कार्यशील पूंजी के प्रकार - types of working capital

कार्यशील पूंजी के प्रकार - types of working capital


साधारणः कार्य शील पूंजी को दो वर्गो में वगीकृत किया जाता है 

(अ) स्थायी या नियमित या स्थिर कार्यशील पूंजी, और 

(ब) परिवर्तनशील, मौसमी या अस्थायी या विशिष्ट कार्यशील पूंजी ।


(अ) स्थिर कार्यशील पूंजी चल सम्पत्तियों की आवश्यकता संचालन चक्र से सम्बन्धित है, जो अपने आप में एक सतत प्रक्रिया है । इस प्रकार चल सम्पत्तियों की आवश्यकता नियमित रूप से महसूस की जाती है । परन्तु चल सम्पत्तियों में विनियोग की मात्रा हमेशा एक समान नहीं होती है। उत्पादन के स्तर के अनुसार एक समयावधि में चल सम्पत्तियों में विनियोग की मात्रा बढ़ती या घटती रहती हैं। फिर भी चल सम्पत्तियों का एक न्यूनतम स्तर ऐसा होता है जो व्यवसाय के संचालन के लिए अपरिहार्य होता है, चाहे उत्पादन स्तर कुछ भी क्यों न रहे। यह न घटने योग्य न्यूनतम विनियोग स्थायी रूप से व्यवसाय में बना रहता है

और इस लिए इसे स्थायी या स्थिर या नियमित कार्यशील पूंजी कहते है यह उसी प्रकार स्थायी होती है, जैसे स्थायी सम्पत्तियों में विनियोग होता है। कहने की आवश्यकता नहीं है कि इस प्रकार की कार्यशील पूंजी का अर्थ प्रबन्धन स्थायी वित्त स्रोत से किया जाना चाहिए।


(ब) परिवर्तनशील कार्यशील पूंजी - स्थायी कार्यशील पूंजी के अलावा शेष कार्यशील पूंजी की मात्रा उत्पादन व विक्रय में परिवर्तन के अनुसार बदलती रहती है । कार्यशील पूंजी की आवश्यकता मौसमी परिवर्तनों या असाधारण दशाओं के कारण भी बदलती रहती है। बदलती व्यावसायी क्रियाओं को सहायता हेतु अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की आवश्यकता ही परिवर्तनशील कार्यशील पूंजी मानी जाती है। उदाहरण के लिए, कीमत स्तर में वृद्धि से कच्चे माल के स्टॉक में विनियोग की मात्रा में वृद्धि होगी : गलकटा, प्रतियोगिता तालाबंदी हड़ताल आदि से उत्पन्न समस्याओं का सामना करने हेतु अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की जरूरती होगी विक्रय-संवर्द्धन हेतु विशिष्ट विज्ञापन व अन्य प्रोत्साहनों हेतु अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की जरूरत पड़ सकती है।