अभिप्रेरणा की सामाजिक-सांस्कृतिक अवधारणा - Socio-cultural concept of motivation

अभिप्रेरणा की सामाजिक-सांस्कृतिक अवधारणा - Socio-cultural concept of motivation

इसके अंतर्गत समुदायों की गतिविधियों में सहभागिता पर बल दिया गया है। व्यक्ति समुदाय में अपनी पहचान एवं अन्तः सम्बन्धों को बनाए रखने के लिए गतिविधियों में सक्रिय रहता है। उदाहरण के लिए जब हम अपने आप को एक खिलाड़ी, अध्यापक, शिल्पकार, मनोवैज्ञानिक अथवा इंजीनियर के रूप में देखते हैं, तो एक समूह में हमारी एक पहचान होती है। उस समूह में हमारा समाजीकरण बाह्य वैध सहभागिता से केन्द्रीय सहभागिता की ओर अग्रसर होता है। यहाँ बाह्य वैध सहभागिता से तात्पर्य है कि प्रवर्तक (नौसिखिए) किसी समूह के कार्यों में विशुद्ध रूप से अंतर्ग्रस्त होते हैं फिर भले ही उनकी क्षमताएँ कम विकसित हों या उनकी सहभागिता कम हो। वे उस समुदाय के सदस्य के रूप में अपनी पहचान बनाए रखने के लिए उस समुदाय के मूल्यों, रीति-रिवाज़ों एवं क्रियाकलापों को सीखने के लिए अभिप्रेरित रहते हैं। यह अभिप्रेरणा पहचान से आती है और पहचान वैध सहभागिता से।