विद्यालय निर्देशन- कार्यक्रम में स्कूल परामर्शदाता की भूमिका - School Guidance - Role of the School Counselor in the Program

विद्यालय निर्देशन- कार्यक्रम में स्कूल परामर्शदाता की भूमिका - School Guidance - Role of the School Counselor in the Program


मूलरूप से एक परामर्शदाता शिक्षा के क्षेत्र से ही एक विशेषज्ञ होता है। परामर्शदाता से मार्गदर्शन गतिविधियाँ को अन्य कर्मचारियों की तुलना में अधिक सुचारू रूप से चलाने की आशा की जाती है। भारतीय परिस्थितियों में परामर्शदाता पूर्ण-अवधि परामर्शदाता, अंश-कालीन परामर्शदाता और विजिटिंग स्कूल परामर्शदाता के रूप में होता है।


परामर्शदाता के रूप में एक मार्गदर्शन- कार्यकर्ता के उत्तरदायित्वों में निम्नलिखित विशिष्ट कार्य सम्मिलित किये जाते हैं-


1) निदानात्मक


2) चिकित्सात्मक

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3) मूल्यांकन और शोध


प्रत्येक विशिष्ट कार्य-क्षेत्र में विभिन्न विशिष्ट सेवाएँ और कौशल सम्मिलित किये जाते हैं। विद्यालय मार्गदर्शन कार्यक्रम को बड़े ध्यानपूर्वक नियोजित करने के पश्चात् एक परामर्शदाता क्रमबद्ध ढंग से कार्य करता है। इसके लिए परामर्शदाता विद्यार्थियों की आवश्यकताओं का सर्वेक्षण करता है, भौतिक और अन्य साधनों को इकट्ठा करता है तथा प्रशासनिक अधिकारियों से सहयोग सुनिश्चित करता है। सामान्य रूप से परामर्शदाता विभिन्न क्रियाओं को चलाता है। एक स्कूल परामर्शदाता के विभिन्न कार्य निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत वर्णित किये जा सकते हैं- 


क. विद्यार्थियों का अभिविन्यास नए विद्यार्थियों को इस कार्यक्रम से परिचित कराया जाता है

ताकि वे इस नए वातावरण में समायोजित हो सकें और विषय-वस्तु को सीखने के लिए स्वयं को स्वतंत्र महसूस कर सकें। परामर्शदाता यह सब व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से कर सकता है। इसके लिए वह सभाओं और बहसों का आयोजन कर सकता है।


ख. विद्यार्थी मूल्यांकन परामर्शदाता के लिए सूचना-स्रोत और सामान एक परामर्श कार्यक्रम की आवश्यकता होती है ताकि विद्यार्थियों की परामर्शन- आवश्यकताओं को पहचाना जा सके तथा विद्यार्थियों को स्वयं को समझने में सहायता प्रदान की जा सके एवं किसी कार्य-विधि को अपनाने में सहायता दी जा सके। एक परामर्शदाता विद्यार्थी के बारे में अर्थपूर्ण सूचनाएँ विद्यार्थियों के साथ साक्षात्कार,

उनके अभिभावकों के साथ साक्षात्कार तथा विद्यार्थियों से सम्बंधित अध्यापकों के साथ साक्षात्कार करके तथा विद्यालय के अन्य व्यक्तियों से एकत्रित करता है। परामर्शदाता मनोवैज्ञानिक परीक्षणों की व्यवस्था करता है, शैक्षिक रिकॉर्ड तथा अन्य रिकॉर्ड को इकट्ठा करता है तथा इन्हें क्रमबद्ध तरीके से रखता है। परामर्श-साक्षात्कार में परामर्शदाता द्वारा ये सभी सूचनाएँ विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाती हैं तथा उन्हें इनकी व्याख्या बताई जाती है। इन सूचनाओं की व्याख्या परामर्शदाता विद्यार्थियों के माता-पिता और उनके अध्यापकों को भी आवश्यकता होने पर बताता है।


ग. शैक्षिक और व्यावसायिक सूचना सेवा परामर्शदाता सभी सूचनाओं में समन्वय के लिए उत्तरदायी होता है। वह विद्यार्थियों और उनके माता-पिता को संभावनाओं और अवसरों का पता लगाने में सहायता करता है तथा इन सूचनाओं के प्रयोग में भी उनकी सहायता करता है।

परामर्शदाता विद्यालय में 'कैरियर कॉर्नर' स्थापित करने में सहायता कर सकता है तथा कैरियर अध्यापक को सहायता प्रदान कर सकता है। वह शैक्षिक और व्यावसायिक सूचनाओं को एकत्रित करने के लिए विभिन्न विधियों को अपना सकता है, उनका वर्गीकरण करता है तथा उसे पूर्ण रखता है। एक परामर्शदाता के पास रोज़गार के बारे में ताज़ी सूचनाएँ होती हैं तथा वह विभिन्न अधिकारियों और नियुक्तिकर्ताओं के साथ व्यक्तिगत संपर्क बनाए रखता है। परामर्शदाता पर सूचनाओं को बाँटने का उत्तरदायित्व भी होता है। यह कार्य वह शैक्षिक भ्रमणों, अतिथि भाषणों, कैरियर कांफ्रेंस और कैरियर अध्ययन परियोजना आदि द्वारा कर सकता है।


घ. परामर्श साक्षात्कार करना- एक परामर्शदाता विद्यार्थियों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप उन्हें परामर्श प्रदान करने के लिए उत्तरदायी होता है।

साक्षात्कार के द्वारा वह विद्यार्थियों के अनुभवों का मूल्यांकन और इन अनुभवों को उनके वास्तविक व्यवहारों से सम्बद्ध करके उनकी सहायता करता है। उसका अधिकतर कार्य शैक्षिक और व्यावसायिक मार्गदर्शन प्रदान करना ही है । परामर्शदाता विद्यार्थियों में समस्या समाधान के कौशलों और स्वतंत्र चिंतन, योजना, निर्णय लेने की योग्यता का विकास करने में सहायता प्रदान करता है। इसके लिए वह विद्यार्थियों के छोटे समूह भी बना सकता है।


ङ. स्थानन- बाहरी संस्थाओं और विद्यालय छोड़ने वाले विद्यार्थियों के बीच एक कड़ी का कार्य करने का उत्तरदायित्व भी परामर्शदाता पर होता है ताकि विद्यार्थियों को विभिन्न सूचनाएँ प्राप्त हो सकें


च. शोध और मूल्यांकन क्या विद्यालय में मार्गदर्शन कार्यक्रम द्वारा वास्तव में वांछनीय उद्देश्य प्राप्त कर लिए गए हैं तथा क्या विद्यार्थियों की आवश्यकताएँ पूरी हो गयी हैं, इसे जानने के लिए परामर्शदाता शोध करके एक योजना तैयार करता है। इस सन्दर्भ में परामर्शदाता शोध और मूल्यांकन के कई कार्यक्रम करता है।