शोध कार्य के प्रकार - type of research
शोध कार्य के प्रकार - type of research
शोध कार्य निम्नलिखित तीन प्रकार के हो सकते हैं-
1. मौलिक शोध- मौलिक शोध को बुनियादी शोध भी कहा जाता है । इस प्रकार के शोध की सहायता से परामर्श के आधारभूत सिद्धांतों एवं विभिन्न सेवाओं में प्रयुक्त होने वाली विधियों का मूल्यांकन किया जाता है।
2. परामर्श के क्षेत्र में शोध विभिन्न परामर्श पद्धतियों की प्रभावशीलता देखने के लिए भी शोध क्रियाएँ की जानी चाहिए।
3. अनुवर्ती सेवा सम्बन्धी शोध- उन व्यक्तियों के अनुवर्ती कार्यक्रम के लिए शोध कार्य आवश्यक है जो नव-नियुक्त व्यक्तियों का मूल्यांकन करते हैं।
4. उपक्रम सेवा के लिए शोध- किसी व्यवसाय में प्रवेश से पहले या किसी शैक्षिक पाठ्यक्रम को शुरू करने से पहले किस प्रकार की तैयारी की जानी चाहिए तथा इस तैयारी को किस प्रकार प्रभावशाली बनाया जा सकता है? इन सब बातों को जानने के लिए शोध कार्य की आवश्यकता होती है।
5. नियुक्ति की व्यवस्था में सुधार लाने के लिए शोध नियुक्ति की प्रणाली में सुधार लाने के लिए व्यवस्था में परिवर्तन चाहिए तथा इसके लिए शोध कार्य आवश्यक है। इस सम्बन्ध में सर्वेक्षण किया जाना चाहिए । नियुक्ति-व्यवस्था में सुधार के लिए क्रियात्मक शोध भी किया जा सकता है।
6. शैक्षिक एवं व्यावसायिक सूचनाओं संबंधी शोध - शैक्षिक एवं व्यावसायिक सूचनाओं के बारे में शोध अनिवार्य है। इन सूचनाओं की विश्वसनीयता एवं नवीनता पर ही शैक्षिक एवं व्यावसायिक परामर्श की कुशलता निर्भर करती है। नए-नए उद्योगों एवं व्यवसायों की सूची तैयार करने के लिए शोध कार्य करना आवश्यक है। इसी प्रकार व्यावसायिक सूचनाओं के प्रसार की नई-नई पद्धतियों के सम्बन्ध में भी शोध आवश्यक होता है।
7. व्यक्तिगत, व्यावसायिक एवं शैक्षिक परामर्श के प्रभाव पर शोध व्यक्तिगत, व्यावसायिक और शैक्षिक परामर्श के प्रभाव को जानने के लिए शोध करना चाहिए। इस बात के लिए भी शोध करना आवश्यक हो जाता है कि परामर्श से समाज के विभिन्न वर्ग कितना लाभ उठा रहें हैं। संक्षेप में, मार्गदर्शन एवं परामर्श सेवाओं की सफलता के लिए शोध कार्य चलता रहना चाहिए ताकि इस क्षेत्र में पैदा होने वाली समस्याओं का समाधान भी साथ-साथ ही होता रहे। अब हम यह जानेंगे कि परामर्श की प्रक्रिया मार्गदर्शन से किस प्रकार भिन्न है।
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