अभिप्रेरणा के प्रकार - types of motivation

अभिप्रेरणा के प्रकार - types of motivation

1. प्राकृतिक अभिप्रेरणा या आन्तरिक अभिप्रेरणा- यह अभिप्रेरणा प्रत्यक्ष रूप से व्यक्ति की प्राकृतिक इच्छाओं, आवश्यकताओं और प्रवृत्तियों के साथ सम्बंधित होती है। आन्तरिक रूप से अभिप्रेरित व्यक्ति किसी काम को इसलिए करता है क्योंकि उस काम को करने में उसे हार्दिक प्रसन्नता प्राप्त होती है। जब कोई विद्यार्थी गणित की किसी समस्या को हल करने में आनंद प्राप्त करता है या किसी कविता के पाठ द्वारा प्रसन्नता प्राप्त करता है तब वह आन्तरिक रूप से अभिप्रेरित होता है। विद्यार्थी 'स्वान्तः सुखाय' की भावना से गणित की समस्या हल करता है या कविता का अध्ययन करता है। सीखने में इस प्रकार की अभिप्रेरणा का वास्तविक महत्व होता है क्योंकि इससे स्वाभाविक रुचि उत्पन्न होती है और अंत तक बनी रहती है।


2. अप्राकृतिक अभिप्रेरणा या बाह्य अभिप्रेरणा- इस अभिप्रेरणा में आनंद का स्रोत कार्य में निहित नहीं होता है। इसमें व्यक्ति मानसिक प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए काम नहीं करता है, अपितु किसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए या कोई पुरस्कार प्राप्त करने के लिए कार्य करता है।

अच्छे ग्रेड या मान के लिए काम करना, जीविकोपार्जन के लिए कोई शिल्प सीखना, प्रशंसा प्राप्ति के लिए काम करना, पुरस्कार एवं दण्ड आदि सभी इसी वर्ग की अभिप्रेरणा के अंतर्गत आते हैं।


3. बाह्य अभिप्रेरणा की तुलना में आन्तरिक अभिप्रेरणा स्वाभाविक उत्साह और प्रेरणा का साधन है। इसलिए सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में इसके अच्छे परिणाम निकलते हैं। अतः जहाँ तक संभव हो सके, आन्तरिक अभिप्रेरणा का ही प्रयोग करना चाहिए। परन्तु जहाँ तक संभव न हो, बाह्य अभिप्रेरणा का प्रयोग किया जाना चाहिए। अतः सीखने की स्थिति तथा कार्य की प्रकृति के •अनुसार अध्यापक को उचित प्रकार की अभिप्रेरणा का प्रयोग करना चाहिए ताकि विद्यार्थी सीखने की क्रियाओं में पर्याप्त रुचि ले सकें।।