अन्वेषण पर आधारित शिक्षण के विभिन्न अवयव - Various components of exploration-based learning
अन्वेषण पर आधारित शिक्षण के विभिन्न अवयव - Various components of exploration-based learning
इसका पहला अवयव अध्यापक द्वारा छात्रों को समस्या से भलीभांति परिचित कराना है। अध्यापक का प्रयास रहता है कि बच्चे समस्यात्मक तथा विस्मयकारी परिस्थितियों से भलीभाँति परिचित हो जाये और उसके समाधान को ढूंढने का प्रयास शुरू कर दें। अतः इसका पहला अवयव प्रयास है।
यह प्रयास भी दो तरह का हो सकता है
1. व्यक्तिगत प्रयास
2. सामूहिक प्रयास
1. व्यक्तिगत प्रयासः व्यक्तिगत प्रयास के अन्तर्गत शिक्षार्थी अकेले ही इस प्रयास की और उन्मुख होता है अथवा अध्यापक किसी एक ही शिक्षार्थी को इस ओर उन्मुख करता है।
2. सामूहिक प्रयासः सामूहिक प्रयास के अन्तर्गत अध्यापक व छात्र की ओर से समस्या से परिचित होने अथवा करवाने का प्रयास सामूहिक रूप में होता है।
इसके माध्यम से कक्षा के सभी छात्र अपनी अलग-अलग अथवा सामूहिक सहभागिता से आपस में सहयोगपूर्ण तथा भिन्नतापूर्ण वातावरण के निर्माण में सहयोग देते हैं। व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ-साथ सामूहिकता को लगातार महत्व मिलता रहता है। हर कोई अपने स्तर पर अपनी भूमिका निभाता हुआ अपने आपको एक जिम्मेदर सदस्य के रूप में पेश करता है। वह अपनी सक्रिय, सकारात्मक भूमिका निभाना सीखता है।
खोज का दूसरा अवयव समस्या के समाधान को ध्यान में रखते हुये अनेक प्रकार की परिकल्पनाओं पर विचार करना समाधान से जुड़े आकड़ों को इकट्ठा करना है ताकि समाधान की अपेक्षित सामग्री तैयार हो सके।
1इसका तीसरा अवयव समस्या के समाधान की प्राप्ति है तथा साथ ही समाधान के लिये प्रयुक्त किये गये चिन्तन पर बिचार बिमर्श करना है। इसका तार्किक आधार प्रस्तुत करना है विभिन्न युक्तियों को देना है। सार रूप में खोज पद्धति के दो प्रमुख भाग होते हैं
1. समस्या की पहचान व आकड़ों का संग्रह।
2. समाधान की उपलब्धि व उस पर गहन चिन्तन तथा विश्लेषण के माध्यम से सिद्धान्त का निर्माण।
इस आधार पर यह छात्रों द्वारा स्वयं ही सिद्धान्त निर्माण की प्रक्रिया है। इसे एक वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित तथाक्रमबद्ध शिक्षण की प्रक्रिया के रूप में देखा गया है।
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