योगात्मक आकलन - summative assessment

योगात्मक आकलन - summative assessment


पेपर पेंसिल टेस्ट- विद्यार्थियों से किसी इकाई सत्र या कोर्स के अन्त में टेस्ट लिखने को कहा जाता है।


लिखित कार्य- विद्यार्थियों से किसी टॉपिक या गतिविधि या घटना के बारे में लिखने को कहा जाता है और इस कार्य के साथ एक रूब्रिक भी दिया जाता है।


मौखिक कार्य- शिक्षक विद्यार्थियों से कोई कहानी या घटना या टॉपिक सुनाने को कहते हैं और बच्चे द्वारा हासिल किए गए कौशलों और क्षमताओं की जाँच करते हैं। मानक टेस्ट- बोर्ड व प्रवेश परीक्षा जैसी परीक्षाओं की शर्तों को पूरा करने के लिए विद्यार्थी विषय सामग्री से सम्बन्धित मानक टेस्ट लिखते हैं। योगात्मक आकलन में यह बात महत्त्वपूर्ण है कि ऊपर बताए गए सभी प्रकार के आकलनों से मिली जानकारी को विद्यार्थियों की उपलब्धि या ग्रेडिंग या प्रमोशन के लिए प्रयोग में लाया जाए।


आकलन के लिए उपकरणों का विकास


कक्षा में विद्यार्थियों के आकलन के लिए उपकरणों की आवश्यकता पड़ती है। इसमें उपकरणों का निर्माण शिक्षक द्वारा किया जाता है जिससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि कक्षा में विद्यार्थी ने कितना सीखा है? शिक्षक द्वारा निर्मित कुछ उपकरण निम्नलिखित हैं


1. उपलब्धि परीक्षण- इसके अन्तर्गत शिक्षक द्वारा कुछ परीक्षण तैयार किए जाते हैं जिसके द्वारा वह विद्यार्थियों की उपलब्धि का मूल्यांकन किया जाता है। शिक्षक द्वारा जिस पाठ को कक्षा में पढ़ाया जाता है उसका वह मूल्यांकन भी करता है। यह मूल्यांकन इसलिए भी किया जाता है जिससे यह जाना जा सके कि अब तक विद्यार्थी ने कितना सीखा है? इस आधार पर विद्यार्थी को एक उपलब्धि प्रमाण पत्र दिया जाता है।


2. प्रदत्त कार्य- इसके अन्तर्गत कक्षा में विद्यार्थियों को कुछ प्रदत्त कार्य दिए जाते हैं। प्रदत्त कार्य का उद्देश्य यह है कि जो भी संकल्पना को कक्षा में पढ़ाया गया है उसका व्यावहारिक जीवन में क्या उपयोग है इसकी जानकारी प्राप्त करना।


3. प्रश्नोत्तरी- इसमें विद्यार्थियों को किसी विषय से जुड़े प्रश्नों का निर्माण करने के लिए कहा जाता है जिससे यह जाना जा सके कि विद्यार्थियों में प्रश्न के निर्माण की कितनी क्षमता का विकास हुआ है। इससे विद्यार्थियों की सृजनात्मक क्रिया का विकास होता है।


4. प्रोजेक्ट विद्यालय में विद्यार्थियों को कुछ प्रोजेक्ट भी दिए जाते है जिससे यह जाना जा सके कि क्या उनमें वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा मिल रहा है या नहीं। उदाहरण के लिए 6वीं कक्षा के विद्यार्थियों को ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका के साधन पर एक प्रोजेक्ट कार्य करवाया जा सकता है।


5. प्रस्तुतीकरण- कक्षा में विद्यार्थियों के भीतर भाषण कौशल के विकास के लिए प्रस्तुतीकरण कार्य करवाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त उनके अन्दर से डर को भी दूर किया जा सकता है। इससे यह भी जाना जा सकता है कि विद्यार्थी जिस ज्ञान को ग्रहण कर रहे हैं क्या उसे वे अभिव्यक्त कर पा रहे हैं या नहीं। 


6. रचनात्मक अभिव्यक्ति- इसके अन्तर्गत विद्यार्थियों से कुछ रचनात्मक कार्य कार्य करवाए जाते हैं जैसे की उन्हें कुछ रचनात्मक लेखन, रचनात्मक पेंटिंग्स और रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए कहा जाता है जिससे उनके अन्दर रचनात्मकता का निर्माण हो सके। 


7. समूह गतिविधि- समूह गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों में सहयोग की भावना का विकास किया जा सकता है। कोई भी समूह गतिविधि के माध्यम से शिक्षक विद्यार्थियों में सहयोग की भावना का आकलन कर सकते हैं। समूह गतिविधि से विद्यार्थियों को किसी कार्य को कम समय में करने के लिए अभिप्रेरित बजी किया जा सकता है।