स्किनर का सक्रिय अनुबंधन का सिद्धान्त - Skinner's Theory of operant conditioning or Behavioristic theory

स्किनर का सक्रिय अनुबंधन का सिद्धान्त - Skinner's Theory of operant conditioning or Behavioristic theory


प्रसिद्ध व्यवहारवादी मनोवैज्ञानिक बी.एफ. स्किनर ने सक्रिय अनुबंधन के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया व्यवहारवाद के जनक वाटसन महोदय ने प्राणी के व्यवहार को समझने के लिये 5-O-R सूत्र का प्रतिपादन किया। इसमें (Stimulus ) उद्दीपन O (Organism) प्राणी तथा R (Response) अनुक्रिया या व्यवहार है। उनके अनुसार उद्दीपन के घटित होने पर प्राणी अनुक्रिया करता है। लेकिन इसके विपरीत स्किनर का मत है कि प्राणी उद्दीपन घटित होने की प्रत्याशा से पहले ही अनुक्रिया करने लगता है। इस प्रकार जब उसे उद्दीपन की प्राप्ति हो जाती है, तब यह अनुक्रिया पुष्ट होती है या कमजोर यह उद्दीपन की प्रकृति पर निर्भर करता है। अतः यहाँ सीखे गये व्यवहार का सूत्रS-R न होकर R-5 हो जाता है।


स्किनर के इस सिद्धान्त को नैमित्तिक अनुबंधन (Instrumental conditioning) का सिद्धान्त भी कहते हैं, क्योंकि प्राणी इसमें किसी उद्दीपन ( पुरस्कार या दण्ड) के निमित्त प्रतिक्रिया करता है तथा व्यवहार की पुनरावृत्ति होने पर व्यवहार अनुकूलित हो जाता हैजिसे प्राणी के द्वारा किया गया अधिगम या सीखना कहते हैं। इस सिद्धान्त के अनुसार प्राणी पहले अपेक्षित अनुक्रिया करता है तब उसे पुरस्कार प्रदान किया जाता है, पुरस्कार अनुक्रिया को दृढ़ करता है तथा पुनः उसी किया को करने के लिये प्रेरित करता है।


स्किनर के अनुसार सीखना तभी होता है जब किसी प्रतिक्रिया का पुष्टिकरण होता है। अधिगम या सीखने में R (प्रतिक्रिया) ही मजबूत या दृढ होती है, न कि S-R बंधन।


स्किनर के अनुसार सक्रिय अनुबंधन से अभिप्रायः एक ऐसी अधिगम प्रक्रिया से है जिसके द्वारा सक्रिय व्यवहार की सुनियोजित पुनर्बलन द्वारा पर्याप्त बल मिल जाने के कारण बांछित रूप में जल्दी जल्दी पुनराबृत्ति होती रहती है और अधिगमकर्ता अंत संबांधित व्यवहार सीखने में समर्थ हो जाता है।


स्किनर का प्रयोगः


स्किनर ने एक पेटी में भूखे चूहे को रख दिया। पेटी के एक कोने में एक लीवर लगा था जिसे उसी कोने की दीवार के ऊपरी भाग में रखें एक ऐसे पात्र से जोड़ दिया गया था जिसमें भोजन के छोटे-छोटे टुकड़े भरे हुये थे। लीवर के नीचे एक तश्तरी या प्याली रखी गई थी। लीवर को दबा देने पर भोजन पात्र से एक टुकड़ा तश्तरी में गिर सकता था। चूंकि पेटी के भीतर भूखा चूहा कोई भी अनुक्रिया करने के लिए स्वतंत्र था वह इधर-उधर घूमता रहा उछल कूद करता रहा।

इसी क्रम में चूहे ने लीवर को दबा दिया जिसके परिणामस्वरूप उसके सामने प्याली में भोजन का टुकड़ा गिर गया। वह भोजन चूहे ने खा लिया। इस प्रयोग को पुन किया गया। यह पाया गया कि चूहे ने लीवर को फिर दबा दिया और उसे भोजन का टुकड़ा प्राप्त हो गया। यह क्रम चलता रहा और चूहा शीघ्रता से लीवर दबा-दबाकर भोजन प्राप्त करना सौख गया। स्किनर के इस प्रयोग में भोजन चूहे की क्रिया के लिये पुर्नबलन का कार्य करता है अर्थात वह लीवर को दबाने की क्रिया को बल प्रदान करता है। किसी भी प्राणी द्वारा की गयी किसी अनुक्रिया अथवा व्यवहार का हम दो प्रकार से पुनर्बलन कर सकते हैं कुछ देकर, जिसे पाना उसे अच्छा लगे अथवा उसके पास से कुछ हटाकर जिसका उसे अच्छा लगे। पहले प्रकार के पुनर्बलन को पनात्मक पुनर्बलन (positive reinforcement ) कहते है जैसे भोजन, पानी, प्रशंसाधन, मान-सम्मान आदि। दूसरे प्रकार का पुनर्बलन ऋणात्मक पुनर्बलन (Negative reinforcement) कहलाता है। जैसे बिजली का आघात, अपमान, डरावनी आबाज आदि से बचना।