सार्जेंट योजना - sergeant plan

सार्जेंट योजना - sergeant plan


आयोग की नियुक्ति एवं उसके कारण


द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त होने के बाद युद्धोत्तर विकास योजनाओं में शिक्षा को भी महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ। तत्कालीन भारतीय शिक्षा के सलाहकार सर जॉन सार्जेंट की अध्यक्षता में एक सर्वेक्षण का गठन किया सर जॉन सार्जेंट ने सन 1944 तक स्मृति पत्र तैयार कर लिया और 'केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड' के समय प्रस्तुत कर उस पर स्वीकृति ले ली। इन्हीं कारणों से इस योजना को युद्धोत्तर शिक्षा-विकास योजना या सार्जेंट योजना कहते हैं।


सार्जेंट रिपोर्ट की सिफारिशें


सार्जेंट रिपोर्ट बारह भागों में विभाजित है।


1) पूर्व प्राथमिक या नर्सरी शिक्षा:


1. पूर्व प्राथमिक शिक्षा 3 से 6 वर्ष तक की आयु वाले बच्चों को दी जाए।


2. यह शिक्षा बच्चों को निशुल्क प्रदान की जाए।


2) बुनियादी या प्राथमिक शिक्षा:


बुनियादी शिक्षा को दो भागों में बाँटा गया


1. जूनियर बेसिक शिक्षा 6 से 11 वर्ष तक के छात्र


2. सीनियर बेसिक शिक्षा 11 से 14 वर्ष तक के छात्र


यह शिक्षा सार्वजनिक एवं निशुल्क हो।


3) हाई स्कूल की शिक्षा:- हाईस्कूल दो प्रकार की हो


१ एकेडेमिक


२ टेकनिकल


इन दोनों का उद्देश्य सर्वांगीण शिक्षा को विकसित करना है।


4) विश्वविद्यालय शिक्षा- देश के सभी महाविद्यालयों में समता लाने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना हो। डिग्री कोर्स तीन वर्ष का हो।


(5) टेकनिकल शिक्षा आयोग ने औद्योगिक विकास के लिए टेकनिकल शिक्षा को महत्व दिया।


 6) प्रौढ शिक्षा प्रौढ शिक्षा हेतु गावों में सार्वजनिक पुस्तकालय की स्थापना हो। प्रौढ़ों के लिये सामान्य तथा व्यावसायिक दोनों प्रकार की शिक्षा | प्रबंध हो।


(7) अध्यापको का प्रशिक्षण आयोग ने अध्यापकों के प्रशिक्षण पर ज्यादा बल दिया और कहा कि आवश्यकता के अनुसार देश में नए ट्रेनिंग कॉलेज खोले जाए। 


8) विकलांग सत्रों की शिक्षा:- शारीरिक तथा मानसिक दृष्टि से अपंग बच्चों के लिए सरकार की ओर से विशेष प्रबंध करने की सिफारिश की गई। 


9) छात्रों के स्वास्थ्य सुधार की शिक्षा:- छात्रों के लिए निःशुल्क चिकित्सा का प्रबंध हो, और छात्रों को शारीरिक सफाई एवं घर की सफाई संबंधी शिक्षा प्रदान की जाए।


10) रोजगार कार्यालय: छात्रों को व्यवसाय चुनने के लिए रोजगार कार्यालय की स्थापना हो। विद्यालयों में अलग रोजगार कार्यालय हो


11) मनोरंजक एवं सामाजिक कियाऐं: स्कूल में अध्ययन-अध्यापन के साथ साथ मनोरंजक एवं सामाजिक कियाओं को महत्व दिया जाय। 


12) शिक्षा का प्रशासन शिक्षा का प्रशासन सुधारने के लिए केंद्र तथा प्रांतों में शिक्षा विभागों की स्थापना हो।


सार्जेंट योजना के गुण


1) छात्रों के समग्र विकास पर अधिक बल दिया गया।


2) व्यावसायिक एवं औद्योगिक शिक्षा पर अधिक ध्यान दिया गया।


3) नर्सरी एवं प्राथमिक विद्यालयों में अध्यापिकाओं की नियुक्ति का सुझाव मनोवैज्ञानिक था।



4) इस योजना में शिक्षा के समस्त अंगों पर प्रकाश डाला गया।


5) इस योजना में विभिन्न दोषों में सुधार का सुझाव दिया गया।


6) प्रौढ शिक्षा पर जोर दिया गया।


7) शिक्षा को जीवननिष्ठ बनाने के लिए रोजगार कार्यालय का सुझाव दिया।


४) शिक्षकों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास पर सुझाव दिया गया।


9) खेल कूद, व्यायाम मनोरंजन इत्यादि को पाठ्यक्रम में स्थान दिया।


सार्जेंट योजना के अवगुण:


1) मातृभाषा की उपेक्षा की गई।


2) धार्मिक एवं स्त्री शिक्षा को ठुकराया गया।


3) भारतीय शिक्षा में इंग्लैंड की शिक्षा-व्यवस्था की अच्छाइयों को शामिल किया गया।


4) अनिवार्य शिक्षा-संबंधी व्यवस्था का सुझाव नहीं दिया गया।


(5) वर्धा-योजना के अनेक अंशो की इसमें उपेक्षा की गई।


(6) इस विशाल योजना को पूरा निर्धन भारत के लिए असंभव थी।