जिन व्यवसायिक लेन-देनों से शुद्ध कार्यशील पूँजी बढ़ जाती है (जैसे भवन का नकद विक्रय, अषो या ऋणपत्रों का जनता में निर्गमन आदि) उन्हें कोषों का प्रयोग कहते हैं किन्तु यदि किसी लेन-देन से शुद्ध कार्यशील पूँजी में कोई परिवर्तन नहीं होता (जैसे-लेनदारों को भुगतान, ऋणपत्रों का अशों में परिवर्तन, बोनस अशों का निर्गमन, आदि) तो उसे कोष प्रवाह विवरण में नहीं दिखलाया जाता। शुद्ध कार्यशील पूँजी में परिवर्तन केवल उन्हीं लेन-देनों द्वारा होते है जो एक और चालू सम्पत्ति / दायित्व को प्रभावित करते है एवं दूसरी ओर पूँजी, स्थायी सम्पत्ति / दायित्व को प्रभावित करते है। यह भी नियम ध्यान रखने योग्य है कि जो मदें कार्यशील पूँजी की अनुसूची में सम्मिलित कर ली जाती है (चालू सम्पत्तिया एवं चालू दायित्व) उन्हें कोष-प्रवाह विवरण में नहीं दिखलाया जाता है।
कोषों के स्त्रोत (Sources of Funds) – जिन लेन-देनों से कोषों का आगमन होता है, उन्हें 'कोषों के स्त्रोत कहा जाता है। इनका विस्तृत विवरण निम्नांकित है :
(i) व्यवसाय संचालन से प्राप्त कोष (Funds received from business operations)
(ii) अंश पूँजी में वृद्धि (Increase in share capital)
(iii) दीर्घकालीन ऋणों की प्राप्ति या वृद्धि (Receipts or increases of long-term loans )
(iv) स्थायी सम्पत्तियों का विक्रय (Sale of fixed assets)
(v) गैर-व्यापारिक प्राप्तियां (Non-trading receipts)
(vi) कार्यशील पूँजी में कमी (Decrease in working capital)
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