शिक्षण तकनीकी के संबंध में विभिन्न विद्वानों के विचार - Views of Different Scholars on Teaching Technology
शिक्षण तकनीकी के संबंध में विभिन्न विद्वानों के विचार - Views of Different Scholars on Teaching Technology
बी. ओ. स्मिथ (B.O. Smith) के अनुसार "अध्यापक जब अपने पढ़ाने के काम को प्रभावशाली बनाने के लिए तथा शिक्षार्थी व्यवहार में परिवर्तन के लिए शिक्षा मनोविज्ञान, यंत्रों, साधनों, ज्ञान, अनुभव, कौशल आदि का प्रयोग करता है, उसी को शिक्षण तकनीकी कहते हैं।" स्किनर (Skinner) के अनुसार "शिक्षण तकनीकी शैक्षिक तकनीकी का अंग है जो अध्यापक को प्रभावशाली बनाकर शिक्षण-प्रक्रिया को अत्यधिक समृद्धशाली बनाती है ।" फ्लैंडर्स (Flanders) के अनुसार- "शिक्षण तकनीकी शिक्षक एवं विद्यार्थियों के बीच पारस्परिक संबंधों में सहायक क्रियाविधियों की जानकारी है।"
डॉ. कुलश्रेष्ठ (Dr. Kulshrestha) के अनुसार "जब मनोविज्ञान के सिद्धांत ( कैसे पढ़ाया जाय ),
समाजशास्त्र के सिद्धांत (क्या पढ़ाया जाय ) तथा दर्शनशास्त्र के सिद्धांत ( क्यों पढ़ाया जाय) मिलकर यह निर्धारित करते हैं कि प्रभावशाली शिक्षण कैसे किया जाय तभी शिक्षण तकनीकी का जन्म होता है।" डॉ. आर. ए. शर्मा (Dr. R. A. Sharma) के अनुसार- "शिक्षण तकनीकी एक ऐसी विचारधारा है जो शिक्षण-कला को अधिक स्पष्ट, सरल, वस्तुनिष्ठ तथा वैज्ञानिक बनाती हुई विद्यार्थियों एवं शिक्षकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करती है, साथ ही यह शिक्षण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावशाली, मनोवैज्ञानिक, व्यावहारिक तथा प्रयोगात्मक बनाती है जिससे शिक्षार्थी, शिक्षक और समाज सभी लाभान्वित होते हैं।"
उपर्युक्त विचारों से स्पष्ट है कि शिक्षण तकनीकी सिद्धांतों प्रविधियों, यंत्रों एवं साधनों का एक ऐसा विज्ञान हैं जिसके द्वारा छात्रों एवं शिक्षक के बीच पारस्परिक संबंध स्थापित कर उचित शिक्षण परिस्थितियाँ पैदा की जाती है ताकि पाठ्यवस्तु का संप्रेषण प्रभावकारी रूप से हो तथा विद्यार्थियों के व्यवहार में अपेक्षित परिवर्तन लाया जा सके।
वार्तालाप में शामिल हों