विश्लेषण व निर्वचन की विधियां - TECHNIQUES OF ANALYSIS AND INTERPRETATION

विश्लेषण व निर्वचन की विधियां - TECHNIQUES OF ANALYSIS AND INTERPRETATION  


वित्तीय विवरण के विश्लेषण व निर्वचन का इतिहास वर्तमान शताब्दी से प्रारम्भ हुआ है। पाश्चात्य देशों में इस पद्धति का प्रयोग साख विश्लेषण के लिए प्रारम्भ हुआ था। सन् 1914 तक साख प्रदान करने वाले केवल वित्तीय विवरणों की वस्तु स्थिति पर विश्वास करके साख प्रदान करते थे। परन्तु धीरे-धीरे इन विवरणों के प्रदत्त समको का विश्लेषण महत्वपूर्ण माना जाने लगा और इनके लिए अनेक विधियों का विकास हुआ। वर्तमान में निर्वचन व विश्लेषण की मुख्य विधियां निम्न है :


(अ) अनुपात विश्लेषण ( Ratio Analysis), 


(ब) तुलनात्मक विवरणों को तैयार करना (Preparation of Comparative Statements),


(स) कोष-बहाव विवरण (Fund Flow Statement), 


(द) रोकड़ बहाव विवरण (Cash Flow Statement ).


(य) प्रवृत्ति विश्लेषण (Trend Analysis),


इनमें से प्रत्येक का विस्तृत अध्ययन अलगे अध्यायों में किया गया है, लेकिन इनकी संक्षिप्त व्याख्या इस प्रकार है : 


(अ) अनुपात विश्लेषण - वित्तीय विवरणों में प्रदत्त व्यावसायिक तथ्यों का व्यक्तिगत रूप से कोई महत्व नही होता है। वे आपस में एक-दूसरे से सम्बन्धित होते हैं। अतः उनके आधार पर कोई भी उचित निष्कर्ष उस समय तक नहीं निकाला जा सकता है,

जब तक कि विभिन्न मदों के बीच कोई सम्बन्ध स्थापित न किया जाये। दो या दो से अधिक मदों के बीच एक तर्कसंगत व नियमबद्ध पद्धति के आधार पर सम्बन्ध - स्थापना का परिणाम ही 'अनुपात' कहलाता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि अनुपात एक ऐसा संख्यात्मक सम्बन्ध प्रदर्शित करता है, जो वित्तीय विवरणों की दो या दो से अधिक मदों बीच पाया जाता है। इस सम्बन्ध को अनुपात के रूप में, दर के रूप में या प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।


अनुपात विश्लेषण से अनेक उद्देश्यों की पूर्ति हो सकती हैं। प्रमुख रूप से प्रबन्ध के आधारभूत कार्य योजना, समन्वय, नियन्त्रण, सवहन एवं पूर्वानुमान के कार्य में सहायता पहुंचाना ही अनुपात विश्लेषण का उद्देश्य होता है। अनुपात विश्लेषण की तकनीक में (1) लेखांकन अनुपातों का निर्धारण, (2) अनुपातों की गणना, (3) निकाले गए अनुपातों की प्रमापित अनुपातों से तुलना (4) अनुपातो का निर्वचन, तथा (5) अनुपातों के आधार पर प्रक्षेपित वित्तीय विरण तैयार करना शामिल होता है।


(ब) तुलनात्मक विवरणों को तैयार करना तुलनात्मक वित्तीय विवरण किसी व्यवसाय की वित्तीय स्थिति के इस प्रकार बनाये गये विवरण होते हैं जो विभिन्न तत्वों पर विचार करने के लिये समय परिपेक्ष्य को दृष्टिगत रखते हुए किये जाते हैं। विश्लेषण हेतु तुलनात्मक विवरणों को तैयार करते समय इस बात को ध्यान में रखना चाहिये कि किसी सस्था के जितने समय के वित्तीय इतिहास का अध्ययन किया जाता हो, उस समय के दौरान समकों एवं सूचनाओं के एकत्रीकरण की विधियों में भिन्नता न हो।


विश्लेषण एवं निर्वचन के लिए तैयार किये जाने वाले तुलनात्मक विवरणों में तुलनात्मक चिट्ठा, उत्पादन लागत का तुलनात्मक विवरण, तुलनात्मक लाभ-हानि खाता, कार्यशील पूंजी का तुलनात्मक विवरण आदि महत्वपूर्ण हैं। इन तुलनात्मक विवरणों में वित्तीय आंकड़ों एवं सूचनाओं को निम्न प्रकार से दिखलाया जा सकता है:


(1) निरपेक्ष अंकों (मुद्रा मूल्य) के रूप में,


(2) निरपेक्ष अंकों में वृद्धि या कमी के रूप में,


(3) निरपेक्ष अंकों में हुई वृद्धि या कमी के प्रतिशत के रूप में तथा,


(4) समान आकार वाले विवरणों के रूप में। वित्तीय विवरणों को तुलनात्मक रूप में प्रस्तुत करके दो वित्तीय अवधियों में हुए परिवर्तनों की जानकारी तथा वित्तीय स्थिति एवं संचालन के परिणामों की दिशा ज्ञात की जा सकती है। 


