निर्णयन में ध्यान देने योग्य बातें - Things to consider in decision making

निर्णयन में ध्यान देने योग्य बातें - Things to consider in decision making


विनियोग निर्णयन में सामान्य तौर पर निम्नलिखित उपायों को अपनाया जाए तो सफलता निश्चित है। विनियोग निर्णय प्रभावी, सफल एवं लाभदायक होगा-


(1) विनियोग प्रस्तावों को स्वीकार करने पूर्व यह आवश्यक होता है कि विभिन्न विनियोग प्रस्तावों की लाभदायकता का तुलनात्मक अध्ययन किया जाए। प्रस्तावों को उनकी लाभदायकता के क्रम में रखकर ही उन पर विचार होना चाहिए।


(2) संपत्तियों में विनियोग का निर्णय लेते समय अवसर लागतों का अनुमान लगाया जाना चाहिए क्योंकि पूँजीगत निर्णयों में इन लागतों का अत्यंत महत्व होता है।


(3) किसी विनियोग प्रस्ताव को स्वीकार करने से पूर्व उससे प्रापत न्यूनतम प्रत्याय दर को निश्चित करके ही विनियोग निर्णय लेना चाहिए। विनियोग पर प्रत्याय द निर्धारण पूँजी की लागत, ब्याज की दर, विनियोग में जोखिम, प्रशासनिक लागत, प्रबंध की विनिमय नीति आदि पर विचार करके निर्धारित किए जाते है।


(4) स्थायी संपत्तियों में विनियोग का निर्णय लेने से पूर्व आयकर नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि आयकर की राशि स्थायी संपत्तियों में लाभदायकता को प्रभावित कर सकती है।


(5) स्थायी संपत्तियों में विनियोग संबंधी निर्णय के लिए यह आवश्यक है कि उद्योग के पास उपलब्ध कोषों का सही ज्ञान होना चाहिए और उपलब्ध व्यय के अनुरूप ही स्थायी संपत्तियों में विनियोग किया जाना चाहिए।

प्राय: पूँजी प्राप्त करने के लिए प्रतिभूतियों की लागत एक समान नहीं होती, अत: ऐसी प्रतिभूतियों का निर्गमन किया जाना चाहिए, जिसकी लागत कम हो।


(6) पूँजी संरचना का निश्चय करते समय इस बात पर विशेष ध्यान देना चाहिए कि पूँजी प्राप्त करने के लिए जिन साधनों का उपयोग किया जा रहा है वे अधिक जोखिमपूर्ण तो नहीं हैं क्योंकि अधिक जोखिम वाले साधन सदैव कंपनी को जोखिम में डाल सकते हैं अर्थात ऐसे विनियोगों का निर्गमन नहीं किया जाना चाहिए जिस पर ब्याज दर अधिक हो या कर अधिक देना पड़े। अतः पूँजी संरचना में न्यूनतम जोखिम वाली प्रतिभूतियों को ही सम्मिलित किया जाना चाहिए।


(7) लाभ हर कंपनी का प्रमुख उद्देश्य होता है और वहीं पूँजी संरचना अनुकूलतम कही जा सकती है, जिसमें लाभ की मात्रा अधिकतम हो।


(8) किसी भी पूँजी संरचना में पूँजी के दंतिकरण अनुपात (Gearing Ratio) का विशेष महत्व होता है, यह अनुपात तीन प्रकार के होते है।


(क) उच्च पूँजी दंतिकरण अनुपात - यदि कुल पूँजी संरचना में ब्याज एवं स्थिर लाभांश के दायित्व वाली प्रतिभूतियों का भाग, समता अंशपूंजी के भाग से अधिक है तो उच्च पूँजी दंतिकरण अनुपात कहलाता है।


(ख) निम्न पूँजी दंतिकरण अनुपात - यदि कुल पूँजी संरचना में स्थिर ब्याज तथा स्थिर लाभांश वाली प्रतिभूतियों की मात्रा कम है, तो यह निम्न दंतिकरण अनुपात कहलायेगा।


(ग) पर्याप्त पूँजीकरण अनुपात यदि कुल पूँजी में स्थिर ब्याज एवं स्थिर लाभांश के दायित्व वाली प्रतिभूतियों का भाग समता अंश पूँजी के भाग के बराबर हो तो यह पर्याप्त पूँजी दंतिकरण अनुपात कहलाता है।