मूल्यों के प्रकार - types of values
मूल्यों के प्रकार - types of values
मूल्य कई प्रकार के होते हैं। शिक्षा के मूल्य केवल चुनाव ही नहीं वरन्बुद्धिमत्तापूर्ण चुनाव है। यदि किसी बालक की इच्छा है कि वह कला सीखे तो उसे विज्ञान का विषय पढ़ाना उत्तम नहीं होगा। उसकी इच्छाओं को केवल कला ही पूरा कर सकेगी। वैसे विद्यालय का प्रत्येक कार्य मूल्यवान है किंतु छात्र को तो चुनाव करना ही पड़ता है। साधारणतः मूल्य दो प्रकार के होते हैं-
(1) नैमित्तिक मूल्य Instrumental Values)
(2) आंतरिक मूल्य (Intrinsic Values)
नैमित्तिक मूल्य किसी विशेष प्रयोजन के मूल्य होते हैं। विषयों के चुनाव में कौन से विषय छात्र के भविष्य के लिए स्कूलता के सूत्र बनेगे इस बात का निर्णय नैमित्तिक मूल्य के आधार पर करना होगा।
कुछ मूल्य आंतरिक होते हैं और उनका चुनाव किसी मान्यता के आधार पर नहीं होता। स्वयं के अतिरिक्त उनका कोई अन्य प्रयोजन नहीं होता है। उदाहरण के लिए मेज को ही ले लीजिए। कक्षा के अंदर उस मूल्य की कोई अन्य वस्तु नहीं है। मेज अपने मूल्य के कारण ही कक्षा में है न कि किसी अन्य मूल्य के कारण।
क्या आंतरिक और नैमित्तिक मूल्य किसी एक ही वस्तु में एक साथ संभव हो सकते हैं नैमित्तिक मूल्यों को मानने वाले तो इसका उत्तर न से ही देंगे। आंतरिक मूल्यों पर विश्वास करने वालों के लिए यह बात संभव है कि मेज का मूल्यउससे पढ़ने-लिखने का काम लेकर ही देखा जा सकता है। किंतु यदिहम उस पर बैठ जाएँ तो कुछ समय के लिए उसका नैमित्तिक मूल्य हो जाएगा। इस प्रकार उनके लिए एक ही वस्तु में दोनों मूल्य संभव है। इसी प्रकार पाठ्यक्रम कौन सा विषय नैमित्तिक मूल्य के कारण रखा गया है और कौन सा विषय आन्तरिक मूल्य के कारण है, इसका निर्णय सरल नहीं है। दोनों प्रकार के मत मिल जाते हैं। जैसे संस्कृत को भारतीय विद्यालयों के पाठ्यक्रम में नैमित्तिक मूल्य के कारण सम्मिलित किया गया है अथवा आंतरिक मूल्य के कारपाइसके विषय में दोनों प्रकार के मत मिलते हैं। कुछ मूल्य सौंदर्यशास्त्र से भी संबंधित होते हैं। जैसे इनका क्षेत्र शिक्षाशास्त्रियों की संकीर्णता के कारण संकुचित ही रह गया है। प्रायः इसी कारण सौंदर्यशास्त्र में केवल संगीत कला, चित्रकला इत्यादि को ही सम्मिलित किया गया है। फिर भी हम भलीभाँति जानते है कि प्रत्येक विषय की अपनी उपयोगिता होती है तथा उसकी प्रशंसा करने का अपना मानदण्ड होता है। यही बात सौंदर्यशास्त्र संबंधी विषयों के लिए भी सच है वैसे, सौंदर्यशास्त्र के मूल्य अपने पैरों पर भी खड़े हो सकते हैं किंतु उन्हें जीवन के कार्यों से अलग नहीं होना चाहिए। प्रत्येक पाठ में उनका योग आवश्यक है।
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