माध्यमिक व उच्चत्तर माध्यमिक स्तर पर सामाजिक विज्ञान का पाठ्यक्रम व पुस्तकें - Social Science Syllabus and Books at Secondary and Senior Secondary Level

माध्यमिक व उच्चत्तर माध्यमिक स्तर पर सामाजिक विज्ञान का पाठ्यक्रम व पुस्तकें - Social Science Syllabus and Books at Secondary and Senior Secondary Level


माध्यमिक स्तर पर सामाजिक विज्ञान के अन्तर्गत समकालीन भारत, भूगोल, राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र आदि विषय लिए गए है। सामाजिक आर्थिक चुनौतिया की जानकारी हासिल करने पर समकालीन भारत में विशेष ध्यान दिया है। आदिवासी, दलित एवं हासिए समुदाय को विकास की मुख्य धारा में लाने का प्रयास किया गया है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में विभिन्न क्षेत्रों के योगदान का अध्ययन किया गया। आधुनिक विश्व के सन्दर्भ में स्वतंत्र भारत राष्ट्र के विकास को पढ़ाया जाएगा। संरक्षण एवं पर्यावरण सम्बन्धी सरोकारों का अध्ययन किया जाएगा। राजनीति विज्ञान में संवैधानिक मूल्यों (न्याय, स्वतंत्रता, समता, बंधुभाव, भाईचारा) के संरक्षण एवं संवर्धन पर बल दिया है। अर्थशास्त्र विषय का परिचय इसी स्तर पर छात्रों को हो रहा है।


उच्च माध्यमिक स्तर पे छात्र अपनी रूचि एवं आवश्यकता के अनुसार विषय क्षेत्र चुन सकते है। माध्यमिक स्तर एवं उच्च शिक्षा का दुवा माध्यमिक शिक्षा है। माध्यमिक शिक्षा का विकास एवं उच्च शिक्षा का आधार बनता है।

इस स्तरपर छात्र पारंपरिक एवं व्यावसायिक शिक्षा का चुनाव कर सकते है। सामाजिक विज्ञान और वाणिज्य पाठ्यक्रम में सही विकल्पों को चुनाव कर सकता है। उच्च माध्यमिक स्तर पर सामाजिक विज्ञान के अन्तर्गत राजनीतिशास्त्र, भूगोल, इतिहास, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, मनोवैज्ञानिक आदि विषय सम्मिलित है। व्यावसायिक शिक्षा और लेखाशास्त्र आदि विषय वाणिज्य के अन्तर्गत हो सकते हैं। 1975 की पाठ्यचर्या की रुपरेखा में कहा गया था, प्रत्येक विषय की आवश्यक इकाईयों की पहचान करके उन्हें एक समग्र पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाना चाहिए “फिर भी सामाजिक विज्ञान विषय अलग-अलग विषयों के रूप में पढ़ाया जाता था। एन.सी.ई.आर.टी. ने कक्षा छह से दस तक के लिए इतिहास, भूगोल, नागरिकशास्त्र विषय की स्वतंत्र पाठ्यक्रम तैयार किया है। इन विषयों को सामाजिक विज्ञान कहते है।


राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रुपरेखा 2000 के अनुसार छह से दसवी कक्षा के लिए सामजिक विज्ञान की स्वतंत्र पाठ्यपुस्तकें निर्माण की गयी।

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रुपरेखा 2005 (राष्ट्रीय फोकस समूह) के अनुसार सामाजिक विज्ञान को बौद्धिक और रोजगार अनुकूल बनाने का प्रयास किया गया। सामाजिक विज्ञान सामाजिक, सांस्कृतिक और विश्लेषणात्मक कौशल छात्रों को प्रदान करता है। भारतीय संविधान में अंतर्निहित मूल्यों पर अधिष्ठित समाज के निर्माण में विशेष महत्व रखता है। समाज के सक्रिय एवं चिन्तनशील सदस्य बने. जीवनशैली और सांस्कृतिक रीतिरिवाजों का सम्मान करे, विचार, संस्था एवं परम्पराओं की जाँच पड़ताल करें. सामाजिक कौशलों का विकास करे. सामाजिक मूल्यों का संवर्धन यह सामाजिक विज्ञान का उत्तरदायित्व है।