(स) कोष- बहाव विवरण कोष-बहाव विवरण सारांश रूप में तैयार किया गया एक ऐसा विवरण है,

>

जो दो तिथियों पर तैयार किये गये आर्थिक चिट्ठे के वित्तीय मदों में हुए परिवर्तन को दर्शाता है। इसके लिए कोष से तात्पर्य कार्यशील पूंजी से लगाया जाता है और बहाव से तात्पर्य फण्ड के निर्माण एवं उत्पत्ति से होता है। इस प्रकार कोष बहाव विवरण एक निश्चित अवधि में कार्यशील पूंजी में हुए परिवर्तनों व अन्य वित्तीय मदों के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करने हेतु तैयार किया जाता है। इससे न केवल संस्था की वित्तीय दशा की सुदृढ़ता के विषय में ज्ञान प्राप्त होता है, बल्कि प्रबन्ध की वित्तीय नीतियों के सफल क्रियान्वयन के विषय में भी जानकारी मिलती है। यह प्रबन्ध की उस उच्च दक्षता को भी दर्शाता है जिसके सहारे प्रबन्धकीय निर्णय लिये गये होते हैं। यह उन जटिल प्रश्नों का भी सहज उत्तर प्रदान करता है, जिसे वित्तीय विवरणों से प्राप्त नहीं किया जा सकता। यह संस्था की प्रगति के मूल्यांकन में इसकी वित्तीय आवश्यकताओं व उनके अनुकूलतम वित्तीय प्रबन्धन के निर्धारण में भी सहायता देता है। इस विवरण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए ए. आई.सी.पी.ए. ने मत प्रकट किया है,

"वार्षिक रिपोर्ट में भली-भांति से चित्रित तुलनात्मक कोष- बहाव विवरण सम्मिलित करना एक सामान्य प्रथा बन जानी चाहिए। हालांकि कोष- बहाव विवरण के अनेक उपयोग हैं और यह वित्तीय विश्लेषण का महत्वपूर्ण यन्त्र है, फिर भी इसकी अनेक सीमाएं व मर्यादाएं हैं, जिन्हें इसका प्रयोग करते समय अवश्य ध्यान में रखना चाहिए।

(द) रोकड़ बहाव विवरण - यह रोकड़ बहाव का एक विवरण है और रोकड़ बहाव व्यावसायिक संस्था के अन्दर व बाहर रोकड की गति को दर्शाता है। रोकड़ आगमन रोकड़ के साधन के रूप में और रोकड़ बहिर्गमन रोकड़ के प्रयोग के रूप में माना जाता है। यह विवरण उन कारकों पर भी प्रकाश डालता है, जिनके कारण रोकड का आगमन व बहिर्गमन होता है। इस प्रकार रोकड बहाव विवरण एक ऐसा विवरण है, जिसे दो चिट्ठों की तिथियों के मध्य रोकड़ स्थिति में हुए परिवर्तन व उनके कारकों पर प्रकाश डालने के लिए तैयार किया जाता है। रोकड़ बहाव विवरण संस्था के अल्पकालीन वित्तीय परिवर्तनों की जांच की एक तकनीक है।

यह संस्था की वित्तीय नीतियों और वर्तमान रोकड़ स्थिति के मूल्यांकन में सहायक होता है। भावी अवधि के लिए तैयार किय जाने पर यह प्रबन्ध को संस्था के वित्तीय कार्यकलापों के नियोजन एवं समन्वय में भी सहायक होता है। इस विवरण की सहायता से संस्था का रोकड़ बजट भी तैयार किया जा सकता है।


(य) प्रवृत्ति विश्लेषण वित्तीय विवरणों के निर्वचन में प्रवृत्ति विश्लेषण का भी महत्वपूर्ण स्थान है। प्रवृत्ति सामान्य रूप में एक साधारण रूझान को कहते हैं। व्यवसायिक तथ्यों की प्रवृत्ति का विश्लेषण प्रवृत्ति अनुपात या प्रतिशत एवं बिन्दुरेखीय पत्र या चार्ट पर अंकित करके किया जा सकता है। इसके अन्तर्गत लाभ हानि खाते या चिट्ठे के किसी भी मद के सम्बन्ध में उसकी प्रवृत्ति ज्ञात की जा सकती है, अर्थात् तीन-चार वर्षों के अन्तर्गत उस मद में क्या परिवर्तन हुए हैं, अर्थात् उसमें प्रति वर्ष कमी हुई है अथवा वृद्धि हुई, इसको प्रवृत्ति विश्लेषण के द्वारा ज्ञात किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, पिछले चार वर्षों के विक्रय की राशि को एक जगह रखकर यह देख सकते हैं कि प्रतिवर्ष उसमें कितनी वृद्धि या कमी हो रही है और उसके आधार पर अगले वर्ष के लिए विक्रय का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।