अल्पकालीन विनियोग के प्रकार - short term investment
अल्पकालीन विनियोग के प्रकार - short term investment
भारत में फर्मों को कई प्रकार के विनियोग के अवसर उपलब्ध हैं। उनमें से कुछ विनियोग के प्रकार निम्नलिखित हैं-
1) मुद्रा बाजार सामान्य कोष (Money market mutual fund) - ये सामान्य कोष या म्यूचुअल फण्ड अल्पकालीन विपणन योग्य प्रतिभूतियों में विनियोजित करती है। केवल 30 दिनों की अवधि में ही परिपक्वता होती है। उस अवधि के उपरात कमी भी रोकड़ वापस लिया जा सकता है। इसमें प्रतिफल भी अधिक होता है। आजकल ये भारत में कंपनियों में लोकप्रिय हो रहा है।
2) अन्तर कम्पनी जमा (Inter-corporate deposit) कंपनियाँ आपस में भी लेन-देन करती हैं, जिन कंपनियों के पास अतिरिक्त रोकड़ होता है वे कम रोकड़ वाली कपनियों में विनियोजन कर देती हैं।
ये विनियोग भी अल्पकालीन होता है, किंतु इसमे जोखिम भी अधिक होता है उससे आय तो अधिक होती है, किंतु मूलधन व ब्याज न मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।
3) बैंक जमा (Bank deposit) - यह एक आसान तरीका है। बैंक में रोकड़ कुछ निश्चित समय के लिए जमा किया जाता है। उस निश्चित अवधि से पूर्व रोकड़ नहीं निकाला जा सकता। ये जमा कई अवधियों के लिए किया जा सकता है। अलग-अलग अवधि पर अलग-अलग दर से ब्याज दिया जाता है।
4) व्यापारिक प्रपत्र (Commercial paper) – ये बहुत ही लोकप्रिय प्रपत्र है। इन्हें साख वाली बड़ी कंपनियां निर्गमित करती है और अल्पकालीन किंतु असुरक्षित प्रतिभूमि है। इसे तीन माह से लेकर एक वर्ष के लिये निर्गमित किया जाता है। विपणन योग्य प्रतिभूति होने के कारण, इसमें तरलता भी पर्याप्त होती है।
5) जमा का प्रमाण-पत्र (Certificate of deposits) – यह प्रमाण-पत्र बैंक एक निश्चित समय के लिये स्थायी जमा के बदले में निर्गमित करती है। ये प्रमाण पत्र भी विपणन योग्य होते हैं, क्योंकि ये विनिमय प्रलेख (Negotiable instrument) होते है।
6) ट्रेजरी बिल (Treasury bill) ट्रेजरी बिल अल्पकालीन सरकारी प्रतिभूति है। 1 सामान्यतया, इन बिलों को छूट या कटौती पर बेचा जाता है तथा उनका शोधन, परिपक्वता पर सम मूल्य पर होता है, इनमें तरलता अत्यधिक होती है तथा इन्हें कभी भी खरीदा - बेचा जा सकता है। इस प्रतिभूति में जोखिम बिल्कुल भी नहीं होता।
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