शिक्षाप्रद सामग्री की सहायता से ज्ञानेन्द्रियों का प्रशिक्षण - Training of sense organs with the help of educational material

शिक्षाप्रद सामग्री की सहायता से ज्ञानेन्द्रियों का प्रशिक्षण - Training of sense organs with the help of educational material


1. प्रत्येक ज्ञानेंद्रिय का यथासंभव पृथक्प्रशिक्षण


2. श्रवण सम्बन्धी अभ्यास शांतिमय वातावरण में ही नहीं, अपितु कुछ अधकारपूर्णवातावरण में भी होना चाहिए।


3. आकार जान कराने के लिये काष्ठ निर्मित बेलन, डंडे, चौकोर टुकडे तथा विभिन्न आकार के इसी प्रकार के पदार्थों का प्रयोग।


4. आकृति के लिये धातुनिर्मित ज्यामिति सम्बन्धी सामग्री


5. वजन का अनुभव कराने के लिए लकड़ी के तख्तों इत्यादि का प्रयोग


6. स्पर्श ज्ञान के लिये अत्यन्त चिकना धरातल और किसी खुरदरे वस्तु का प्रयोग।


7. तापमान का अनुभव कराने के लिए शीतल अथवा ऊष्ण जल का प्रयोग।


8. श्रवण क्रियाओं के लिये बेलनाकार ध्वनि यन्त्र जिनमें विभिन्न ध्वनियाँ उत्पन्न होती हो। 


9. रंग भेद के लिये-रंगीन लकड़ी के क्रमानुसार लगे हु एटुकड़े अथवा विभिन्न रंगों के 64 कार्ड।


10. पाठ का तीन खण्डों में विभाजन जैसा कि सैग्युनने किया है।


(a) नाम के साथ ज्ञानेन्द्रियों का सम्पर्क स्थापित करना। 


(b) नाम जानने के उपरान्त पदार्थ को पहचान लेने में प्रशिक्षण।


(c) पदार्थ के साथ ही उसका नाम पढ़ लेना। 


11. पढ़ने से पूर्व ही लिखना सिखा देना।