सामाजिक निर्माणवाद एवं सीखना - Social Constructivism and Learning

सामाजिक निर्माणवाद एवं सीखना - Social Constructivism and Learning


1. निर्देशित अधिगम ( Guided Learning): व्यगोत्सकी का मानना था कि बच्चे का संज्ञानात्मक विकास उसके समुदाय के अन्य सदस्यों वयस्कों एवं अधिक सक्षम मित्रों/सहपाठियों के साथ संवाद तथा अंतःक्रिया द्वारा होता है। वे बच्चे को आवश्यक सूचना तथा सहायता प्रदान करते हैं (प्रेरक, अनुस्मारक, प्रोत्साहन आदि) ताकि बच्चा किसी कार्य या समस्या का समाधान सफलतापूर्वक कर सकें। ज्यों-ज्यों बच्चा समस्या के समाधान हेतु आवश्यक ज्ञान तथा कौशल में निपुण होते जाता है, वे इस सहायता को कम करते जाते हैं।


2. समीपस्थ विकास का क्षेत्र (Zone of Proximal Development): यह बच्चे के अधिगम तथा विकास का एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ बच्चा किसी दिए गए कार्य को अकेले करने में असमर्थ होता है किन्तु उसी कार्य को वह समुदाय के व्यस्क सदस्यों या अधिक सक्षम सहपाठी की सहायता से सफलता पूर्वक निष्पादित करता है। व्यस्क सदस्यों या अधिक सक्षम सहपाठियों द्वारा प्राप्त सहायता स्कैफ्फोल्डिंग (Scaffolding) कहलाती है। धीरे-धीरे बच्चा उस कार्य को करने के लिए स्वतंत्र हो जाता है।


3. निजी भाषण (Private Speech) तथा अधिगम: यदि बच्चे को शब्द या वाक्य / वाक्यों के रूप में सहायता प्रदान की जाती है तो इसे बच्चे द्वारा पहले निजी भाषण के रूप में आत्मसात किया जाता है, धीरे-धीरे उम्र के साथ यह आंतरिक भाषण (Inner Speech) का रूप ले लेता है। यह निजी या आतंरिक भाषण चिन्तन प्रक्रिया को नियंत्रित करता है तथा उन्हें स्व-निर्देशित अधिगम के लिए प्रेरित करता है। उदाहरण के लिए बच्चे स्वयं को अनुस्मारक (Reminder) द्वारा दिशा निर्देशित करते हैं। जीवविज्ञान प्रयोगशाला में विद्यार्थी स्लाइड तैयार करते वक्त स्वयं के साथ संवाद करता है- “कवर स्लिप को स्लाइड की सामग्री के ऊपर पर धीरे-धीरे रखों।”


4. जटिल अधिगम वातावरण तथा प्रमाणिक कार्य (Complex Learning Environment and Authentic Task): सामाजिक निर्माणवादियों का मानना है कि बच्चों के अधिगम के लिए जटिल अधिगम वातावरण का निर्माण किया जाना चाहिए जहाँ सामान्य समस्याएँ या आधारभूत कौशल अभ्यास कार्य के स्थान पर वास्तविक जीवन से जुड़े असंरचनात्मक समस्याओं का चयन किया जाता है

जिसके कई दृष्टिकोण होते हैं तथा इसके कई समाधान हो सकते हैं। बच्चों के लिए ऐसे गतिविधियों का आयोजन किया जाता है जो उनके वास्तविक जगत समस्याओं/ अभ्यासों से संबंधित होता है, जहाँ अवधारणाएँ जिन्हें सीखा • जाना है को व्यवहार में लाया जाता है।


5. सामाजिक समझौता वार्ता (Social Negotiation): सामाजिक निर्माणवाद सामाजिक समझौता वार्ता की प्रक्रिया पर आधारित होता है जहाँ बच्चा अपने ज्ञान एवं अनुभवों को सहपाठियों तथा शिक्षक के साथ साझा करता है तथा एक-दूसरे के दृष्टिकोण एवं अनुभवों का सम्मान करता है। इस प्रक्रिया में एक ऐसे विचार या अवधारणा का निर्माण होता है जिस पर सभी की सहमति होती है।


6. बहुदृष्टिकोण तथा पाठ्य वस्तु का बहुप्रतिनिधित्व (Multiple Perspectives and Multiple Representations of the Content): कक्षा में किसी पाठ्य वस्तु सम्बन्धी समस्या को कई प्रकार की सामग्री या प्रारूपों द्वारा प्रदर्शित किया जाना चाहिए। जैसे- किसी समस्या को अनुरूपों (Analogs ), उदाहरणों, रूपकों (Metaphors), चित्रों, विडियो तथा •एनीमेशन द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है। साथ-ही-साथ समस्या के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर इसके समाधान का प्रयास करना चाहिए।


7. अधिगम का स्वामित्व (Ownership of Learning): बच्चों को उनके अधिगम का स्वामित्व दिया जाना चाहिए ताकि वे अपने अभिरुचि तथा अभिक्षमता के आधार पर शिक्षक के मार्गदर्शन में अधिगम गतिविधि का चुनाव, उसके उद्देश्यों का निर्धारण, संसाधनों का चयन तथा इसका संगठन एवं संचालन कर सकें। वे सक्रिय रूप से अधिगम की प्रक्रिया में संलग्न रहते हैं, जिससे ज्ञान का निर्माण सुनिश्चित तथा सहज हो जाता है।


8. सामाजिक निर्माणवाद निदानात्मक अधिगम को सम्मिलित करता है जो सीखनेवाले के वैकल्पिक अवधारणाओं तथा त्रुटियों को दूर कर देता है।


9. यह बच्चों को पृच्छा तथा समस्या आधारित अधिगम के लिए प्रोत्साहित करता है। पाठ्यवस्तु को वास्तविक जीवन से जुड़े समस्या के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। 


10.यह बच्चों का अपने परासंज्ञानात्मक क्षमताओं तथा युक्तिपूर्ण आत्म-नियंत्रण की ओर ध्यान केन्द्रित करता है। 


सारतः हम कह सकते हैं कि सामजिक गतिविधियों में विद्यार्थियों की सहभागिता ज्ञान निर्माण में अहम भूमिका निभाती है। ज्ञान का महज निर्माण नहीं वरन ज्ञान का सह-निर्माण सामजिक अंतःक्रिया द्वारा होता है। शिक्षक एक शिक्षक के रूप में नहीं वरन एक वरिष्ठ छात्र, सहायक एवं मार्गदर्शक के रूप में अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करते हैं। सामजिक निर्माणवादी पद्धतियाँ व्याख्यान में नहीं बल्कि संवाद व परिचर्चाओं में विश्वास करती है तथा अधिगम का स्वामित्व सीखने वाले को प्रदत्त करती है।