शैक्षिक तकनीकी का महत्त्व - Significance of Educational Technology

शैक्षिक तकनीकी का महत्त्व - Significance of Educational Technology


शैक्षिक प्रक्रियाओं में वस्तुनिष्ठता तथा तार्किक संगठन की कमी होती है। शैक्षिक तकनीकी द्वारा इसे सरल, वस्तुनिष्ठ, व्यवस्थित एवं तार्किक बनाया जा सकता है । शैक्षिक तकनीकी को शिक्षा का विज्ञान कहा जाता है क्योंकि यह वैज्ञानिक ज्ञान एवं प्रक्रिया का उपयोग शैक्षिक समस्याओं के समाधान के लिए करता है। यह शैक्षिक समस्याओं को मनोवैज्ञानिक आधार प्रदान करता है। यह अधिगम एवं अभिप्रेरणा के सिद्धांतों का प्रयोग शिक्षण को अधिक प्रभावशाली बनाने हेतु करता है। इस प्रकार यह अधिगम के विज्ञान को शिक्षण की कला के साथ जोड़कर शिक्षण-अधिगम को व्यवस्थित एवं रचनात्मक बनाता है।


शिक्षा की सार्वभौमिकता देश के समक्ष एक विशाल चुनौती के रूप में खड़ा है। शैक्षिक तकनीकी विभिन्न उपागमों द्वारा इन समस्याओं के समाधान हेतु कई विकल्प प्रस्तुत करता है ।

जैसे- स्व-अध्ययन सामग्री, शैक्षिक दूरदर्शन, टेलिकान्फेसिंग, मल्टीमीडिया पैकेज, वैकल्पिक अध्ययन सामग्री इत्यादि। शैक्षिक तकनीकी द्वारा एक बड़े समूह को कम समय तथा कम खर्च में पढ़ाया जा सकता है।


जनसंख्या शिक्षा तथा प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम शैक्षिक दूरदर्शन तथा शैक्षिक आकाशवाणी (EDUSAT ज्ञानदर्शन, कृषि दर्शन, ज्ञानवाणी आदि) द्वारा सुगम तथा सफल रूप से संचालित किया जा सकता है।


शैक्षिक तकनीकी मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम को सशक्त स्वरुप प्रदान करता है। स्व-अध्ययन सामग्री, टेलीकान्फ्रेसिंग, मल्टीमीडिया पैकेज, ऑनलाइन कोर्स, ब्लॉग, वार्ता समूह आदि ऐसे माध्यम हैं जिसका उपयोग मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम में व्यापक रूप से किया जा रहा है।


यह शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावशाली बनाने के लिए शैक्षिक प्रतिमानों का निर्माण करता है तथा नवाचारी शिक्षण युक्तियों का विकास कर अधिगम सिद्धांतों तथा शिक्षण विधियों को व्यावहारिक रूप प्रदान करता है। यह कक्षा में विद्यमान वैयक्तिक विभिन्नता की समस्या के समाधान के लिए कई साधनों का निर्माण करता है। जैसे- अभिक्रमित अनुदेशन, CA, CBT, मल्टीमीडिया पैकेज, भाषा प्रयोगशाला आदि यह सूक्ष्म शिक्षण द्वारा शिक्षकों में विभिन्न शिक्षण कौशलों का विकास करता है। अधिगम उद्देश्यों के निर्धारण तथा पाठ-योजना के निर्माण के लिए कई उपागमों का निर्माण करता है, जिससे विद्यार्थियों के प्रस्तुति या व्यवहार में अपेक्षित परिवर्तन लाया जा सकता है। यह अभिप्रेरणा, पुनर्बलन तथा प्रतिपुष्टि के तंत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए नये नये माध्यमों तथा युक्तियों का भी निर्माण करता है।


शैक्षिक तकनीकी सूचना के संचार के लिए कई श्रव्य दृश्य तथा जनसंचार साधनों को व्यवहार में लाता है।

श्रव्य-दृश्य साधनों में फ्लैनेल बोर्ड, मैग्नेटिक बोर्ड, प्लास्टीग्राफ, मॉडल, स्पेसिमेन, प्रोजेक्टर, स्मार्ट बोर्ड, टेप रिकॉर्डर, हैंडीकेम, ऑडियो एंड वीडियो CD, एनीमेशन, मल्टीमीडिया आदि का उपयोग किया जाता है। जनसंचार साधनों में दूरदर्शन, आकाशवाणी, इन्टरनेट (e-newspaper, you tube पर TV चैनल, वेबकास्ट, सोशल मीडिया इत्यादि) महत्वपूर्ण हैं। इसके द्वारा संप्रेषण प्रभावशाली तथा अर्थपूर्ण बन जाता है। सूचना श्रोता या दर्शकों तक इस रूप में पहुँचती है जिसे वे आसानी से समझ सकते हैं तथा अपनी प्रतिपुष्टि भी व्यक्त कर सकते हैं।


यह शैक्षिक आकलन हेतु उपकरणों के निर्माण, चयन तथा प्रशासन में शिक्षकों की सहायता करता है। आज कई ऐसे सॉफ्टवेयर (Hot Potato, E- Portfol 10, Rubistar) उपलब्ध हैं

जो प्रश्न पत्र, पोर्टफोलियो, रुब्रिक आदि के निर्माण में शिक्षकों की सहायता करते हैं। आज कई संस्थान प्रवेश परीक्षा ऑनलाइन आयोजित करते हैं।


शैक्षिक तकनीकी द्वारा शिक्षा में अनुसंधान एवं शोध कार्यो को अधिक विश्वसनीय बनाया जा सकता है। Microsoft Excel, Microsoft Access, SPSS आदि साधनों का उपयोग आकड़ों के विश्वसनीय विश्लेषण के लिए किया जा सकता है यह शिक्षकों द्वारा क्रियात्मक अनुसंधान के प्रभावशाली क्रियान्वयन के लिए युक्तियों का निर्माण करता है।


शैक्षिक तकनीकी के तंत्र उपागम का उपयोग विद्यालय के सुचारु रूप से संचालन हेतु प्रशासन एवं प्रबंधन की रूपरेखा तैयार करने तथा विभिन्न शैक्षिक योजनाओं के निर्माण के लिए किया जाता है।


इस प्रकार हम कह सकते हैं कि शैक्षिक तकनीकी का उपयोग शिक्षण के नियोजन, क्रियान्वयन एवं नियंत्रण, शिक्षा की सार्वभौमिकता सुनिश्चित करने, प्रौढ़ शिक्षा तथा जनसंख्या शिक्षा के प्रसार मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा के विकास तथा संस्थागत प्रशासन तथा प्रबंधन को सशक्त बनाने हेतु किया जाता है।