प्रबंध लेखाकन के उपकरण एवं तकनीक अथवा प्रणालियां - Tools and Techniques or System of Management Accounting
प्रबंध लेखाकन के उपकरण एवं तकनीक अथवा प्रणालियां - Tools and Techniques or System of Management Accounting
प्रबन्ध को अपने कार्यों का कुशलतापूर्वक निष्पादन करने के लिए अनेक प्रकार की सूचनाओं की आवश्यकता होती है। प्रबंध लेखाकन एक अकेला ऐसा यन्त्र नहीं है जो प्रबंधकों की लेखांकन सूचना संबंधी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके। प्रबंध लेखांकन अलग से कोई पद्धति नहीं है, बल्कि यह तो अनेक पद्धतियों को सम्मिश्रण एवं समन्वय है। अतः लेखांकन सूचना को अत्यंत प्रभावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करने हेतु प्रबंध लेखांकन में निम्नलिखित उपकरणों एवं तकनीको का प्रयोग किया जाता है
(1) वित्तीय नीति एवं नियोजन (Financial Policy and Planning) - वित्तीय नियोजन से आशय किसी संस्था के लिए आवश्यक पूंजी की कुल राशि का पूर्वानुमान लगाना तथा उसके स्वरूप के संबंध में निर्णय लेने की प्रक्रिया से है। प्रत्येक संस्था को कोश प्राप्त करने के संबंध में निर्णय लेना पड़ता है।
ये कोश अंश पूंजी निर्गमन द्वारा या ऋण लेकर प्राप्त किए जा सकते हैं। यह भी निर्णय करना पड़ता है कि अंश पूंजी किस प्रकार की अर्थात् समता अश पूजी या पूर्वाधिकार अंश पूजी होगी। इसी प्रकार ऋण दीर्घ-कालीन होंगे या अल्प कालीन, इसका भी निर्धारण नीति-विषयक समस्या होती है। कुल प्राप्त किए जाने वाले कोश में अंश पूंजी तथा ऋण का क्या अनुपातिक भाग होगा, इसे निश्चित करना भी प्रबंधकीय निर्णयन का कार्य है। ये सभी निर्णय महत्वपूर्ण होते है जिसमें प्रबंधकीय लेखांकन वित्तीय नियोजन की तकनीक के माध्यम से निदान प्रस्तुत करता है।
(2) वित्तीय लेखांकन (Financial Accounting) वित्तीय लेखांकन से प्राप्त सूचना के आधार पर ही वित्तीय विवरणों का विश्लेषण किया जाता है तथा संबंधित पक्षकारों के लिए अनेक निष्कर्ष निकाले जाते हैं।
अतः प्रबंध लेखाकन के लिए सुव्यवस्थित वित्तीय लेखांकन पद्धति का होना आवश्यक है क्योंकि यह प्रबंध लेखांकन की आधारशिला होती है।
(3) वित्तीय विश्लेषण ( Financial Analysis ) – वित्तीय विश्लेषण का आशय वित्तीय विवरणो लाभ-हानि, खाता एवं चिटठा में प्रस्तुत किए गए परिणामों को किसी वैज्ञानिक विधि से सुविधाजनक भागों में बाटकर उनसे अर्थपूर्ण निष्कर्ष निकालना है। वित्तीय विवरणों के विश्लेषण का उद्देश्य समको का इस प्रकार से वर्गीकरण तथा प्रस्तुतिकरण करना है कि ये प्रबंध के लिए उपयोगी सिद्ध हो सके। वित्तीय विवरणों के विश्लेषण की तकनीकों में तुलनात्मक वित्तीय विवरण, अनुपात विश्लेषण, कोष प्रवाह विवरण, रोकड़ प्रवाह विवरण, प्रवृत्ति विश्लेषण आदि शामिल है।
(4) पुनर्मूल्यांकन लेखांकन ( Revaluation Accounting) इसे पुनर्स्थापन लेखांकन भी कहते हैं। इसका आशय उन रीतियों से है जिसका प्रयोग बढ़ते हुए मूल्यों की अवधि में स्थायी सम्पत्तियो पुनर्स्थापन से संबंधित समस्याओं को हल करने में किया जाता है। इसका उद्देश्य इस बात का विश्वास दिलाना है कि सस्था की पूजी सुरक्षित रखी गई है। अर्थात् मूल्य परिवर्तन का प्रभावों खातों में समायोजन कर लिया गया है तथा लाभों की गणना भी इसी आधार पर की गई है।
(5) बजटरी नियंत्रण (Budgetary Control) यह एक ऐसी प्रणाली है जिसे बजटों का नियोजन तथा नियंत्रण के लिए प्रयोग किया जाता है। सभी कार्यात्मक विभागों के लिए पहले से ही बजट अग्रिम तैयार कर लिए जाते हैं। ये बजट ऐतिहासिक आंकड़ों तथा भावी संभावनाओं पर आधारित होते हैं।
वास्तविक उपलब्धियों को लेखबद्ध कर लिया जाता है तथा पूर्व निर्धारित लक्ष्यों से इनकी तुलना की जाती है तथा विभागीय कार्यकलापों को बजट के अनुकूल रखने का प्रयास किया जाता है।
