संविधान द्वारा स्त्रियों को कुछ अन्य अधिकार - Some other rights given to women by the constitution

संविधान द्वारा स्त्रियों को कुछ अन्य अधिकार - Some other rights given to women by the constitution


अनुच्छेद 39 के अनुसारराज्य अपनी नीतियों का अनुपालन इस प्रकार करेगा कि सुनिश्चित रूप से सभी पुरुषों तथा स्त्रियों को जीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त करने का अधिकार हो; समुदाय की भौतिक संपदा का स्वामित्व तथा नियंत्रण इस प्रकार बंटा हो, जिससे सामूहिक हित का सर्वोत्तम रूप से साधन हो; आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि धन और उपत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के अहितकारी संकेंद्रण न हों।


पुरुषों और स्त्रियों; दोनों का समान काम के लिए समान वेतन हो; पुरुषों और स्त्रियों के स्वास्थ्य तथा शक्ति का और बच्चों की सुकुमार अवस्था का दुरूपयोग न हो; आर्थिक आवश्यकता से विवश होकर नागरिकों को ऐसे राजगारों में न जाना पड़े जो उनकी आयु तथा शक्ति के अनुकूल न हों और बच्चों तथा युवाओं को शोषण से बचाया जाए।


अनुच्छेद 42 और 43 में उपबंध किया गया है कि राज्य कर्मकारों को निर्वाह मजदूरी, काम की मनावांचित दर्शाएं, प्रसूति सहायता, शिष्ट जीवन स्तर तथा अवकाश का पूर्ण उपभोग और सामाजिक तथा सांस्कृतिक अवसर सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा। अनुच्छेद 44 में कहा गया है कि राज्य समूचे देश के लिए समान सिविल संहिता के लिए प्रयास करेगा। ये प्रावधान निति निदेशक तत्व के अंतर्गत आते हैं; जिन्हें किसी के हक में किसी न्यायालय द्वारा लागू नहीं किया जा सकता है, किंतु राज्य द्वारा विधि बनाने में इनके ख्याल रखने की अपेक्षा रहती है।


1. निर्वाचन संबंधी अधिकार


अनुच्छेद 25 के अनुसार संसद के प्रत्येक सदन या किसी राज्य विधानमंडल के सदन या प्रत्येक सदन के निर्वाचन के लिए प्रत्येक प्रांतीय निर्वाचन क्षेत्र की एक साधारण मतदाता सूची बनाने का प्रावधान करता है तथा अनुच्छेद 26 लोकसभा तथा राज्यों के विधानसभाओं के निर्वाचन के लिए वयस्क मताधिकार का उपबंध करता है तथा हर नागरिक को जिसकी 21 वर्ष 18 वर्ष से कम आयु न हो तथा जो किसी विधि के अधीन अनिवास,

चित्तविकृति, अपराध या भ्रष्ट या अवैध आचरण के आधार पर अन्यथा आयोग्य न हो उसे मतदान करने अधिकार होगा। इसके अलावा 73वां और 74वां संविधान संशोधन अधिनियम 1993 के द्वारा महिलाओं त्रिस्तरीय पंचायतों में एक तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया गया है, और महिला मानवाधिकारों को मूल अधिकारों में शामिल किया गया।


महिलाओं से संबंधित अन्य अधिनियम


सतीप्रथा निवारण अधिनियम 1987 दहेज निवारण अधिनियम, 1961 (संशोधित 1986), अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम 1956 (संशोधित 1986), बाल विवाह अवरोध अधिनियम 1929 (संशोधित 1976) औषधियों द्वारा गर्भ गिराने से संबंधित अधिनियम 1971, स्त्री अशिष्ट रूपण (प्रतिबंध) अधिनियम 1986, विशेष विवाह अधिनियम 1954, प्रसवपूर्ण निदान तकनीकी अधिनियम 1994 और समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 आदि जैसे स्त्री विषयक विभिन्न अधिनियमों को संविधान में स्थान दिया गया है, जो स्त्रियों की स्थिति को मजबूत और उनके अधिकारों को व्यापक बनाते हैं।