भाषा विकास का क्रम - sequence of language development
भाषा विकास का क्रम - sequence of language development
1. ध्वनि की पहचान (Recognition of Sounds)- भाषा विकास का प्रथम सोपान विभिन्न ध्वनियों की पहचान करना होता है। शिशु प्रारम्भ में ध्वनियों को नहीं पहचान पाता है तथा न ही उनमें अन्तर कर पाता है। धीरे-धीरे वह ध्वनियों को पहचानने का प्रयास करता जाता है तथा लगभग 5-6 माह की आयु में ध्वनियों में भेद करना प्रारम्भ कर देता है।
2. ध्वनि उत्पन्न करना (Production of Sounds) भाषा विकास के दूसरे क्रम में बालक ध्वनि को पहचान कर उसी प्रकार की अथवा उससे मिलती-जुलती कुछ अन्य ध्वनियों को उत्पन्न करना प्रारम्भ कर देता है।
3. शब्दों तथा वाक्यों की रचना (Production of words sentences):- ध्वनि पहचान विभेद करने एवं ध्वनि उत्पन्न करने में समर्थ होने पर बालक ध्वनियों का सार्थक ढंग से उपयोग करके शब्दों व बाक्यों की रचना करने के क्रमागत सोपान पर आ जाता है। यह भाषा की मौखिक अभिव्यक्ति अर्जित करने का प्रथम चरण है।
4. लिखित भाषा का प्रयोग (Use of Written Language) -शब्दों व वाक्यों के रूप में मौखिक अभिव्यक्ति में कुछ योग्यता अर्जित करने के उपरान्त बालक भाषा के लिखित स्वरूप को अर्जित करने की दिशा में प्रगति करता है।
5. शब्दों के अनुप्रयोग में निपुणता लाना (Acquisition of Mastery in Application)- भाषा विकास की अन्तिम अवस्था में बालकों में भाषा के बोलने, पढ़ने तथा लिखने के कार्य में निपुणता विकसित होती है।
वार्तालाप में शामिल हों