बुद्धि परीक्षाणों के प्रकार - types of intelligence tests
बुद्धि परीक्षाणों के प्रकार - types of intelligence tests
बुद्धि-मापक परीक्षाओं को निम्नलिखित प्रकारों में विभाजित किया गया है-
व्यक्तिगत बुद्धि परीक्षा:- यह परीक्षा एक समय में एक व्यक्ति की ली जाती है। सर्वप्रथम इसका आरम्भ बिने ने किया और इस कार्य में अपने सहयोगी साइमन को लिया और एक परीक्षा विधि बनाई जिसे 'बिने साइमन बुद्धि मानक्रम' कहा गया है। बिने साइन बुद्धिमान प्रणाली में मानसिक आयु के आधार पर बुद्धि परीक्षण किया गया। यह परीक्षा 3 से 15 वर्ष तक के बालकों के लिए थी। जिन-जिन प्रश्नों को 60 प्रतिशत बालकों ने ठीक-ठीक हल कर लिया, उन प्रश्नों में से 6 या 7 प्रश्नों को निकाल कर उन्होंने एक प्रश्नावली का निर्माण किया। इस प्रकार जो बालक जिस उम्र के लिए निर्धारित प्रश्नावलियों के सभी प्रश्नों का ठीक उत्तर दे देता है उसकी मानसिक आयु वही मान ली जाती है।
सामूहिक बुद्धि परीक्षा:- सामूहिक बुद्धि परीक्षण का तात्पर्य उस परीक्षण से है जिसके द्वारा एक समय में अनेक व्यक्तियों या व्यक्ति समूह की बुद्धि की परीक्षा ली जा सकती है। इसके लिए टरमैन, थार्नडाइक, लाक्सीले, पिन्टर आदि मनोवैज्ञानिकों ने दो प्रकार के सामूहिक परीक्षाणों का निर्माण किया।
सामूहिक परीक्षाणों को दो भागों में विभाजित किया गया है।
• शाब्दिक सामूहिक बुद्धि परीक्षण
• अशाब्दिक सामूहिक बुद्धि परीक्षण
क्रियात्मक या व्यावहारिक बुद्धि परीक्षा- क्रियात्मक या व्यावहारिक बुद्धि का प्रयोग विशेष रूप से उन लोगों के लिए किया जाता है, जो भाषा का प्रयोग नहीं कर सकते या निरक्षर है। क्रियात्मक परीक्षाएँ प्रायः व्यक्तिगत रूप से ही ली जाती है।
(क) चित्रांकन परीक्षा:- यह परीक्षा 4 से 10 साल तक की आयु के बालकों के लिए उपयुक्त है। इसमें बालक को एक कागज और पेन्सिल दी जाती है। और उससे विभिन्न प्रकार के चित्र बनाने को कहा जाता है। इस परीक्षा में बालकों को चित्र की पूर्णता के आधार पर अंक दिए जाते है।
(ख) भूलभुलैया परीक्षा:- इसमें बालक को एक ऐसा रेखाचित्र दिया जाता है जिसमें अनेक रास्ते बने होते है। जो बालक एक सिरे से दूसरे सिरे तक बिना रूकावट के पहुँच जाता है। उसे बुद्धिमान समझा जाता है।
(ग) आकृति फलक परीक्षा:- इसमें एक लकड़ी का तख्ता होता है जिसमें विभिन्न आकृति के छेद बने होते है जैसे गोलाकार, अर्द्धगोलाकार, चतुर्भजाकार, त्रिकोणाकार आदि। इन छेदों में उनके अनुरूप कटे हुए टुकड़ों को ठीक से उचित स्थान में बैठाना पड़ता है। जो बालक नियत समय के भीतर टुकड़ो को ठीक स्थान पर रख देता है उसे बुद्धिमान समझा जाता है।
बुद्धि की माप बुद्धि परीक्षण द्वारा की जाती है। सबसे पहला बुद्धि परीक्षण बिने तथा साइमन ने मिलकर 1905 में बनाया था। यह बुद्धि परीक्षण आने वाले वर्गों में मनोवैज्ञानिकों के बीच काफी लोकप्रिय है। फलस्वरूप इसका कई बार संशोधन भी किया गया। इस परीक्षण का सबसे महत्वपूर्ण संशोधन टरमैन द्वारा 1916 में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में किया गया।
