स्पाइनोजा - SPINOZA

स्पाइनोजा - SPINOZA


बेनेडिक्ट स्पाइनोजा देकार्त के समकालीन थे और उन्होंने अपने जीवन काल में कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी शिक्षा के दृष्टिकोण से इनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान इस तथ्य पर बल डालना रहा है कि व्यक्ति ईश्वर का ही एक विशेष पहलू होता है। उन्होंने मन तथा शरीर में एक विचित्र संबंध की बात कही। उनका मत था कि मन तथा शरीर को एक दूसरे से अलग किया जा सकता है। ये दोनों एक ही तरह के तत्व के दो पहलू है। चूंकि ये दोनों एक ही तत्व के दो पहलू हैं इस लिए शारीरिक क्रियाएँ, मानसिक क्रियाओं को उत्पन्न नहीं करती हैं और न ही मानसिक क्रियाएँ शारीरिक क्रियाओं को उत्पन्न करती है। मन तथा शरीर के बीच इस अनोखे तरह के संबंध को मनोवैज्ञानिक विक पहलूवाद (Psychological double-aspectism) कहा गया। स्पाइनोजा ने इसके समर्थन में यह दलील दी कि अगर मस्तिष्क को लम्बवत (Vertically) तथा समतलीय (Horizontally) रूप से काटा जाए तो प्रत्येक भाग थोडा अनोखा अवश्य दिखेगा परंतु वे सभी भाग एक ही तत्व अर्थात मस्तिष्क ही होंगे।

अतः स्पाइनोजा के अनुसार आत्मा (Soul) या मन एक दृष्टिकोण से देखी गयी तथा शरीर या पदार्थ (Matter) दूसरे दृष्टिकोण से देखा गया एक ही वस्तु के दो पहलू हैं।


स्पाइनोजा द्वारा दिये गये योगदान के आलोक में हम जिस सामान्य तथ्य पर पहुँचते है वह यह है कि इनके द्वारा मन तथा शरीर दोनों के अस्तित्व को स्वीकार्य किया गया है। अतः निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि उनका दृष्टिकोण द्वैतवादी (Dualistic) था। स्पाइनोजा के विक पहलू बाद (Double-aspect theory) का सीधा प्रभाव आधुनिक सम्प्रदायों जैसे सरचनावादियों (Structuralists) और प्रकार्यवादियों (Functionalists) पर पद्म जिसके कारण स्पाइनोजा ने मन-शरीर समस्या पर अपने विचारों को अधिक स्पष्टता के साथ प्रस्तुत किया।