विकास की अवस्थाएँ तथा उसके विभिन्न पक्ष - Stages of development and its various aspects

विकास की अवस्थाएँ तथा उसके विभिन्न पक्ष - Stages of development and its various aspects


जीवन पर्यंत चलने वाले विकास की सम्पूर्ण प्रक्रिया को कुछ अवस्थाओं में बांट कर समझा जा सकता है। विकास की एक अवस्था से दूसरी अवस्था में जाने पर विकास प्रक्रिया में कुछ निश्चित परिवर्तन आ जाते हैं। वास्तव में विकास एक सतत प्रक्रिया है जो जन्म से लेकर मृत्युपर्यंत सतत चलती रहती है। विभिन्न मनोवैज्ञानिकों ने विकास की विभिन्न अवस्थाओं को बताया है। सामान्य रूप से इनका वर्गीकरण चार भागों में किया जाता है-


1) गर्भावस्था (Prenatal) गर्भाधान से जन्म तक 2) शैशवावस्था (Infancy) जन्म से 5 या 6 वर्ष तक


3) बाल्यावस्था (Childhood) 5 या 6 वर्ष से 12 वर्ष तक। 


4) किशोरावस्था (Adolescence) 12 वर्ष से 18 वर्ष तक


5) प्रौढावस्था (Adulthood) 18 वर्ष के बाद (6) आरंभिक प्रौढावस्था 21 से 34 वर्ष तक।


7) उत्तर प्रौढ़ावस्था 50 से 64 वर्ष तक।


(8) आरंभिक वृद्धावस्था 75 वर्ष से अधिक की आयु 


विकास के पक्ष


विकास की विभिन्न अवस्थाओं में बालक-बालिकाओं के व्यवहार में विभिन्न प्रकार के अनेकानेक परिवर्तन होते हैं बालक बालिकाओं के व्यवहार में होने वाले परिवर्तनों के आधार पर विकास को अयांकित पक्षों में विभक्त किया जा सकता है


1) शारीरिक विकास (Physical Development)


2) मानसिक विकास (Mental Development) 3) सामाजिक विकास (Social Development )


4) संवेगात्मक विकास (Emotional Development ) )


5) नैतिक विकास (Moral Development)


विकास की विभिन्न अवस्थाएँ


शैशवावस्था शैशवावस्था में विशेषकर प्रारंभिक वर्षों में विकास अत्यंत तीव्र गति से होता है। लम्बाई तथा भार में तीव्र गति से वृद्धि होती है, व्यक्ति के कुल मानसिक विकास का लगभग आधा भाग तीन-चार वर्ष की आयु तक पूर्ण हो जाता है | इस अवस्था में शिशु के सीखने की गति अत्यंत तीव्र होती है। शिशु में शब्दों वाक्यों अथवा क्रियाओं को बार-बार दोहराने की प्रवृत्ति पाई जाती है।


बाल्यावस्था बाल्यावस्था में शारीरिक तथा मानसिक विकास में स्थिरता आ जाती है। विकास की स्थिरता बच्चे की मानसिक तथा शारीरिक शक्तियों को दृढ़ता प्रदान करती है, उसकी चंचलता कम होने लगती है तथा मस्तिष्क परिपक्वसा दिखाई पड़ता है। किशोरावस्था सामान्यतः किशोरावस्था 12 वर्ष की आयु से 18 वर्ष की आयु तक मानी जाती है। इस अवस्था को तूफान एवं संवेगों की अवस्था कहा गया है। इस अवस्था में किशोर के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और संवेगात्मक विकास में क्रांतिकारी परिवर्तन होते हैं। इस अवस्था में किशोर और किशोरियों में एक नवीन ऊर्जा का संचार होने लगती है। नवीन इच्छाए, अभिलाषाएँ उनमें तीव्र रूप से उठती है।