सहायक / सहकारी अधिगम सिद्धांत - Theory of Cooperative Learning

सहायक / सहकारी अधिगम सिद्धांत - Theory of Cooperative Learning


शिक्षा के क्षेत्र में रचनाबाद के परिपेक्ष्य के फलस्वरूप समाज की रूचि / रुझान सहायक अधिगम सिद्धांत में बढ़ी है। सहायक अधिगम एक ऐसा शैक्षणिक दृष्टिकोण है जिसमें कक्षा की अधिगम गतिविधियों को शैक्षिक एवं सामाजिक अनुभवों के रूप में संगठित करने का प्रयास किया जाता है। इसमें बच्चोंको अलग अलग समूहों में बाटकर कार्य आवंटन किया जाता है। इससे से वे एक दूसरे के साथ परस्प कार्य करते हुए सामाजिक अंत क्रिया के मूल्यों एवं कौशल को सीखते है। इसके अलावा वे एक दूसरे की मदद से मानसिक / संज्ञानात्मक क्रियाए जैसे तर्क, सूझबूझ समालोचना आदि का विकास करने में सफल होते हैं इसमें बच्चे स्कैफोल्डिंग (मचान) के द्वारा उन कार्यों को स्वयं करने में सक्षम हो जाते है। जिन्हें ने पहले मदद के बिना नहीं कर पाते थे। कक्षा में सहायक अधिगम के सफल संयोजन के लिए पाँच निम्नलिखित अवयवों की आवश्यकता होती है:


1 सकारात्मक पारस्परिक निर्भरता (positive Independence)


2 व्यक्तिगत एवं सामूहिक उत्तदायित्व (Individual and group accountability)


3 आमने सामने या प्रोत्साहक बातचीत (face to face or Promotive Interaction)


4 पारस्परिक कौशल ( Interpersonal skills )


5 समूह प्रसंस्करण (Group processing)


शिक्षण व्यवस्था को उपर्युक्त अधिगम सिद्धांतो पर आधारित करके एवं उनके समुचित समाकलन Integration) से शिक्षा के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहजता होती है।