इस संशोधन में सबसे पहली बार बुद्धिलब्धि के संप्रत्यय का बुद्धि के सूचक के रूप में प्रयोग किया गया। इसके बाद अनेक मनोवैज्ञानिकों, जैसे वेशलर, अर्थर, कैटेल, रेवेन आदि मनोवैज्ञानिकों ने भी बुद्धि परीक्षण बनाकर बुद्धि मापन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भारत में भी कई मनोवैज्ञानिकों ने बुद्धि परीक्षण का निर्माण किया है। इनमें डॉ.एस. जलोटा, डॉ. मोहनचंद्र जोशी, डॉ. एस. मुहसिन आदि प्रमुख है।
कुछ प्रमुख बुद्धि परीक्षाणों का जिसका प्रयोग बुद्धि मापन में अधिकतर किया गया है निम्नलिखित हैं:
1. बिने-साइमन परीक्षण:- इस परीक्षण का निर्माण बिने तथा साइमन ने फ्रेंच भाषा में 1905 में किया। यह एक प्रकार का वैयक्तिक बुद्धि परीक्षण है। इसमें शाब्दिक एकांशों का प्रयोग किया गया। इसका पहला संशोधन 1908 में किया गया। 1911 में इस परीक्षण का अनुवाद अंग्रेजी भाषा में गोडार्ड द्वारा अमेरिका में किया गया और मानसिक रूप से मंदित बच्चों की बुद्धि मापने में इसका काफी उपयोग किया गया।
इस परीक्षण का संशोधन भिन्न-भिन्न लोगों ने बाद में किया। जैसे कुलमान ने 1912, 1922 तथा 1939, मेंयर्कस ने 1915, 1923 में तथा हेरिंग ने 1922 में इसका संशोधन किया।
इस परीक्षण का सबसे महत्वपूर्ण संशोधन टरमैन ने 1916 में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में किया। इसे स्टैनफोर्ड-विने परीक्षण के नाम से पुकारा गया। पहली बार इस संशोधन के सहारे इस परीक्षण द्वारा व्यक्ति की बुद्धि की माप बुद्धिलब्धि के रूप में कियागया। इस संशोधन द्वारा दो साल से व्यस्कता तक के व्यक्तियों का बुद्धि परीक्षण किया जा सकता था। 1960 में पुनः इसका संशोधन हुआ और अब इसके द्वारा 2 से 22 साल 11 महीना तक के व्यक्तियों की बुद्धि मापी जा सकती थी। 1973 में इस परीक्षण का एक नया मानक तैयार किया गया है। यह बहुत ही विश्वसनीय तथा वैध परीक्षण है। इसकी विश्वसनीयता 90 से ऊपर तथा वैधता .75 से भी अधिक है।
2. वेशलर बुद्धि परीक्षण:- वेशलर जो न्यू यार्क सिटी के बेलेब्यू अस्पताल में काम करते थे, ने बुद्धि के मापन की ओर काफी सक्रिय योगदान दिया है।
इन्होंने वयस्कों की बुद्धि मापने के लिए 1939 में एक मापनी तैयार की, जिसका नाम वेशलर बेलेव्यू मापनी रखा गया। इस परीक्षण के दो फार्म थे और दोनों फार्म में दस-दस उप-परीक्षण थे। दस में पांच शाब्दिक मापनी थे तथा पांच क्रियात्मक मापनी थे। इस परीक्षण का 1955 में संशोधन किया गया और इसका नाम वेशलर वयस्क बुद्धि मापनी रखा गया। 1981 में इस मापनी का फिर संशोधन किया गया और इसका नाम CWAIS-R रखा गया। इस नई संशोधित मापनी में 11 उप-परीक्षण हैं, जिसमें प्रथम 6 शाब्दिक मापनी हैं तथा अंतिम 5 क्रियात्मक मापनी हैं। इस परीक्षण द्वारा 16 से 64 साल तक के व्यक्तियों की बुद्धि का मापन किया जाता है। WAIS का तीसरा संस्करण 2005 में किया गया है, जिसे WAIS - IV कहा जाता है।
