अल्पकालीन वित्तीय विनियोग - short term financial investment
अल्पकालीन वित्तीय विनियोग - short term financial investment
निश्चित हो चुका है कि वित्तीय विनियोग का आधार कहीं न कहीं समय होता है। अतः समय अवधि के अनुसार वित्तीय विनियोग तीन प्रकार का होता है, यथा- दीर्घकालीन वित्तीय विनियोग, मध्यकालन वित्तीय विनियोग तथा अल्पकालीन वित्तीय विनियोग।
सामान्यतः एक व्यावसायिक संगठन में एक वर्ष तथा उससे कम अवधि के लिए जो वित्तीय विनियोग किए जाते हैं, अल्पकालीन वित्तीय विनियोग कहलाते हैं। ऐसे विनियोग मध्यकालीन तथा दीर्घकालीन वित्तीय विनियोग का ही भाग होते है। अल्पकालीन वित्तीय विनियोग प्राय: कार्यशील पूँजी, स्कन्ध तथा सामग्री प्रबंध के संबंध में किये जाते हैं तथा किस प्रकार विभिन्न अल्पकालीन साधनों से वित्तीय व्यवस्था करने का कार्य किया जाए इस पर भी विचार किया जाता है।
तथा हानि विवरण, कोषों की प्राप्ति एवं उपयोग का विवरण आदि को भी ध्यान में रखा जाता है। कभी-कभी व्यावसायिक इकाईयाँ अल्पकालीन वित्तीय विनियोगों के अंतर्गत संपत्तियों के प्रतिस्थापन, रख-रखाव, तथा बढ़ी हुई कार्यशील पुँजी, के प्रबंध जैसे क्षेत्रों को भी सम्मिलित करते हैं।
इस प्रकार व्यवसाय की प्रारंभिक सफलता काफी हद तक कुशल एवं सुव्यवस्थित अल्पकालीन वित्तीय विनियोजनों पर निर्भर करती है। इन्हीं अल्पकालीन निर्णयों के ऊपर ही संस्था के दीर्घकालीन निर्णयों की संरचना तैयार की जाती है, जो संस्था को लंबे समय तक लाभों से जोड़े रखती है। अतः व्यवसाय प्रवर्तन के पूर्व ही व्यवसाय के प्रारंभिक आकार तथा समाविष्ट विस्तार के मद्देनजर बाजार की लोचनशीलता को देखते हुए, अल्पकालीन विनियोजन की मदों की पहचान कर लेनी चाहिए। जिससे व्यवसाय को सफलता के साथ प्रवर्तित किया जा सके। हम जानते है। कि व्यवसाय में प्रत्येक छोटे बड़े कार्य के लिये पूँजी की आवश्यकता होती है। व्यवसाय की स्थापना, संपत्तियों व सामग्री के क्रय तथा अंतिम उत्पाद निर्माण आदि कार्यो से संबंधित निवेशों को प्राय: अल्पकालीन विनियोगों के अंतर्गत ही अध्ययन किया जाता है। अत: इन सभी आवश्यक लघुकालीन कार्यों के लिये उपयुक्त समय पर पर्याप्त वित्त का निवेश कुशल प्रबंधन के निर्णयों पर ही निर्भर करता है।
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