( 6 ) प्रमाप लागत विधि (Standard Costing) प्रमाप लागत विधि लागतो पर नियंत्रण हेतु प्रबंध लेखांकन की एक महत्त्वपूर्ण तकनीक है। प्रमाप लागत लेखांकन प्रणाली में लागत के विभिन्न तत्वों के संबंध में प्रमाप निर्धारित किए जाते हैं। प्रमाप लागत का निर्धारण चालू दशाओं के व्यवस्थित विश्लेषण पर आधारित होता है। वास्तविक लागतों का अभिलेखन किया जाता है तथा प्रमाप लागतों से इनकी तुलना की जाती है। यदि कोई विचरण पाए जाते हैं तो उनका विश्लेषण किया जाता है और उनके लिए उत्तरदायी कारणों का पता लगाया जाता है।
इस प्रकार प्रमाप लागत विधि संस्था की कार्य कुशलता को बढ़ाने में सहायक होती है एवं यह अपवाद द्वारा प्रबंध को सभव बनाती है।
(7) सीमांत लागत विधि (Marginal Costing) प्रबंध लेखांकन की इस तकनीक के अंतर्गत उत्पादन की कुल लागतों को परिवर्तनशील तथा स्थिर, दो वर्गों में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक लागत केन्द्र पर केवल परिवर्तनशील व्यय एकत्र (accumulate) किये जाते हैं। स्थिर लागतों को उस अवधि की बिक्री से प्राप्त आय में से घटाया जाता है जिसमें ये उदय होते हैं। सीमांत लागत-विधि प्रबंध को निर्णय लेने में बहुत सहायक होती है।
(8) निर्णयन लेखांकन (Decision Accounting) निर्णय लेने का अर्थ किसी कार्य को करने के विभिन्न विकल्पों में से सर्वश्रेष्ठ विकल्प का चयन करने से है। वस्तुतः निर्णयन लेखांकन कोई पद्धति नहीं है
वरन् यह एक प्रक्रिया है जिससे प्रबंध किसी कार्य के लाभ को अधिकतम व हानि को न्यूनतम करने का प्रयास करता है। इसके लिए सीमांत विश्लेषण, वृद्धिशील विश्लेषण (Incremental (Analysis), सम-विच्छेद विश्लेषण, लाभ- मात्रा विश्लेषण आदि तकनीके प्रयोग की जाती हैं। प्रबंधकीय लेखा-विधि की इन तकनीकों के आधार पर निर्णय लेने से प्रयोग और त्रुटि (Trail and Error) की अवैज्ञानिक विधि के दोषों से बचा जा सकता है।
(9) नियन्त्रण लेखांकन (Control Accounting) नियन्त्रण लेखांकन कोई पृथक प्रणाली नहीं है विभिन्न प्रणालियों में नियंत्रण युक्तिया होती है और इन्हें ही नियंत्रण लेखांकन में प्रयुक्त किया जाता है।
सामान्यतः प्रमाप लागत विधि एवं बजटरी नियंत्रण दोनों ही अपने-अपने तरीके से अर्थात् विचरण विश्लेषण, प्रतिवेदन विवरण व अनेक क्रियाओं द्वारा लागतो, व्यय व अन्य मदों पर नियंत्रण रखने का कार्य करते हैं। इसके अतिरिक्त नियंत्रण लेखांकन में आंतरिक जांच अंकेक्षण (internal audit), वैज्ञानिक अंकेक्षण आदि का नियंत्रण उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जाता है। प्रभावपूर्ण लागत नियंत्रण के लिए उत्तरदायित्व लेखा-विधि की तकनीक का भी प्रयोग किया जाता है।
( 10 ) वित्तीय प्रतिवेदन ( Financial Reporting) - वित्तीय प्रतिवेदन से तात्पर्य व्यवसाय के कार्य- परिणामों तथा अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में प्रबंध को सूचना प्रदान करने से है। इसके लिए प्रतिवेदन, विवरण, बिंदु रेखीय व चित्रमय प्रदर्शन एवं चार्ट आदि विधियों का प्रयोग किया जाता है।
(11) क्रियात्मक अनुसंधान एवं सांख्यिकीय विधियां (Operational Research and Statistical Techniques) – गत कुछ वर्षों से प्रबंध संबंधी समस्याओं को हल करने में क्रियात्मक अनुसंधान एवं सांख्यिकीय विधियों का उपयोग निरंतर बढ़ता जा रहा है। प्रायिकता सिद्धांत (Probability), प्रतिचयन सिद्धांत (Sampling Theory), रेखीय कार्यक्रम (Linear Programming) क्रीडा सिद्धांत एवं पंक्ति सिद्धांत (Game Theory and Queuing Theory), अनुरूपन सिद्धांत (Simulation Theory) आदि इस क्षेत्र की प्रमुख तकनीकें है।
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