वेशलर ने बच्चों की बुद्धि मापनी के लिए एक दूसरा परीक्षण 1949 में बनाया है, जिसे वेशलर बुद्धि मापनी बच्चों के लिए या WISC कहा गया।
वेशलर ने अत्यन्त छोटे बच्चों की बुद्धि को मापने के लिए एक-दूसरे परीक्षण का निर्माण किया, क्योंकि WISC-R द्वारा 6 साल से नीचे के बच्चों की बुद्धि नहीं मापी जा सकती थी। इस उद्देश्य से 1967 में एक मापनी बनाया गया, जिसका नाम Wechsler Preschool and Primary Scale of Intelligence (WPPSI) रखा गया। इस परीक्षण का सामान्य आकार-प्रकार पहले दो परीक्षाणों के ही समान था। इस परीक्षण में 11 उप परीक्षण थे, जिनमें 6 शाब्दिक मापनी थे तथा 5 क्रियात्मक मापनी थे।
3. कैटेल संस्कृति-मुक्त बुद्धि परीक्षण:- इस परीक्षण का निर्माण कैटेल ने किया है, जिसमें तीन मापनियाँ हैं - मापनी I (Scale-I) चार से आठ वर्ष की आयु के बच्चे तथा मानसिक दोष वाले वयस्कों के लिए प्रयोग किया जाता है, मापनी-II (Scale-II) आठ से तेरह वर्ष की आयु वाले तथा औसत वयस्कों के लिए प्रयोग होता है तथा मापनी III (Scale-III) हाईस्कूल के छात्रों कॉलेज के छात्रों तथा 14 वर्ष से अधिक आयु वाले व्यक्तियों पर प्रयोग किया जाता है। इन तीनों तरह की मापनी द्वारा सामान्य मानसिक क्षमता कारक, जिसे स्पीयरमैन ने g-कारक (g-factor) कहा है, का मापन कर सकता है।
4. रैवेन्स प्रोग्रेसिव मैट्रिसेज:- इस परीक्षण का निर्माण रैवेन ने 1938 में किया था। इस परीक्षण के दो फार्म हैं - एक बच्चों के लिए तथा दूसरा वयस्कों के लिए। बच्चों के लिए प्रयोग होने वाले फार्म को रंगीन प्रोग्रेसिव मैट्रिसेज कहा जाता है तथा वयस्कों के लिए प्रयोग होने वाले मैट्रिसेज के स्टैण्डर्ड प्रोग्रेसिव मैट्रिसेज कहा जाता है।
5. कुछ प्रमुख भारतीय बुद्धि परीक्षण:- बुद्धि मापने का प्रयास भारतीय मनोवैज्ञानिकों द्वारा भी काफी अधिक किया गया है, जिनमें प्रमुख है - डॉ. एम.सी. जोशी द्वारा मानसिक योग्यता 1960, डॉ. प्रयास मेहता द्वारा सामूहिक बुद्धि परीक्षण 1962, डॉ. आर. के. टण्डन द्वारा सामूहिक मानसिक योग्यता परीक्षण 1971, प्रो. आर. के. ओझा तथा प्रो. राय चौधरी द्वारा वाचिक बुद्धि परीक्षण 1971, डॉ. एस. एस. जलोटा द्वारा मानसिक योग्यता की संशोधित सामूहिक परीक्षा 1972 तथा डॉ. एम. एस. मुहसिन द्वारा सामान्य बुद्धि परीक्षण 19431 ये सभी बुद्धि परीक्षण शाब्दिक बुद्धि परीक्षण है, जिनका उपयोग सिर्फ उन्हीं व्यक्तियों की बुद्धि मापने में किया जाता है, जो पढ़े-लिखे हैं तथा जिन्हें भाषा का ज्ञान है, क्योंकि इनके एकांशों तथा निर्देश हिंदी भाषा में एक पुस्तिका में छपे होते हैं, जिन्हें परीक्षार्थी को पढ़कर समझना होता है।
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