शैशवावस्था में बच्चे का सामाजिक चारित्रिक विकास - social character development of the child in infancy

शैशवावस्था में बच्चे का सामाजिक चारित्रिक विकास - social character development of the child in infancy


1) जन्म से एक माह तक शिशु मनुष्यों और आवाजों की पहचान नहीं कर पाता। 


2) दूसरे माह में वह आवाज पहचानता है एवं दूसरे व्यक्ति को देखकर मुस्कुराता है।


3) तीसरे माह अपनी माँ को पहचानने लगता है और दूसरों के साथ खेलता एवं हँसता है। 


(4) छठे से आठवे माह में वह परिचित व्यक्तियों एवं अपरिचित व्यक्तियों में पहचान कर लेता है एवं व्यक्तियों के शब्द, हाव भाव का अनुकरण करता है।


5) तीसरे वर्ष में वह दूसरे बालकों के साथ खेलने लगता है और इस प्रकार उनसे सामाजिक संबंध स्थापित करता है। 


शैशवावस्था में बच्चे का चारित्रिक विकास


1) जन्म से तीन माह तक शिशु को अपने उचित-अनुचित आचरण के सम्बन्ध में किसी भी प्रकार का जान नहीं होता।


2) 2 वर्ष की आयु में बच्चे अपने अच्छे या बुरे कार्यों के अनुसार अपने को अच्छा या खराब लड़का / लड़की समझने लगते हैं। 3) 2 वर्ष की आयु प्राप्त करते-करते शिशु में स्वार्थ की भावना विकसित होने लगती है और वह इस काल में अपने खिलौने को भी किसी बच्चे से साझा नहीं करता है।


4) बच्चे 3-4 वर्ष की आयु में बड़ों के आदेशों का पालन करते है, अच्छे-बुरे कार्यों में अन्तर समझने लगता है। 


5) 5 वर्ष की आयु में बच्चे मूल्यों को बिना समझे ही स्वीकार करने लगता है।