संविलयन एवं अधिग्रहण के प्रकार - Types of Mergers and Acquisitions
संविलयन एवं अधिग्रहण के प्रकार - Types of Mergers and Acquisitions
संविलयन के निम्नलिखित तीन प्रकार हो सकते हैं
1. क्षैतिज संविलयन
2. लंबवत संविलयन
3. संपिडित संविलयन
इनका विवरण निम्नलिखित है:
(1) क्षैतिज संविलयन ( HorIZontal Merger)- जब एक ही क्षेत्र या व्यवसाय या उद्योग में कार्यरत दो या अधिक कंपनियाँ आपस में संयोजन करती हैं तो उसे क्षैतिज संविलयन कहते हैं।
यह भी हो सकता है कि ये कंपनियाँ एक ही बाजार में अपनी वस्तुये बेचती हों क्षैतिज संविलयन का उद्देश्य प्रतिस्पर्धा को कम करना, मूल्य संबंधी कटौतियों को रोकना, बड़े पैमाने पर मितव्ययिता का लाभ उठाना, शोध एवं विकास के लिये, विपणन तथा प्रबंधन संबंधी उन्नयन का लाभ उठाना आदि हो सकता है। यदि 'अ' व कंपनी' तथा 'सद कंपनी' जो वस्त्र का उत्पादन करती है तो उसे क्षैतिज संविलयन कहते हैं। इससे दोनों कंपनियों में प्रतिस्पर्धा समाप्त हो जायेगी। उदाहरण के लिये, टाटा आयल मिल कंपनी का हिन्दुस्तान लीवर लि. में संविलयन, टाटा स्टील का कोरस स्टील से संविलयन भी इसका उदाहरण है।
(2) लंबवत संविलयन (Vertical Merger) - जब दो या अधिक कंपनियाँ, जो वस्तु के उत्पादन या वितरण के कई अवस्थाओं में व्यवसाय कर रही हों, आपस में संयोजन करती हैं तो उसे लंबवत संविलयन कहते हैं।
उदाहरण के लिये, एक कताई मिल, बुनाई मिल से संयोजन करती है तो लंबवत संयोजन कहेंगे। यह दो प्रकार का हो सकता है:
(अ) अग्रगामी संविलयन (Forward Merger ) तथा प्रतिगामी संविलय (Backward Merger) अग्रगामी संविलयन (Forward Merger) तब होगा जब उत्पादन करने वाली कंपनी उस वस्तु की बिक्री करने वाली कंपनी से संयोजन करती है। उदाहरण के लिये, तेल के भण्डारण या उसकी बिक्री करने वाली कंपनी का संयोजन इसका उद्देश्य मध्यस्थों को समाप्त करके उनके लाभ को स्वयं प्राप्त करना या उपभोक्ता को सस्ते दर पर माल देना हो सकता है।
(ब) प्रतिगामी संविलय (Backward Merger ) - जब कच्चा माल बनाने वाली कंपनी का इस कच्चे माल से निर्मित माल बनाने वाली कंपनी से संयोजन करती है तो उसे प्रतिगामी संयोजन कहते है।
उदाहरण के लिये जब लुग्दी बनाने वाली कंपनी कागज बनाने वाली कंपनी से संयोजन करती है तो वह प्रतिगामी संयोजन कहलायेगा।
(3) संपिडित संविलयन (Conglomerate Merger ) संपिडित संविलयन के अंतर्गत, संयोजन करने वाली कंपनियाँ अलग-अलग क्षेत्र, असंबंधित उद्योग या व्यापार में व्यवसाय करने वाली होती है। जैसे एक सीमेंट का उत्पादन करने वाली कंपनी, उर्वरक का उत्पादन करने वाली कंपनी से संयोजन करती है तो उसे संपिडित संविलयन कहते हैं। ये कंपनियाँ न तो आपस में प्रतिस्पर्धा करती है और न ही एक-दूसरे के पूरक हैं। इसका उद्देश्य लाभोत्पादकता बढ़ना, आर्थिक शक्ति बढ़ाना या विविधता (Diversification) लाना हो सकता है। वोल्टाज लि. इसी प्रकार के संविलयन का उदाहरण है। उच्चावचन के कारण, विक्रय तथा लाभ पर यदि एक कंपनी पर असर पड़ता है तो उसकी क्षतिपूर्ति दूसरी कंपनी की बिक्री या लाभ हो सकती है।
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