कार्यशील पूंजी की अधिकता से खतरा / हानि - Threat/loss due to excess working capital
कार्यशील पूंजी की अधिकता से खतरा / हानि - Threat/loss due to excess working capital
(1) कार्यशील पूंजी की अधिकता अनावश्यक रूप से स्टॉक का संचय, स्टॉक का दोषपूर्ण व गलत ढंग से उठाना रखना, क्षय, चोरी आदि को प्रोत्साहित करता है
(2) कार्यशील पूंजी की अधिकता से दोषपूर्ण साख नीति और देनदारों से वसूली में ढिलाई को भी प्रोतसाहित करता है जिसके कारण अशोध्य ऋण का भार बढ़ने लगता है और इसका बुरा प्रभाव लाभ पर पड़ता है।
(3) कार्यशील पूंजी की अधिकता प्रबन्ध को ऐसा संतोष प्रदान कर सकती है कि अब उसे कुछ करना हीं नहीं है, फलस्वरूप प्रबन्धकीय अक्षमता पैदा होने लगती है।
(4) कार्यशील पूंजी की अधिकता सट्टे के लाभ को कमाने के लिए स्टॉक संचय की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित कर सकती है, जिससे उदार लाभांश नीति अपनाना पड़ती है और जब सट्टे का लाभ नहीं होता है तो इस उदार लाभांश नीति को बनाये रखने में कठिनाइयां आने लगती है ।
उक्त विवेचना के आधार पर यह कहा जा सकता है कि एक प्रबुद्ध वित्तीय प्रबन्धक को हमेशा कार्यशील पूंजी की एक सही रकम / प्रमाप रकम सतत रूप मे बनाये रखनी चाहिए समय के विभिन्न बिन्दुओ पर कार्यशील पूंजी सही मात्रा को अनुमानित करने की अनेक विधियां हैं जिनका वर्णन आगे के पृष्ठों में किया गया है ।
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