• माध्यमिक स्तर पर सामाजिक विज्ञान शिक्षण का उद्देश्य छात्रों में आलोचनात्मक और अवधारणात्मक क्षमता का विकास करना है।


• आधुनिक तथा समकालीन भारत तथा विश्व के सन्दर्भ में आर्थिक तथा सामाजिक परिवर्तन और विकास की समझ विकसित करें।


• विभिन्न सामाजिक एवं आर्थिक मुद्दों तथा चुनोतियों की आलोचनात्मक जाँच करे। 


• लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष समाज के निर्माण में दायित्व को समझे।


• संवैधानिक दायित्व को निभाने में दायित्व को समझे।


• विश्व अर्थव्यवस्था और राजनीति के सन्दर्भ में भारत के विकास एवं परिवर्तन को समझे।


• प्राकृतिक पर्यावरण के संरक्षण की आवश्यकता की सन्दर्भ में पर्यावरण और संसाधनों के न्यायपूर्ण उपभोग को समझे।


माध्यमिक स्तर पर मुख्य बल समकालीन भारत पर होगा और छात्रों को सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों की समझ विकसित करायी जाएगी।

हासिए के समुदाय की चर्चा अन्य समुदाय के परिप्रेक्ष्य में किया जाएगा। जिससे छात्रों को दैनिक जीवन से जोड़ा जाए। इतिहास में आधुनिक विश्व के सन्दर्भ में समकालीन भारत के आयामों का अध्ययन किया जा सकता है। पर्यावरण और संरक्षण सम्बन्धी आलोचनात्मक मूल्यांकन की क्षमता विकसित करना। भारतीय संविधान में अन्तर्निहित तत्वों (न्याय, स्वातंत्रता, समता, बंधुता की समझ बढ़ाना। माध्यमिक स्तर पर अर्थशास्त्र का जनसाधारण परिप्रेक्ष्य में चर्चा होगी। आर्थिक समानता के परिप्रेक्ष्य में समझ बढ़ानी होगी। उच्च माध्यमिक स्तर पर अदययन के लिए विषय के चयन में सहायक बनाता है।


उच्च माध्यमिक स्तर पर छात्रों की आवश्यकता और रूचि के अनुसार विषय क्षेत्र का चुनाव कर सकते है। यह छात्रों को रोजगाराभिमुख बनाता है। व्यावसायिक एवं कौशल शिक्षा की नींव उच्च माध्यमिकस्तर पर रखी जाती है। शिक्षा में लचीलापन और विविधता पूर्ण बनता है।

विभिन्न क्षेत्रों. संस्कृति एवं पृष्ठभूमि के छात्रों की आवश्यकता को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रम बनाया गया। सामाजिक विज्ञान और वाणिज्य के विभन्न पाठ्यक्रम की उपलब्धता के अनुसार छात्र सही विकल्प का चुनाव कर सकते हैं। उच्च माध्यमिक स्तरपर सामाजिक विज्ञान में राजनीति शास्त्र, भूगोल, इतिहास, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और मनोविज्ञान आदि विषय सम्मिलित होंगे। वाणिज्य में व्यावसायिक शिक्षा और लेखाशास्त्र प्रमुख अंग है। 


* उच्च माध्यमिक स्तर पर सामाजिक विज्ञान शिक्षण के पाठ्यक्रम के निम्न उद्देश्य है।


* छात्रों की रूचि एवं अभिवृत्ति के अनुसार उचित पाठ्यक्रम या व्यवसाय चयन में सहायता करना।


* विभिन्न स्तर पर उच्च स्तर का ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करना।


* समस्या समाधान करने की योग्यताओं को विकसित करना।


* सूचनाओं को संशोधित करने के विभिन्न तरीको से छात्रों को परिचित करना। माध्यमिक व उच्चत्तर माध्यमिक स्तर पर सामाजिक विज्ञान का पाठ्यक्रम व पुस्तकें (राजनीति शास्त्र, भूगोल, इतिहास, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और मनोविज्ञान) सम्मिलित होंगे।