माँग की लोच के प्रकार - Types of Elasticity of Demand
माँग की लोच के प्रकार - Types of Elasticity of Demand
इसी अध्याय में माँग के तीन भेद बताये गये थे। उदाहरणार्थ मूल्य माँग आय माँग एवं आड़ी या तिरछी माँग । इसी आधार पर माँग की लोच के निम्न तीन प्रकार हैं:
(1) माँग की कीमत लोच (Price Elasticity of Demand )
(2) माँग की आय लोच (Income Elasticity of Demand)
(3) माँग की आड़ी लोच (Cross Elasticity of Demand )
(1) माँग की कीमत लोच (Price Elasticity of Demand ) - माँग की कीमत लोच से आशय है किसी वस्तु की कीमत में जो परिवर्तन होते हैं उन परिवर्तनों से वस्तु की माँग पर क्या प्रभाव होते. है। दूसरे शब्दों में माँग की कीमत लोच के अन्तर्गत माँग में केवल उस परिवर्तन का अध्ययन शामिल है जो कीमत से फलित होता है। मूल्य के परिवर्तन का प्रभाव सभी वस्तुओं पर समान रूप से नहीं पड़ता है। मूल्य परिवर्तनों से कुछ वस्तुओं की माँग अत्यधिक प्रभावित होती है तो कुछ की अधिक। इसी आधार पर हम माँग की कीमत लोच को अग्रांकित पाँच श्रेणियों में विभक्त कर सकते हैं:
(पप) अधिक लोचदार माँग (More Elastic Demand )
(प) पूर्णतया लोचदार माँग (Perfectly Elastic Demand ) (पपप) इकाई के बराबर माँग की लोच (Unitary Elastic Demand) (अ) अधिक बेलोचदार माँग (More Inelastic Demand ) (अ) पूर्णतया बेलोचदार माँग (Perfectly Inelastic Demand) इनका विवरण इस प्रकार है:
(प) पूर्णतया लोचदार माँग (Perfectly Elastic Demand ) - पूर्णतया लोचदार माँग की लोच से आशय है जब किसी वस्तु के मूल्य में परिवर्तन के बिना भी माँग में घट-बढ़ हो जाती है। इस लोच के सम्बन्ध में कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि मूल्य में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों से वस्तु की माँग में अत्यधिक परिर्तन आ जाता है तो ऐसी वस्तु की माँग की लोच पूर्णतया लोचदार माँग होगी।
(पप) अधिक लोचदार माँग (More Elastic Demand ) - जब कभी किसी वस्तु के मूल्य में होने वाले आनुपातिक परिवर्तन की अपेक्षा माँग में होने वाला आनुपातिक परिवर्तन अधिक हो जाता है, तब इस प्रकार की मॉग की लोच को अधिक लोचदार कहते हैं। उदाहरणार्थ यदि किसी वस्तु के मूल्य में 10 प्रतिशत परिवर्तन से उसकी माँग 15 प्रतिशत बढ़ जाये तो यह स्थिति अधिक लोचदार माँग की होगी।
(अ) अधिक बेलोचदार माँग (More Inelastic Demand) - अधिक बेलोचदार माँग की लोच को हम बैलोचदार माँग की लोच भी कह सकते हैं। इसके अन्तर्गत वस्तु के मूल्य में होने वाले परिवर्तन की तुलना में इसकी मांग में होने वाले परिवर्तन की मात्रा कम होती है तो यह अधिक बेलोचदार मांग होगी। उदाहरणार्थ कीमत में 20 प्रतिशत परिवर्तन के परिणामस्वरूप माँग मात्रा में केवल 10 प्रतिशत परिवर्तन होता है तो यह अधिक बेलोचदार माँग कहलाती है। इस प्रकार की माँग की लोच आवश्यक आवश्यकताओं की वस्तुओं में पायी जाती है।
(अ) पूर्णतया बेलोचदार माँग (Perfectly Inelastic Demand ) - पूर्णतया बेलोचदार माँग का व्यवहार में कोई महत्व नहीं है।
पूर्णतया बेलोच माँग की लोच वह स्थिति है जिसके अन्तर्गत वस्तु की कीमत में परिवर्तन का उसकी माँग मात्रा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है अर्थात् माँग मात्रा यथावत् रहती है। नमक की माँग का उदाहरण इस प्रकार की लोच के अन्तर्गत रखा जा सकता है।
(2) माँग की आय लोच (Income Elasticity of Demand ) - उपभोक्ता की आय में परिवर्तन होने के परिणामस्वरूप वस्तु की माँग में होने वाले परिवर्तनों की माप को माँग की आय लोच कहते हैं। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि माँग में हुए आनूपातिक परिवर्तन को आय में हुए आनुपातिक परिवर्तन से भाग देने पर माँग की आय लोच प्राप्त की जाती है। आय लोच को मापने हेतू निम्न सूत्र का उपयोग किया जा सकता है.
(ei) = वस्तु की माँग में आनुपातिक परिवर्तन / आय में आनुपातिक
उदाहरणार्थ यदि आय में 10 प्रतिशत परिवर्तन पर वस्तु की माँग की मात्रा में 20 प्रतिशत परिवर्तन आता है तो ऐसी दशा में माँग की आय लोच (20 / 10)2 होगी अर्थात् माँग की लोच इकाई से अधिक है।
( 3 ) माँग की आड़ी लोच (Cross Elasticity of Demand ) - एक वस्तु की कीमत में परिवर्तन का प्रभाव जब दूसरी वस्तु की माँग पर पड़ता है तो हम उसे माँग की आड़ी लोच कहते हैं । उदाहरणार्थ X तथा Y दो वस्तुएँ हैं। माँगी कीमत लोच में केवल उसी कीमत (X वस्तु) का उसी वस्तु (Y वस्तु) की माँग पर प्रभाव पड़ता है
लेकिन आड़ी लोच में Y वस्तु की कीमत में परिवर्तन का X वस्तु की माँग पर पड़ने वाले प्रभाव का आनुपातिक अध्ययन किया जाता है। इस माँग की लोच को निम्नांकित सूत्र से ज्ञात किया जा सकता है:
(ei) = वस्तु की माँग में आनुपातिक परिवर्तन / वस्तु की कीमत में आनुपातिक परिवर्तन
उपभोक्ता की दृष्टि से इस प्रकार की वस्तुएँ स्थानापन्न तथा पूरक हो सकती हैं। पूरक वस्तुओं के सम्बन्ध में जब एक वस्तु का मूल्य बढ़ जाता है तो दूसरी वस्तु की माँग कम कर दी जाती है। इसके विपरीत स्थानापन्न वस्तुओं में एक वस्तु की कीमत बढ़ जाने पर दूसरी वस्तु की माँग बढ़ जाती है।
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