पर्यावरण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण के लिये कुछ उपाय - Some measures for a positive attitude towards the environment

पर्यावरण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण के लिये कुछ उपाय - Some measures for a positive attitude towards the environment


पर्यावरण का उचित रख-रखाव, उसका संरक्षण तथा संवर्धन मानवजीवन के अस्तित्व के लिये अत्यन्त आवश्यक है। परन्तु मानव ही पर्यावरण के विनाश का मुख्य कारण है। उसे पर्यावरण के प्रति सकारात्मक सोच लानी होगी, अन्यथा उसका विनाश सुनिश्चित है । पर्यावरण के प्रति छात्रों तथा जनसामान्य में सकारात्मक दृष्टिकोण परिवर्तन के लिये कुछ उपाय निम्न लिखित हैं जिनको अमल में लाने से पर्यावरण को बचाया जा सकता है


1) शिक्षक छात्रों में पर्यावरण के ज्ञान, महत्व तथा उसके प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति के विकास के लिये अध्यापक मुख्य अभिकर्ता के रूप में कार्य कर सकते हैं। अध्यापक छात्रों में पर्याप्तत दिशा-निर्देश देकर उन्हेंक पर्यावरण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद कर सकते हैं

आवश्यकता यह है कि अध्यापक स्वयं अपनी अभिवृत्ति में परिवर्तन लायें तथा अपनी अभिरूचि में वृद्धि करें। निष्ठा वान तथा पर्यावरण के प्रति सकारात्मक लगाव की भावना से ही अध्यापक अपने छात्रों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित कर पायेंगे


2) विद्यालय - विद्यालय से जुड़े लोगों जैसे- प्रशासक, अध्यापक, कर्मचारी, छात्र तथा उनके अभिभावक सभी अपनी सक्रिय भागीदारी से पर्यावरण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में अपनी भूमिका का निर्वाह कर सकते हैं। सामान्यतया छात्रों के अभिभावक पर्यावरण के प्रति दिचलस्पी नहीं दिखाते जिसका सीधा असर बच्चों पर पड़ता है। अतः विद्यालय के अन्य लोगों की सोच के साथ-साथ अभिभावकों की सकारात्मक विचारधारा भी पर्यावरण के प्रति सकारात्मक परिवर्तन के लिये आवश्यक है।


3) समाज - पर्यावरण के प्रति जागरूकता अभियान को विश्वव्यापी तथा राष्ट्र व्यापी बनाने में समाज के सदस्यों की प्रत्यक्ष भागीदारी आवश्यक है। इनके सहयोग के बिना इस कार्य में कठिनाई हो सकती है क्योंकि समाज के विभिन्न पहलू भौतिक पर्यावरण के साथ-साथ आर्थिक, सामाजिक तथा मनोवैज्ञानिक पक्ष से भी जुड़े हैं जिसमें काफ़ी विविधता देखने को मिलती है । इसका प्रभाव पर्यावरण के लिये लोगों को प्रभावी रूप से शिक्षित करने पर पड़ता है।


4) धन तथा संसाधन पर्यावरण के लिये तथा इसके लिये लोगों को शिक्षित तथा जागरूक बनाने के लिये पर्याप्त धन तथा उचित संसाधन की आवश्यकता होती है। अतः स्थानीय संसाधन, उपकरण तथा प्रयोगों का संचालन करके पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाई जा सकती है।


5) विद्यालयी संसाधन विद्यालय का मैदान, पेड़-पौधे, तालाब, खेल का मैदान, बगीचा, प्रयोगशाला आदि की सहायता से बच्चा पर्यावरण के विभिन्न घटकों एवं विभिन्न प्रकार की परियोजनाओं के माध्यम से कई प्रकार के संज्ञान विकसित कर सकता है।


6) श्रव्यम - दृश्य सामग्री विभिन्न प्रकार के उपकरण, मुद्रित सामग्री पोस्टर, चार्ट, सरकारी - दस्तावेज, पुस्तकें, सन्दर्भ साहित्य, पत्रिकाएँ, दूरदर्शन, रेडियो, समाचार पत्र, टेपरिकार्डर, फिल्म तथा वृत्त चित्र आदि सामग्री पर्यावरण के विभिन्न आयामों, घटकों तथा समस्याओं को चित्रित करते हैं, उनके बारे में जानकारी तथा संवेदनशीलता उत्पन्न करने में सहायता करते हैं रेडियो, दूदर्शन के विभिन्न कार्यक्रम छात्रों को पर्यावरण की विभिन्न समस्याओं के समाधान हेतु प्रेरित करने तथा पर्यावरण के प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति विकसित करने में प्रभावी भूमिका निभाते हैं।