कुल उपयोगिता - Total Utility
कुल उपयोगिता - Total Utility
जब उपभोक्ता किसी वस्तु की एक से अधिक इकाइयों का उपयोग करता है तो सभी इकाइयों से प्राप्त होने वाली उपयोगिताओं के योग को कुल उपयोगिता कहते हैं। गणित की भाषा में कुल उपयोगिता सीमान्त उपयोगिता का सम्पूर्ण योग होती है।
किर्जनर के शब्दों में किसी वस्तु के स्टॉक से प्राप्त उपयोगिता की मात्रा को कुल उपयोगिता कहते हैं।
मेयर्स के अनुसार "किसी वस्तु की उत्तरोत्तर इकाइयों के उपयोग से प्राप्त सीमान्त उपयोगिता का योग कुल उपयोगिता है।"
जैसे - जैसे किसी वस्तु की इकाइयों में वृद्धि होती चली जाती है त्यों-त्यों कुल उपयोगिता भी बढ़ती चली जाती है ।
उपयोगिता में वृद्धि की इकाइयों में वृद्धि के समान नहीं होता क्योंकि इकाइयों की मात्रा में उत्तरोत्तर वृद्धि से सीमान्त उपयोगिता कमशः घटती जाती है। जैसे ऊपर दिये हुए उदाहरण में जैसे-जैसे रोटी की अधिक इकाइयों का प्रयोग किया जाता है वैसे-वैसे कुल उपयोगिता में घटते हुए कम में वृद्धि होती हैं। जैसे रोटी की दो इकाइयों काम में लाने पर कुल उपयोगिता 25 से बढ़ती है, तीन इकाइयों के प्रयोग से कुछ उपयोगिता 18 से बढ़ती है। इसी प्रकार चार इकाइयों का प्रयोग करने पर कुल उपयोगिता 10 से बढ़ रही है कि कुल उपयोगिता में घटते हुए कम से वृद्धि होती हैं।
जब उपभोक्ता छठी राजी की इकाई का उपभोग करता है तो कुल उपयोगिता का बढ़ना बन्द हो जाता है, अतः यह पूर्ण सन्तुष्टि का बिन्दु हैं ।
जब छः से अधिक रोटी की इकाइयों का उपयोग किया जाता है तो अतिरिक्त रोटी की इकाइयों से ऋणात्मक उपयोगिता मिलने के कारण कुल उपयोगिता भी ऋणात्मक हो जाती है।
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