अवलोकन के प्रकार - Types of Observation

अवलोकन के प्रकार - Types of Observation


निरीक्षण मुख्यतः दो प्रकार का होता है


1. बाह्य निरीक्षण (External Observation)


2. स्वयं निरीक्षण (Self-Observation)


अवलोकन का दो अन्य प्रकार से भी वर्गीकरण किया जा सकता है:


(1) प्रत्यक्ष अवलोकन (Direct Observation)


(2) अप्रत्यक्ष अवलोकन (Indirect Observation)


प्रत्यक्ष अवलोकन (Direct Observation) : प्रत्यक्ष अवलोकन में व्यक्ति का यथार्थ स्थिति में निरीक्षण किया जाता है। इस विधि में परीक्षण कर्ता बालक के व्यवहार का अवलोकन प्रत्यक्ष रूप से करता है। बालक अपने नित्यप्रति के कार्य में व्यस्त रहता है और निरीक्षण कर्ता अपने अवलोकन को नियमित रूप से लिखता जाता है। स्वाभाविक है कि निरीक्षणकर्ता की उपस्थिति में बालक का स्वभाव कुछ सीमा तक अस्वाभाविक हो जाता है। फलत: हमारा अवलोकन परम शुद्ध नहीं कहा जा सकता, फिर भी, प्रत्यक्ष अवलोकन प्रविधि के द्वारा बालकों के व्यवहार संबंधी विभिन्न पक्षों के बारे में हमें सही जानकारी प्राप्त हो जाती है। अबोध बालक के व्यवहार के मूल्यांकन के संदर्भ में इस विधि की प्रमुखता दो कारणों से है-


1. अबोध बालक अपने व्यवहार को कृत्रिम बनाने की चेष्टा नहीं कर पाता है। अतः किसी अजनबी की उपस्थिति उसके व्यवहार को बहुत अधिक देर तक प्रभावित नहीं कर पाती है।


2. बालकों में भाषा का विकास सीमित रहने के कारण प्रत्यक्ष अवलोकन ही अधिक सार्थक प्रतीत होता है। 


अप्रत्यक्ष अवलोकन (Indirect Observation) :- अप्रत्यक्ष अवलोकन में प्राप्त तथ्यों के आधार पर व्यक्ति को समझने का प्रयास किया जाता है। यह प्रविधि प्रत्यक्ष अवलोकन का ही परिष्कृत रूप है। यह प्रविधि समाजशास्त्र के क्षेत्र में शोध कार्य के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई है। समाजशास्त्र के शोध कर्ताओं ने आदिवासियों की जीवन शैली का विश्वसनीय परिचय इसी प्रविधि के माध्यम से प्रस्तुत किया है। इस प्रविधि को प्रभावशाली बनाने के लिए निम्न बातों को ध्यान में रखने चाहिए-


1. व्यवहार प्रारूप (Behaviour Pattern) निश्चित कर लेना चाहिए।


2. चयन किए गए व्यावहारिक पक्षों का विशिष्टीकरण (Specification) कर देना चाहिए


3. व्यवहार अवलोकन को लिपिबद्ध करने (Recording) की उचित व्यवस्था की जाए। 


4. निरीक्षण कार्य का परिमापन (Quantification) कर लेना चाहिए।


5. इस विधि का प्रयोग करने वाले अध्यापक को उचित प्रशिक्षण दिया जाए।